श्रीलंका में 1-0 से सीरीज़ जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम घर लौट रही है. हालांकि, ट्रॉफी जीतने के बावजूद भारतीय खेमे में थोड़ी निराशा हो सकती है, क्योंकि वे कोलंबो में खेले गए दूसरे और आखिरी टेस्ट मैच में ‘क्लीन स्वीप’ करने से चूक गए, जबकि उन्होंने श्रीलंका को ‘फॉलो-ऑन’ भी दिया था. गुरुवार को यह मैच ड्रॉ पर खत्म हुआ.
कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब (SSC) में भारतीय टीम की जीत की पूरी पटकथा लिखी जा चुकी थी. 503 रनों का विशाल स्कोर और श्रीलंका को मिला फॉलोऑन, सब कुछ टीम इंडिया के पक्ष में था. लेकिन पांचवें दिन श्रीलंकाई बल्लेबाज सोनल दिनुषा चट्टान बनकर खड़े हो गए. हेड कोच गौतम गंभीर का हर दांव, हर मास्टरप्लान और कप्तान शुभमन गिल की रणनीति दिनुषा के जुझारूपन के आगे पस्त नजर आई. पहली पारी में पहाड़ जैसा स्कोर बनाने के बावजूद भारतीय टीम मैच जीतने में नाकाम रही.
इस बीच आइए जानते हैं 503 रन बनाने के बाद भी जीत न मिलने की 5 बड़ी वजहें…
पेस अटैक की नाकामी
पहली पारी में 290 रन पर आउट करने के बाद दूसरी पारी में भारतीय तेज गेंदबाज बिल्कुल बेअसर नजर आए. पांचवें दिन जब 4 विकेट की जरूरत थी, तब पेसर श्रीलंका के निचले क्रम के बल्लेबाजों को आउट करने या दबाव बनाने में पूरी तरह नाकाम रहे.
स्पिनर्स का फ्लॉप शो
सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब की पांचवें दिन की पिच पर जहां गेंद घूम रही थी, वहां मानव सुथार, सारांश जैन और रवींद्र जडेजा विकेट निकालने के लिए संघर्ष करते दिखे. गेंदें जरूर टर्न हुईं, लेकिन वे बल्ले का किनारा लेने या बल्लेबाजों को चकमा देने में नाकाम रहे.
लोअर-ऑर्डर को आउट न कर पाने की पुरानी कमजोरी
भारतीय टीम की टेल-एंडर्स (निचले क्रम के बल्लेबाजों) को जल्दी समेटने की कमजोरी एक बार फिर उजागर हुई. पहली पारी में भी श्रीलंका के आखिरी 3 विकेटों ने 45 ओवर खेलकर 117 रन जोड़े थे, और दूसरी पारी में दिनुषा और नुवांता ने 7वें विकेट के लिए 112 रनों की अटूट साझेदारी कर भारत की जीत छीन ली.
सोनल दिनुषा को न रोक पाना
श्रीलंकाई बल्लेबाज सोनल दिनुषा पूरी सीरीज में भारतीय टीम के लिए सिरदर्द बने रहे. मांसपेशियों में खिंचाव (क्रैंप्स) के बावजूद दिनुषा ने दुसरी पारी में 264 गेंदों पर 133* रनों की मैराथन पारी खेली और भारतीय गेंदबाजों के हर प्लान को पूरी तरह से पस्त कर दिया.
कप्तान और कोचिंग स्टाफ की रणनीति
मैच के आखिरी दिन जब विकेट की सख्त जरूरत थी, तब कप्तान शुभमन गिल और हेड कोच गौतम गंभीर की ऑन-फील्ड रणनीतियां असरदार साबित नहीं हुईं. शॉर्ट-बॉल और लेग-साइड की योजनाएं बेअसर रहीं और कोई ऐसा सरप्राइज मूव नहीं दिखा जो मैच का रुख भारत के हक में मोड़ सके.
मैच की बात करें तो, भारत ने अपनी पहली पारी में शानदार बल्लेबाज़ी की और 9 विकेट पर 503 रन बनाकर पारी घोषित कर दी. जवाब में, श्रीलंकाई टीम भारतीय गेंदबाज़ी के सामने संघर्ष करती दिखी और सिर्फ़ 290 रनों पर ऑल-आउट हो गई. भारत ने श्रीलंका को ‘फॉलो-ऑन’ दिया, जिससे उन पर पारी की हार का खतरा मंडराने लगा. हालांकि, श्रीलंका ने दूसरी पारी में ज़बरदस्त जज़्बा दिखाया और 9 विकेट पर 429 रन बनाकर पारी घोषित की. दिनुशा इस शानदार वापसी के मुख्य सूत्रधार थे; पहली पारी में 162 गेंदों पर 103 रन बनाने के बाद, उन्होंने दूसरी पारी में 264 गेंदों पर 133 रनों की मैराथन नाबाद पारी खेली, जिससे मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ.