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पर्दे पर रौबदार, असल जिंदगी में दरियादिल… अमिताभ बच्चन की एक चिट्ठी ने बदली थी विक्रम गोखले की जिंदगी

Vikram Gokhale: बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो अपने अभिनय से किरदारों को हमेशा के लिए यादगार बना देते हैं. विक्रम गोखले भी ऐसे ही अभिनेता थे. ‘हम दिल दे चुके सनम’ में ऐश्वर्या राय के सख्त पिता से लेकर ‘अग्निपथ’ तक उन्होंने कई शानदार भूमिकाएं निभाईं लेकिन उनकी असल जिंदगी के किस्से भी कम दिलचस्प नहीं हैं…

Last Updated: October 30, 2026 | 1:52 PM IST
Amitabh Bachchan provided help - Photo Gallery
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अमिताभ बच्चन ने की मदद

करियर के शुरुआती दिनों में विक्रम गोखले आर्थिक तंगी से गुजर रहे थे. मुंबई में रहने के लिए उन्हें घर की जरूरत थी. जब अमिताभ बच्चन को उनकी परेशानी का पता चला, तो उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी को पत्र लिखकर मदद की सिफारिश की. इसके बाद विक्रम को सरकारी आवास मिला. अभिनेता ने बताया था कि उन्होंने अमिताभ का वह पत्र फ्रेम करवाकर अपने पास संभालकर रखा था.

Land donated for artists in need - Photo Gallery
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जरूरतमंद कलाकारों के लिए दान की जमीन

विक्रम गोखले सिर्फ बेहतरीन अभिनेता ही नहीं, बल्कि मददगार इंसान भी थे. कोरोना महामारी के दौरान फिल्म और थिएटर जगत के कई कलाकार आर्थिक संकट से गुजर रहे थे. ऐसे समय में उन्होंने जरूरतमंद और अकेले रहने वाले कलाकारों की सहायता के लिए करीब दो करोड़ रुपये मूल्य की जमीन दान कर दी. उनका यह कदम दिखाता है कि वह अपनी सफलता को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखना चाहते थे.

A connection with films spanning three generations - Photo Gallery
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तीन पीढ़ियों से जुड़ा फिल्मों का रिश्ता

विक्रम गोखले के परिवार में अभिनय की परंपरा काफी पुरानी थी. उनके पिता चंद्रकांत गोखले मराठी फिल्मों और रंगमंच के जाने-माने कलाकार थे. उनकी दादी कमलाबाई गोखले भी शुरुआती महिला अभिनेत्रियों में शामिल थीं. वहीं उनकी परदादी दुर्गाबाई कामत ने 1913 में दादासाहेब फाल्के की फिल्म 'मोहिनी भस्मासुर' में काम किया था.

Winning a National Award didn't lessen the enthusiasm at all - Photo Gallery
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राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद भी कम नहीं हुआ जुनून

विक्रम गोखले ने 1971 में फिल्म 'परवाना' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था. मराठी फिल्म 'अनुमति' में उनके अभिनय को खूब सराहना मिली और 2013 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला. खास बात यह है कि घुटने की सर्जरी से उबरने के दौरान भी उन्होंने फिल्म 'नीलकंठ मास्टर' का एक मुश्किल एक्शन सीन शूट किया. उनके लिए अभिनय सिर्फ पेशा नहीं बल्कि जुनून था.

They considered theatre to be the true strength - Photo Gallery
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थिएटर को मानते थे असली ताकत

फिल्मों में पहचान मिलने के बावजूद विक्रम गोखले का मराठी थिएटर से गहरा जुड़ाव रहा. वह रंगमंच को अपने अभिनय की बुनियाद मानते थे. साल 2010 में उन्होंने मराठी फिल्म 'आघात' से निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा. हालांकि गले की परेशानी के कारण फरवरी 2016 में उन्होंने मंच पर अभिनय करना छोड़ दिया लेकिन फिल्मों में काम जारी रखा. वह हमेशा थिएटर को अपनी सबसे बड़ी अभिनय पाठशाला मानते रहे.

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