हीरो बनने पहुंचे मुंबई, अखबार में की नौकरी, सांप से डर फिर भी किया खतरनाक सीन; 380 फिल्मों में बने विलेन
Prem Chopra: 23 सितंबर 1935 को जन्मे प्रेम चोपड़ा ने जब फिल्मों में करियर बनाने का सपना देखा, तब परिवार उनके इस फैसले को लेकर खुश नहीं था. पिता चाहते थे कि बेटा कोई सुरक्षित नौकरी करे लेकिन प्रेम चोपड़ा के मन में एक्टिंग बस चुकी थी. शिमला में कॉलेज के दिनों में वह थिएटर और नाटकों में हिस्सा लेते थे. ग्रेजुएशन के बाद वह अपने सपने को पूरा करने मुंबई पहुंच गए. मुंबई में शुरुआती दिनों में फिल्मों के चक्कर लगाना आसान नहीं था. स्टूडियो के चक्कर लगाने के साथ उन्होंने द टाइम्स ऑफ इंडिया के सर्कुलेशन विभाग में नौकरी कर ली. इस नौकरी में उन्हें बंगाल, ओडिशा और बिहार की यात्राएं करनी पड़ती थीं.
ट्रेन के सफर में मिला पहला बड़ा मौका
प्रेम चोपड़ा की जिंदगी में फिल्मी मौका भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. एक ट्रेन यात्रा के दौरान एक शख्स ने उनसे पूछा कि क्या वह फिल्मों में काम करना चाहते हैं. इसके बाद उन्हें पंजाबी फिल्म 'चौधरी करनैल सिंह' में हीरो बनने का मौका मिला. 1960 में आई यह फिल्म सफल रही और उन्हें पहली फिल्म के लिए लगभग 2,500 रुपये मिले थे.
हीरो बनना चाहते थे प्रेम चोपड़ा
शुरुआत में प्रेम चोपड़ा हीरो बनना चाहते थे. उन्होंने मैं शादी करने चला, कुंवारी और सिकंदर-ए-आजम जैसी फिल्मों में भी काम किया. हालांकि हिंदी फिल्मों में उनकी हीरो वाली पारी ज्यादा नहीं चली. इसके बाद वो कौन थी?, शहीद, तीसरी मंजिल और उपकार जैसी फिल्मों ने उनके करियर की दिशा बदल दी.
सांप से डरते थे प्रेम चोपड़ा
पर्दे पर बड़े-बड़े हीरो को डराने वाले प्रेम चोपड़ा असल जिंदगी में सांपों से बेहद डरते थे. शुरुआती दौर की पंजाबी फिल्म सपनी की शूटिंग के दौरान उन्हें टोकरी से असली सांप निकालने का सीन करना था. उन्होंने कई बार कोशिश की लेकिन सांप को देखते ही उनके हाथ-पैर ठंडे पड़ गए. आखिरकार वह शूटिंग छोड़कर जाने तक को तैयार हो गए. बाद में यह सीन प्लास्टिक के सांप के साथ शूट किया गया. कई साल बाद 'बैराग' फिल्म में भी उन्हें सांप के साथ सीन करना पड़ा. दिलीप कुमार को उनकी परेशानी के बारे में पता था इसलिए उन्होंने सांप को हाथ से पकड़ने के बजाय डंडे से उठाने का तरीका सुझाया.
'प्रेम नाम है मेरा...' से बन गई पहचान
प्रेम चोपड़ा के करियर में 'उपकार' के बाद विलेन वाली छवि मजबूत होती गई. उन्होंने दो रास्ते, कटी पतंग, दाग, अजनबी, बॉबी, देस परदेस और क्रांति जैसी फिल्मों में उनके किरदार याद किए गए. राजेश खन्ना के साथ भी उन्होंने कई फिल्मों में काम किया. फिल्म बॉबी का डायलॉग 'प्रेम नाम है मेरा, प्रेम चोपड़ा' उनकी पहचान बन गया. प्रेम चोपड़ा ने बताया था कि यह डायलॉग राज कपूर ने उन्हें बोलने को कहा था. आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रेम चोपड़ा ने अपने करियर में लगभग 400 फिल्मों में काम किया है. इनमें से 380 फिल्मों में उन्होंने विलेन का किरदार निभाया है.
असली जिंदगी में मिली सादगी भरी मोहब्बत
प्रेम चोपड़ा की निजी जिंदगी भी कम दिलचस्प नहीं रही. उन्होंने 1969 में उमा से शादी की. उमा फिल्मी परिवार से आती थीं और वह कृष्णा राज कपूर की बहन थीं. प्रेम और उमा की पहली मुलाकात भी किसी फिल्मी रोमांस की तरह नहीं, बल्कि परिवार के जरिए हुई थी. एक इंटरव्यू में प्रेम चोपड़ा ने बताया कि यह मूल रूप से अरेंज्ड मैरिज थी. दोनों की पहली मुलाकात उमा के भाई राजेंद्र नाथ के घर हुई थी. बाद में दोनों ने शादी का फैसला किया और 27 मार्च 1969 को विवाह हुआ.