भारत की अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य मंजोत कालड़ा को श्रीलंका में चल रहे कथित मैच फिक्सिंग मामले में फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. कोलंबो की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है. मंजोत कालड़ा लंका प्रीमियर लीग (एलपीएल) की टीम जाफना किंग्स के सह-मालिक हैं. उन्हें इसी महीने इस मामले में गिरफ्तार किया गया था. उनके साथ आरोपी युवराज पुष्पा भी न्यायिक हिरासत में हैं.
दोनों आरोपियों को 17 जुलाई को अदालत ने 31 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजा था. इसके बाद उनके वकील के. डब्ल्यू. एस. फर्नांडो ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जल्द जमानत देने की मांग की. हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध करते हुए कहा कि खेल से जुड़े अपराधों की रोकथाम के लिए श्रीलंका पुलिस की विशेष जांच इकाई अभी मामले की जांच कर रही है. इसके बाद मुख्य मजिस्ट्रेट असांगा एस. बोडारगामा ने जमानत याचिका खारिज कर दी.
श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने दर्ज कराई शिकायत
यह मामला तब सामने आया जब श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर भानुका राजपक्षे, अविष्का फर्नांडो और दुनिथ वेलालागे ने कथित भ्रष्टाचार और मैच फिक्सिंग को लेकर शिकायत दर्ज कराई. अदालत को यह भी बताया गया कि अब दो और घरेलू क्रिकेटरों ने भी इस शिकायत का समर्थन किया है. इस बीच, पांच टीमों वाली लंका प्रीमियर लीग का आयोजन 17 जुलाई से शुरू होकर 8 अगस्त तक चल रहा है.
जाफना किंग्स की मालिकाना हिस्सेदारी भी खत्म
मंजोत कालड़ा की गिरफ्तारी के बाद इनोवेटिव प्रोडक्शन ग्रुप (आईपीजी) और श्रीलंका क्रिकेट ने स्पोर्ट्स कम्यून के साथ अपना समझौता समाप्त कर दिया, जिससे जाफना किंग्स की मालिकाना हिस्सेदारी खत्म हो गई. टीम की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के कारण खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के भुगतान में भी देरी हुई थी. यहां तक कि कुछ खिलाड़ियों को मैच के दौरान अपनी जर्सी पर लगे प्रायोजकों के लोगो को काली पट्टी से ढकना पड़ा. इसके बाद आईपीजी और श्रीलंका क्रिकेट ने टीम का संचालन अपने हाथ में लेते हुए लगभग 90 प्रतिशत बकाया वेतन जारी कर दिया है और बाकी भुगतान भी तय समयसीमा के भीतर करने का आश्वासन दिया है.