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कौन हैं डॉक्टर निखिल टंडन, जो बने AIIMS दिल्ली के डायरेक्टर? क्या है खासियत?

हाल ही में प्रोफेसर और डॉक्टर निखिल टंडन को AIIMS दिल्ली के डायरेक्टर के पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है. इस कार्यभार के साथ ही वे पहले से एंडोक्रिनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रमुख और डीन एकेडमिक्स के तौर पर काम कर रहे हैं.

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Published: April 27, 2026 15:03:29 IST
Last Updated: April 27, 2026 15:03:29 IST

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Who is New AIIMS Director Dr. Nikhil Tondon: हाल ही में प्रोफेसर और डॉक्टर निखिल टंडन को AIIMS दिल्ली के डायरेक्टर के पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वे अभी तक एंडोक्रिनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रमुख और डीन एकेडमिक्स के तौर पर काम कर रहे हैं. यह प्रभार तब तक रहेगा जब तक इस पद के लिए कोई नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती है. जानकारी के अनुसार, प्रो. निखिल टंडन, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में एंडोक्रिनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग में प्रोफेसर और अध्यक्ष हैं. उन्होंने कार्डियो-मेटाबॉलिक बीमारियों में विशेषज्ञता रखने वाले एक चिकित्सक-शोधकर्ता के तौर पर काम किया है. अब उन्हें AIIMS, दिल्ली में डायरेक्टर के पद का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है.

प्रोफेसर निखिल टंडन ने इन विषयों पर किया काम

प्रो. टंडन बच्चों और वयस्कों में बड़े पैमाने पर किए गए महामारी विज्ञान (epidemiology) अध्ययनों में शामिल रहे हैं. इन अध्ययनों में डायबिटीज, मोटापा और फैटी लिवर जैसी बीमारियों के साथ ही कार्डियो-मेटाबॉलिक जोखिम कारकों की व्यापकता पर भी शोध किया है. वे CARRS कोहोर्ट के संस्थापक शोधकर्ताओं में से एक हैं. यह एक जनसंख्या-आधारित कोहोर्ट है, जो भारत के दो महानगरों (दिल्ली, चेन्नई) में 16,000 से अधिक वयस्कों में कार्डियो-मेटाबॉलिक जोखिम कारकों और बीमारियों का मूल्यांकन करता है, और इसका फॉलो-अप लगभग 15 वर्षों तक चला है.

क्या है प्रोफेसर निखिल का काम?

उनकी टीम ने इलाज को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया है. वे गुणवत्ता सुधार रणनीतियों में भी शामिल रहे हैं. इन रणनीतियों में केयर कॉर्डिनेटर, निर्णय सहायता सॉफ्टवेयर, क्लिनिक के कामकाज में बदलाव, अवसर-आधारित जांच और कार्यों का बंटवारा जैसे कई काम किए हैं. इनका उद्देश्य मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों तक बेहतर देखभाल पहुंचाना है. इस काम के परिणामस्वरूप, मधुमेह के एम्बुलेटरी प्रबंधन (अस्पताल से बाहर की देखभाल) के लिए उनके देखभाल मॉडल (कार्यों का बंटवारा और तकनीक) को भारत सरकार के NCD (गैर-संक्रामक रोग) के राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किया गया है.

मिले ये पुरस्कार

साथ ही प्रोफेसर टंडन, उन महिलाओं में डायबिटीज की रोकथाम के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं, जिनमें गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की समस्या रही हो. उन्होंने इस आबादी पर दुनिया का सबसे बड़ा अध्ययन भी लागू किया है. प्रोफेसर टंडन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के कई विशेषज्ञ समूहों में भी काम किया है. उन्होंने डायबिटीज से जुड़े तकनीकी सलाहकार समूहों की अध्यक्षता भी की है. उन्होंने कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से फेलोशिप ली है. इतना ही नहीं, उन्हें डॉ. बी.सी. रॉय पुरस्कार और भारत सरकार का पद्म श्री पुरस्कार से भी नवाजा गया है.

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Published: April 27, 2026 15:03:29 IST
Last Updated: April 27, 2026 15:03:29 IST

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Who is New AIIMS Director Dr. Nikhil Tondon: हाल ही में प्रोफेसर और डॉक्टर निखिल टंडन को AIIMS दिल्ली के डायरेक्टर के पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. वे अभी तक एंडोक्रिनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रमुख और डीन एकेडमिक्स के तौर पर काम कर रहे हैं. यह प्रभार तब तक रहेगा जब तक इस पद के लिए कोई नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती है. जानकारी के अनुसार, प्रो. निखिल टंडन, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में एंडोक्रिनोलॉजी और मेटाबॉलिज्म विभाग में प्रोफेसर और अध्यक्ष हैं. उन्होंने कार्डियो-मेटाबॉलिक बीमारियों में विशेषज्ञता रखने वाले एक चिकित्सक-शोधकर्ता के तौर पर काम किया है. अब उन्हें AIIMS, दिल्ली में डायरेक्टर के पद का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया है.

प्रोफेसर निखिल टंडन ने इन विषयों पर किया काम

प्रो. टंडन बच्चों और वयस्कों में बड़े पैमाने पर किए गए महामारी विज्ञान (epidemiology) अध्ययनों में शामिल रहे हैं. इन अध्ययनों में डायबिटीज, मोटापा और फैटी लिवर जैसी बीमारियों के साथ ही कार्डियो-मेटाबॉलिक जोखिम कारकों की व्यापकता पर भी शोध किया है. वे CARRS कोहोर्ट के संस्थापक शोधकर्ताओं में से एक हैं. यह एक जनसंख्या-आधारित कोहोर्ट है, जो भारत के दो महानगरों (दिल्ली, चेन्नई) में 16,000 से अधिक वयस्कों में कार्डियो-मेटाबॉलिक जोखिम कारकों और बीमारियों का मूल्यांकन करता है, और इसका फॉलो-अप लगभग 15 वर्षों तक चला है.

क्या है प्रोफेसर निखिल का काम?

उनकी टीम ने इलाज को बेहतर बनाने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल किया है. वे गुणवत्ता सुधार रणनीतियों में भी शामिल रहे हैं. इन रणनीतियों में केयर कॉर्डिनेटर, निर्णय सहायता सॉफ्टवेयर, क्लिनिक के कामकाज में बदलाव, अवसर-आधारित जांच और कार्यों का बंटवारा जैसे कई काम किए हैं. इनका उद्देश्य मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों तक बेहतर देखभाल पहुंचाना है. इस काम के परिणामस्वरूप, मधुमेह के एम्बुलेटरी प्रबंधन (अस्पताल से बाहर की देखभाल) के लिए उनके देखभाल मॉडल (कार्यों का बंटवारा और तकनीक) को भारत सरकार के NCD (गैर-संक्रामक रोग) के राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल किया गया है.

मिले ये पुरस्कार

साथ ही प्रोफेसर टंडन, उन महिलाओं में डायबिटीज की रोकथाम के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं, जिनमें गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की समस्या रही हो. उन्होंने इस आबादी पर दुनिया का सबसे बड़ा अध्ययन भी लागू किया है. प्रोफेसर टंडन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के कई विशेषज्ञ समूहों में भी काम किया है. उन्होंने डायबिटीज से जुड़े तकनीकी सलाहकार समूहों की अध्यक्षता भी की है. उन्होंने कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों से फेलोशिप ली है. इतना ही नहीं, उन्हें डॉ. बी.सी. रॉय पुरस्कार और भारत सरकार का पद्म श्री पुरस्कार से भी नवाजा गया है.

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