AI Smart Health System: बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की तैयारी चल रही है. हेल्थ सिस्टम को एआई और डिजिटल तकनीक से जोड़ने की तैयारी चल रही है. इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने जानकारी दी है कि दिल्ली सरकार ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जिससे मरीजों को काफी फायदा होने वाला है. इसकी मदद से वे सरकारी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज तक किस जगह पर कितने बेड खाली हैं, इसके बारे में पता लगा सकेंगे.
क्या है सरकार का मकसद?
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि ऐसा एआई आधारित सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जिसके जरिए राज्य के अलग-अलग अस्पतालों में उपलब्ध बेड और डॉक्टरों की जानकारी आसानी से मिल सकेगी. इस सॉफ्टवेयर को बनाने के पीछे सरकार का मकसद है कि मरीजों को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके और इलाज में होने वाली देरी से बचा जा सके.
मरीजों को नहीं काटने होंगे चक्कर?
इसके जरिए ICU, सामान्य वार्ड और बेड की उपलब्धता के बारे में जान सकेंगे. अगर किसी मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में रेफर किया जा रहा है, तो डॉक्टर चेक कर सकेंगे कि उस अस्पताल में बेड उपलब्ध हैं या नहीं. ऐसे में अगर वहां बेड खाली नहीं होंगे, तो दूसरे अस्पताल भेजा जा सकता है. इससे मरीजों को अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. निशांत कुमार ने बताया कि इस एआई आधारित ऐप की मदद से गंभीर मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित की जा सकती है. खासतौर पर ICU बेड की जरूरत वाले मरीजों के मामले में समय की बचत की जा सकेगी. इसके जरिए इलाज के लिए सही जगह चुनने में डॉक्टरों को मदद मिल सकेगी.
ये व्यवस्था भी होंगी शुरू
इसके अलावा संस्थानों में एक फोन और लैंडलाइन आधारित व्यवस्था भी शुरू होगी. इससे स्वास्थ्य संस्थानों के बीच संपर्क और जानकारी शेयर करने में मदद मिलेगी. स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, बिहार में लगभग 14 हजार स्वास्थ्य संस्थान हैं, जिनमें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर से लेकर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल तक हैं.