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Faridabad Borewell Tragedy: 250 फीट गहरे गड्ढे में गिरा 3 साल की मासूम, 10 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन हुआ फेल, बच्ची  की हुई मौत

Haryana News: फरीदाबाद के सेक्टर 8 में 250 से 300 फुट गहरे बोरवेल में गिरने से तीन वर्षीय नेहा की मौत हो गई. 10 घंटे के बचाव अभियान के बावजूद बच्ची को बचाया नहीं जा सका.

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Last Updated: September 28, 2026 13:59:53 IST

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रविवार शाम फरीदाबाद के सेक्टर 8 में एक गड्ढा मासूम के लिए काल बन गया. तीन वर्षीय नेहा खेलते समय लगभग 250 से 300 फीट गहरे बोरवेल में जा गिरी. 

नेहा को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन दस घंटे से अधिक चले बचाव अभियान के बाद मौत हो गई. इस घटना से पूरा इलाका शोक और आक्रोश में डूबा हुआ है.

खेलते समय हुआ हादसा 

नेहा बोरवेल के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी, तभी गलती से वह उसमें गिर गई. बच्चों ने शोर मचाया और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, जिन्होंने नेहा के पिता रामदीन को सूचना दी. रामदीन दिहाड़ी मजदूर हैं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले हैं. वे कई वर्षों से अपने परिवार के साथ सिही गांव में रह रहे हैं.

बचाव दल ने की बचाने की कोशिश 

हरियाणा पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें बचाव कार्य में जुट गईं. एनडीआरएफ के एक अधिकारी के अनुसार, टीम को रात करीब 8 बजे सूचना मिली और वे गाजियाबाद से रात करीब 9 बजे घटनास्थल पर पहुंच गए. सुबह तड़के बचाव दल को शाफ्ट के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी, लेकिन धीरे-धीरे आवाज बंद हो गई.

इस अभियान में कई गंभीर बाधाएं आईं. टीमों द्वारा लाए गए उपकरण संकरे बोरवेल में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सके, इसलिए एक स्थानीय कार पेंटर की मदद से मौके पर ही एक विशेष उपकरण तैयार किया गया. अधिकारी ने बताया कि बोरवेल वर्षों से इस्तेमाल नहीं हुआ था और लगभग 125 फीट की गहराई पर गंदा पानी भरा हुआ था, जिससे काम और भी मुश्किल हो गया.

10 घंटे बाद बाहर निकाला गया शव 

बचाव दल को बच्ची 200 फीट से अधिक गहराई में फंसी हुई मिली, उसका सिर नीचे की ओर था. घंटों की कठिन मशक्कत के बाद सोमवार तड़के करीब 4 बजे उसे पैरों से खींचकर बाहर निकाला गया. उसमें कोई हरकत नहीं दिख रही थी और उसे तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा ताकि मौत का सही कारण पता चल सके.

लापरवाही पर सवाल

नगर निगम के एक्सईएन संजीव कुमार ने बताया कि बोरवेल को लगभग पंद्रह साल पहले ढक्कन से सील कर दिया गया था और नगर निगम को इस बात की कोई जानकारी नहीं मिली थी कि ढक्कन हटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी और लापरवाही के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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रविवार शाम फरीदाबाद के सेक्टर 8 में एक गड्ढा मासूम के लिए काल बन गया. तीन वर्षीय नेहा खेलते समय लगभग 250 से 300 फीट गहरे बोरवेल में जा गिरी. 

नेहा को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन दस घंटे से अधिक चले बचाव अभियान के बाद मौत हो गई. इस घटना से पूरा इलाका शोक और आक्रोश में डूबा हुआ है.

खेलते समय हुआ हादसा 

नेहा बोरवेल के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी, तभी गलती से वह उसमें गिर गई. बच्चों ने शोर मचाया और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, जिन्होंने नेहा के पिता रामदीन को सूचना दी. रामदीन दिहाड़ी मजदूर हैं और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के रहने वाले हैं. वे कई वर्षों से अपने परिवार के साथ सिही गांव में रह रहे हैं.

बचाव दल ने की बचाने की कोशिश 

हरियाणा पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें बचाव कार्य में जुट गईं. एनडीआरएफ के एक अधिकारी के अनुसार, टीम को रात करीब 8 बजे सूचना मिली और वे गाजियाबाद से रात करीब 9 बजे घटनास्थल पर पहुंच गए. सुबह तड़के बचाव दल को शाफ्ट के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दे रही थी, लेकिन धीरे-धीरे आवाज बंद हो गई.

इस अभियान में कई गंभीर बाधाएं आईं. टीमों द्वारा लाए गए उपकरण संकरे बोरवेल में प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सके, इसलिए एक स्थानीय कार पेंटर की मदद से मौके पर ही एक विशेष उपकरण तैयार किया गया. अधिकारी ने बताया कि बोरवेल वर्षों से इस्तेमाल नहीं हुआ था और लगभग 125 फीट की गहराई पर गंदा पानी भरा हुआ था, जिससे काम और भी मुश्किल हो गया.

10 घंटे बाद बाहर निकाला गया शव 

बचाव दल को बच्ची 200 फीट से अधिक गहराई में फंसी हुई मिली, उसका सिर नीचे की ओर था. घंटों की कठिन मशक्कत के बाद सोमवार तड़के करीब 4 बजे उसे पैरों से खींचकर बाहर निकाला गया. उसमें कोई हरकत नहीं दिख रही थी और उसे तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा ताकि मौत का सही कारण पता चल सके.

लापरवाही पर सवाल

नगर निगम के एक्सईएन संजीव कुमार ने बताया कि बोरवेल को लगभग पंद्रह साल पहले ढक्कन से सील कर दिया गया था और नगर निगम को इस बात की कोई जानकारी नहीं मिली थी कि ढक्कन हटा दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी और लापरवाही के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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