Himachal Pradesh Weather Update 1 May 2026: पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के चलते समूचे उत्तर भारत के मौसम का मिजाज बदला हुआ है. दिल्ली से लेकर कोलकाता तक बारिश का असर देखने को मिल रहा है. इस बीच पश्चिमी विक्षोभ के चलते पर्वतीय इलाकों में शामिल केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के अलावा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी मौसम का मिजाज बदल गया है. पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार (01 मई, 2026) को भी बारिश और ओले गिरने के साथ तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department) के अनुसार, शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के अलावा चंबा, मंडी, लाहौल स्पीति, सिरमौर, सोलन, कांगड़ा और ऊना में बारिश तूफानी बारिश का अलर्ट जारी किया है. ऐसे में लोगों से सतर्कता बरतने की भी अपील की गई है. इसी तरह उत्तर प्रदेश से सटे पहाड़ी राज्य उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और पिथौरागढ़ के अलावा बागेश्वर, नैनीताल, चमोली, चंपावत, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल में आंधी के साथ भारी बारिश की चेतावनी IMD की ओर से जारी की गई है.
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला (Meteorological Centre, Shimla) की ओर से जारी किए गए ताजा पूर्वानुमान में जानकारी दी गई है कि 3 और 4 मई को लाहौल स्पीति और किन्नौर को छोड़ बाकी जिलों में कुछ स्थानों पर 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी चलने का अलर्ट है. इसके अलावा तेज बारिश को लेकर भी चेतावनी जारी की गई है.
शहर न्यूनतम तापमान अधिकतम तापमान
| शिमला | 12.8 | 21.2 |
| सुंदरनगर | 13.7 | 30.5 |
| धर्मशाला | 5.2 | 29.0 |
| कांगड़ा | 16.7 | 31.6 |
| सोलन | 13.0 | 28.0 |
इन 11 राज्यों में आंधी बारिश की चेतावनी
- यूपी
- बिहार
- दिल्ली
- उत्तराखंड
- हरियाणा
- पंजाब
- जम्मू-कश्मीर
- मध्य प्रदेश
- छत्तीसगढ़
- असम
- नगालैंड
- पश्चिम बंगाल
हिमपात से राहत तो बारिश से नुकसान
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश की ऊंची चोटियों में शामिल रोहतांग, शिंकुला, बारालाचा और कुंजुम में पिछले 24 घंटे के दौरान हल्का हिमपात हुआ है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली है. इसके अलावा राजधानी शिमला शहर के अलावा कुफरी, फागू, ठियोग और मशोबरा में भारी ओलावृष्टि ने टेंशन बढ़ा दी है. इसके चलते यानी बारिश और ओलावृष्टि के चलते सेब और अन्य फसलों जिनमें मटर, गोभी को नुकसान हुआ है. मैदानी जिलों में गेहूं की कटाई भी प्रभावित हुई है.