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अभिभावकों के लिए बड़ी राहत! अब निजी स्कूल नहीं थोप पाएंगे महंगी किताबें, NCERT पर NHRC का बड़ा एलान

NHRC Order on School Books: अभिभावकों के लिए एक राहतभरी खबर सामने आई है. निजी स्कूलों की मनमानी फीस खासकर हर साल महंगी किताबें खरीदने के दबाव पर आखिरकार रोक लगने वाली है. मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने यह साफ कर दिया है कि, चाहे कोई स्कूल सरकारी हो या निजी, शिक्षा और पढ़ाई-लिखाई के मामलों में बच्चों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
Last Updated: April 23, 2026 | 4:23 PM IST
NHRC Issued Notice to State Governments and the Ministry of Education - Photo Gallery
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NHRC ने राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को जारी किया गया नोटिस

पूरे देश से मिली शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए, प्रियंका कानूनगो की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने सभी राज्य सरकारों और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने 'नमो फाउंडेशन' द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई शुरू की है.

Children and parents to get relief from expensive textbooks. - Photo Gallery
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बच्चों और अभिभावकों को मिलेगी महंगी पाठ्यपुस्तकों से राहत

अक्सर यह देखा जाता है कि निजी स्कूल जान-बूझकर निजी प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकें अनिवार्य कर देते हैं, जो NCERT द्वारा प्रकाशित किताबों की तुलना में दस गुना तक महंगी हो सकती हैं. आयोग ने अब निर्देश दिया है कि, कक्षा 8 तक की पढ़ाई के लिए, केवल NCERT या SCERT द्वारा प्रकाशित पाठ्यपुस्तकों का ही उपयोग किया जाए. इसका मतलब है कि अब अभिभावकों को पाठ्यपुस्तकों पर हजारों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आयोग ने शिक्षा मंत्रालय से यह स्पष्टीकरण भी मांगा है कि कक्षा 8 तक के पाठ्यक्रम सरकारी मानकों से अलग क्यों हैं.

The burden of children's bags will be reduced. - Photo Gallery
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बच्चों के बैग का बोझ होगा कम

इसके अलावा, आयोग ने 'राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति 2020' को सख्ती से लागू करने का आह्वान किया है. इसका सीधा सा मतलब है कि अब आपके बच्चे के स्कूल बैग का वजन कम हो जाएगा. शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम की धारा 29 का हवाला देते हुए, आयोग ने स्पष्ट किया है कि उन स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए जो छात्रों पर अत्यधिक किताबें थोपते हैं, जिससे उन पर अनावश्यक शारीरिक बोझ पड़ता है.

NHRC Bans Arbitrary 'Book Lists' - Photo Gallery
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मनमानी 'किताबों की सूचियों' पर प्रतिबंध

स्कूल अब अपनी पसंद की पाठ्यपुस्तकें मनमाने ढंग से थोप नहीं पाएंगे. प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह 30 दिनों के भीतर हर स्कूल का ऑडिट करे. यदि कोई स्कूल NCERT द्वारा निर्धारित किताबों के अलावा अन्य किताबों का उपयोग करता हुआ पाया जाता है, तो उसे ऐसा करने के लिए स्पष्टीकरण देना होगा.

What has the NHRC asked the states? - Photo Gallery
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NHRC ने राज्यों से क्या पूछा है?

NHRC ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर, निम्नलिखित तीन प्रमुख जानकारियां मांगी हैं:
- क्या आपके जिलों में शिक्षा अधिकारियों ने स्कूलों के लिए NCERT पाठ्यपुस्तकों का उपयोग अनिवार्य करने वाले आदेश जारी किए हैं?
-यदि ऐसे आदेश अभी तक जारी नहीं किए गए हैं, तो उन्हें तत्काल जारी करें और स्कूलों की सूची का सत्यापन करें.
-2025-26 के शैक्षणिक सत्र के दौरान निजी और सरकारी स्कूलों में कितने बच्चों ने दाखिला लिया है, और उनके लिए कितनी पाठ्यपुस्तकें खरीदी गई हैं?

It is essential for school curricula to be uniform. - Photo Gallery
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स्कूलों का पाठ्यक्रम समान होना जरूरी

आयोग ने कड़े शब्दों में कहा है कि, चूंकि सरकारी स्कूलों में NCERT की पाठ्यपुस्तकों का पालन किया जाता है, इसलिए निजी स्कूलों में महंगी किताबें निर्धारित करना एक प्रकार का भेदभाव है. शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत, पाठ्यक्रम एक समान होना अनिवार्य है. सभी राज्य सरकारों को अगले 30 दिनों के भीतर आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना आवश्यक है.

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