Delhi Building Collapse Stories: इस समय दिल्ली में पीजी हादसे की खबर हर किसी की जुबां पर हैं. दरअसल कल 6 सितंबर को सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर 1:30 बजे के करीब 5 मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) के ढह जाने की वजह से कई छात्र दब गए. इस त्रासदी में अब तक कुल 6 लोगों की मौत हो गई हैं, वहीं 11 लोग बूरी तरह घायल हैं जिनका इलाज जारी है. वहीं सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पीजी में एक्स्ट्रा फ्लोर के लिए कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. लोगों ने बताया कि पीजी में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर चल रहा रिपेयर का काम बिना परमिशन के किया जा रहा था.
यह बिल्डिंग सत्य निकेतन के रिसेटलमेंट कॉलोनी में था. इस कॉलोनी में 299 घर हैं. यहां रहने वाले लोगों का कहना है कि कि लगभग 15 सालों में यह चौथी ऐसी घटना है. पिछली बड़ी घटना 2022 में हुई थी जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी.
यह बिल्डिंग जो 1990 के दशक के आखिर में बनी थी और 55 स्क्वेयर यार्ड में फैली हुई थी. धीरे-धीरे इस बिल्डिंग को पेइंग गेस्ट (PG) रहने की जगह में बदल दी गई थी. सूत्रों ने बताया कि पुलिस अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि PG फैसिलिटी का ऑपरेशन नियमों के हिसाब से हो रहा था या नहीं. हालांकि लोकल लोगों का कहना है कि बिल्डिंग गिरने से पहले उसमें दरारें दिख रही थीं, लेकिन दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (MCD) ने कहा है कि उसके खिलाफ कभी कोई ऑफिशियल शिकायत दर्ज नहीं की गई. MCD ने P-14 नाम से बिल्डिंग को मार्क किया था, जिसमें एक बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के ऊपर चार फ्लोर थे.
दो साल पहले जोड़ा गया था फ्लोर
लोकल लोगों के मुताबिक करीब दो साल पहले बिल्डिंग में दो और फ्लोर बनाए गए थे. पुलिस जांच से यह पता चलने की उम्मीद है कि ये फ्लोर कब और कैसे बनाए गए और क्या जरूरी परमिशन ली गई थी. एक लोकल ने बताया कि पूरा इलाका एक रिसेटलमेंट कॉलोनी है जो कभी JJ कॉलोनी जोन था और ग्रीन बेल्ट के अंदर था. बाद में इसका नाम सत्य निकेतन रखा गया. उन्होंने कहा कि “जैसे ही यह साउथ कैंपस का हब बना जिसके पास दिल्ली यूनिवर्सिटी के पांच कॉलेज थे, कई रहने वालों ने [अपनी प्रॉपर्टी] को मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग में बदल दिया ताकि उन्हें स्टूडेंट्स को किराए पर दे सकें.”
कितना था किराया?
बताया जा रहा है कि बिल्डिंग के हर फ्लोर पर चार कमरे थे. कमरे बेड-बाई-बेड के हिसाब से किराए पर दिए जा रहे थे, और हर फ्लोर का किराया अलग-अलग था. लोगों ने बताया कि ग्राउंड फ्लोर पर एक कमरा Rs 18,000 प्रति बेड किराए पर दिया जा रहा था, जबकि तीसरी मंजिल का किराया लगभग Rs 16,000 था. चौथी मंजिल का किराया लगभग Rs 14,000 प्रति बेड था. खबर है कि दूसरी मंजिल के कमरे किराए पर नहीं दिए गए थे. रहने वालों ने यह भी कहा कि इमरजेंसी में बाहर निकलने के लिए बिल्डिंग से कोई दूसरा एग्जिट नहीं था.
जांच के दायरे में लीज
खबर है कि प्रॉपर्टी को ‘हॉस्टल डेज’ नाम की एक कंपनी को लीज पर देने के बाद पीजी के तौर पर चलाया जा रहा था. सूत्रों ने बताया कि बिल्डिंग गुड़गांव के तीन भाइयों हरि राम बंसल, आनंद बंसल और आज़ाद बंसल की थी. इसे पिछले साल हॉस्टल डेज को लीज पर दिया गया था और इसे रहने की जगह के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था.
सूत्रों ने कहा कि लीज अरेंजमेंट की असलियत, PG रहने की जगह चलाने की परमिशन और क्या बिल्डिंग ज़रूरी सेफ्टी नॉर्म्स को पूरा करती थी, इन सब बातों की जांच में शामिल होने की संभावना है.
दरारें और सीलन के बावजूद मरम्मत
स्थानीय लोगों ने बताया कि इमारत गिरने से करीब एक हफ़्ते पहले से मरम्मत का काम चल रहा था. बताया जा रहा है कि इमारत सीलन, दरारों और पानी जमा होने की वजह से गिरी. एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “इससे एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ है अगर कोई बनावट या पानी से जुड़ी समस्याएँ दिख रही थीं, तो क्या मरम्मत का काम शुरू होने से पहले बनावट का असेसमेंट किया गया था?”
पुलिस अधिकारी ने कहा कि जाँच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि क्या मरम्मत के काम का ही इमारत गिरने पर कोई असर पड़ा था और क्या काम के दौरान कोई वज़न उठाने वाली चीज़ें बदली गई थीं.
इस घटना ने सत्य निकेतन में पुरानी इमारतों और PG रहने की जगहों की सुरक्षा पर भी फिर से ध्यान खींचा है, यह एक ऐसा इलाका है जहाँ बड़ी संख्या में छात्र किराए के घरों में रहते हैं, और क्या इनकी बनावट और आग से सुरक्षा के खतरों के लिए सिस्टमैटिक तरीके से जाँच की जा रही है.