Himachal Pradesh Weather Update 27 April 2026: जहां एक ओर करीब-करीब पूरा भारत भीषण गर्मी, लू, तेज धूप और उमस से जूझ रहा है तो वहीं हिमाचल प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में बर्फबारी के चलते राहत है. ताजा बर्फबारी के चलते हिमाचल प्रदेश के रोहतांग, शिंकुला और बारालाचा में हर रोज गिर रहे फाहों से लोग ठंड के चलते कंपकंपी महसूस कर रहे हैं. मनाली के ऊंचाई वाले इलाकों में पारा माइनस में जा रहा है. वहीं, हिमाचल प्रदेश के निचले जिलों में लू चल रही है और कुछ जगहों पर अधिकतम तापमान 40 डिगी सेल्सियस के पार पहुंच गया है.
वहीं, पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश में एक नया पश्चिमी विक्षोभ एक्टिव हो चुका है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (Indian Meteorological Department) के ताजा अलर्ट के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने के बावजूद सोमवार ( 27 अप्रैल, 2026) की शाम तक पर्वतीय राज्य में मौसम साफ रहेगा जबकि रात के दौरान पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह से सक्रिय हो जाएगा. इसके बाद यानी अगले 24-48 घंटे के दौरान यानी मंगलवार (28 अप्रैल, 2026) को राज्य के कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और शिमला जिले में तेज हवाएं चल सकती है. खराब मौसम के चलते IMD की ओर से चंबा जिले के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. ऐसे में यहां पर तेज बारिश हो सकती है. इसके अलावा ओले गिरने का भी अलर्ट है.
- ऊना 42.2 डिग्री सेल्सियस
- कांगड़ा 36.1 डिग्री सेल्सियस
- सुंदरनगर 36.0 डिग्री सेल्सियस
- बरठीं 35.9 डिग्री सेल्सियस
- मंडी 35.1 डिग्री सेल्सियस
- सोलन 33.4 डिग्री सेल्सियस
- नाहन 33.3 डिग्री सेल्सियस
- धर्मशाला 33.0 डिग्री सेल्सियस
- भुंतर 32.6 डिग्री सेल्सियस
- शिमला 27.4 डिग्री सेल्सियस
- मनाली 25.4 डिग्री सेल्सियस
- ताबो 20.0 डिग्री सेल्सियस
चंबा के लिए क्यों जारी हुआ येलो अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है. इसके चलते अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी और मैदानों में बारिश हो सकती है. यहां तक कि राज्य में सोमवार (27 अप्रैल) को ही मैदान के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना है. इसके बाद 28 अप्रैल से 30 अप्रैल तक राज्य के ज्यादातर जगहों पर मौसम का मिजाज ऐसा ही रहेगा. अगले महीने यानी मई की शुरुआत भी पश्चिम विक्षोभ के प्रभाव के साथ होगी. इसके चलते आगामी 1 और 2 मई को मध्यम और ऊंचाई वाले इलाकों में भी बारिश और बर्फबारी दोनों होगी. इसके असर से गर्मी से निचले इलाकों को भी आराम मिलेगा.