Delhi PG Hostel Collapse Tragedy | Satya Niketan Hadsa | Satya Niketan Hostel Rent Agreement: दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि कई परिवारों के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया है. घटना की खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई और हर किसी के मन में एक ही सवाल है, आखिर 7 मौतों का जिम्मेदार कौन? एक पल में हुई इस घटना ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं और अपनों को कभी न भरने वाला दर्द दे दिया. हर तरफ लोग पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जता रहे हैं. इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार लोग कब जागेंगे?
हादसे की जिम्मेदारी छात्रों की
वहीं अब सत्य निकेतन के हास्टल का रेंट एग्रीमेंट सामने आ चुका है. इस एग्रीमेंट को देख परिवारवालों और लोगों का गुस्सा सातवें आशमान पर पहुंच चुका है. क्योंकि रेंट एग्रीमेंट में एक ऐसी बात सामने आई है, जिससे वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ सकें. ऐसा आज के समय में लगभग हर PG और हॉस्टल के मालिक करने लगे हैं. वहीं सत्य निकेतन का मामला भी कुछ ऐसा ही है. हॉस्टल डेज में रहने वाले सभी छात्रों से भी इसी तरह का एग्रीमेंट साइन कराया गया था.
7 मौत का जिम्मेदार कौन?
आज के समय में पीजी या हॉस्टल में रहने के लिए तीन महीने की सिक्योरिटी, एक महीने का पूरा एडवांस देना होता है. लेकिन इतना सब देने के बाद भी हादसे की जिम्मेदारी केवल छात्रों की…क्योंकि हॉस्टल तो एक एग्रीमेंट के बल पर अपनी जिम्मेदारी से जान छुड़ा रहा है. हॉस्टल डेट में भी इसी तरह के एग्रीमेंट पर छात्रों से साइन कराए गए थे. हालांकि, उस दौरान छात्रों ने सोचा भी नहीं होगा कि ये कागज उनका मौत का एग्रीमेंट बन जाएगा. वहीं इस दिल तोड़ देने वाले हादसे के बाद हॉस्टल का रेंट एग्रीमेंट सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है. जिस किसी की नजर इस एग्रीमेंट पर जा रही है, वह गुस्से से तमतमा रहा है.
मौत के रेंट एग्रीमेंट पर साइन
इस रेंट एग्रीमेंट में एक शर्त ऐसी थी जिसमें लिखा था कि ‘अगर छात्रों के साथ कोई हादसा या जोखिम होता है, तो PG की कोई जिम्मेदारी नहीं है’. हजारों रुपये देने के बावजूद हादसे के जिम्मेदारी केवल छात्रों की है. हालांकि, लोगों के मन में सवाल उठ रहा है, कि छात्रों ने एग्रीमेंट साइन कैसे किया? इसके पीछे शायद ये वजह हो सकती है कि छात्रों ने ठीक से इसे पढ़ा न हो. कई बार इतने बड़े एग्रीमेंट पर लोग ध्यान नहीं देते हैं. बच्चों को क्या पता था कि जिस पर वह साइन कर रहे हैं, वह उनकी मौत का एग्रीमेंट है और जिसके कारण शायद उन्हें इंसाफ भी न मिल पाए.
3 महीने की सिक्योरिटी और 1 महीने का एडवांस
एग्रीमेंट के मुताबिक, हॉस्टल डेज के रेंट एग्रीमेंट पर लिखा है कि ‘PG में रहने के लिए उन्हें 3 महीने की सिक्योरिटी और 1 महीने का एडवांस किराया पहले ही देना होगा. साथ ही डिपॉजिट वापस नहीं किया जाएगा. इसके अलावा छात्रों को ये भी चेतावनी दी गई है कि अगर हॉस्टल के किसी भी समान को कई नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई करनी होगा’.
हॉस्टल किसी चीज के लिए जिम्मेदार नहीं
हॉस्टल के एग्रीमेंट में एक नियम ये भी लिखा है कि ‘अगर हॉस्टल के नियंत्रण से बाहर किसी भी किरायदार को चोट लगती है…जैसे आग, भूकंप, भारी बारिश या अन्य प्राकृतिक आपदाएं. तो हॉस्टल किसी तरह का मुआवजा देने का जिम्मेदार नहीं होगा.’ इसके अलावा अपने हिसाब से किरायदार का कमरा या हॉस्टल की लोकेशन बदल सकते हैं. वहीं अगर अनुशासन से जुड़ी किसी तरह की समस्या आती है, तो उसे हॉस्टल से निकाल सकेत हैं. लेकिन रिफंड नहीं दिया जाएगा.
7 मासूमों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन?
यानी हॉस्टल किसी चीज का जिम्मेदार नहीं है, लेकिन पैसे लेने के लिए सबसे आगे है. हॉस्टल का काम केवल दूसरे राज्य से आए लोगों से पैसे लूटना है. जो छात्र दूसरे राज्य से पढ़ने या जॉब करने आते हैं. हॉस्टल उनकी मौत का भी जिम्मेदार नहीं होगा, लेकिन एक पैसा वापस नहीं किया जाएगा. किसी का बेटा, भाई, पति और जिंदगी भर का सहारा उस जर्जर बिल्डिंग में दब कर दम तोड़ चुके है. कोई अपने आखिरी समय को अपनी आंखों के सामने खत्म होते देख रहा है और कुछ लोग बस एक मदद का इंतजार कर रहे हैं. माता-पिता अपने भविष्य और कलेजे के टुकड़ों को अपने सामने मरते देख रहे हैं. लेकिन सरकार, MCD और हॉस्टल मालिक किसी चीज के जिम्मेदार नहीं है. सवाल वहीं का वहीं इन सात मौतें का जिम्मेदार आखिर कौन?