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महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा कदम, डॉ. प्रीति अडानी का स्वाभिमान मिशन MP में शुरू

Adani Foundation Swabhimaan Program: महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अडानी फाउंडेशन ने शनिवार को मध्य प्रदेश में अपने 'स्वाभिमान' कार्यक्रम के तहत एक बड़े पैमाने पर आजीविका पहल शुरू की. यह पहल फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी की सोच से प्रेरित है.

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Last Updated: 2026-04-25 22:52:05

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Priti Adani Swabhimaan Vision: महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अडानी फाउंडेशन ने शनिवार को मध्य प्रदेश में अपने ‘स्वाभिमान’ कार्यक्रम के तहत एक बड़े पैमाने पर आजीविका पहल शुरू की. यह पहल फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी की सोच से प्रेरित है.
 
इस पहल का उद्देश्य शिवपुरी जिले के बदरवास क्षेत्र की लगभग 1,500 महिलाओं को कौशल आधारित रोज़गार के माध्यम से नियमित आय अर्जित करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सक्षम बनाना है.
 

‘अडानी विकास केंद्र’ 48,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ

नवनिर्मित ‘अडानी विकास केंद्र’ 48,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे प्रशिक्षण और उत्पादन, दोनों सुविधाओं से युक्त केंद्र के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जहां 600 आधुनिक सिलाई मशीनें उपलब्ध हैं. इस केंद्र से उन महिलाओं को संगठित रोज़गार के अवसर मिलने की उम्मीद है, जो पारंपरिक रूप से अनियमित या अनौपचारिक कार्यों पर निर्भर रही हैं. यह केंद्र उन्हें एक स्थिर और बाज़ार से जुड़ी आजीविका की ओर बढ़ने में मदद करेगा. यह पहल ‘स्वाभिमान’ कार्यक्रम का ही एक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य पूरे भारत में दस लाख (एक मिलियन) महिलाओं को स्थायी आय के अवसरों से जोड़ना है.
 

केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया

कौशल विकास को बाज़ार तक सीधी पहुंच के साथ जोड़कर, यह कार्यक्रम यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि महिलाएं न केवल कौशल सीखें, बल्कि लगातार कमाई भी करें. इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया, जो संसद में गुना निर्वाचन क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व करते हैं. आस-पास के गांवों से आई 5,000 से अधिक महिलाओं की सभा को संबोधित करते हुए, सिंधिया ने इस पहल की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला. उन्होंने इसे एक ऐसे मंच के रूप में वर्णित किया, जहां स्थानीय कौशल को राष्ट्रीय और यहां तक कि वैश्विक बाज़ारों तक पहुंच मिल सकती है.



 
उन्होंने कहा कि यह केंद्र आकांक्षाओं के साकार होने की शक्ति को दर्शाता है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसमें भाग लेने वाली महिलाओं में दिख रहा आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प आत्मनिर्भरता और आर्थिक भागीदारी की ओर हो रहे बदलाव का संकेत है.
 

फाउंडेशन के CEO ने क्या कहा?

फाउंडेशन के CEO डॉ. अभिषेक लखटकिया के अनुसार, यह पहल इस विश्वास पर आधारित है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता ही सशक्तिकरण का मूल आधार है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘स्वाभिमान’ कार्यक्रम को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह महिलाओं को वास्तविक कार्य अवसरों और आपूर्ति श्रृंखलाओं से सीधे जोड़कर, उनके कौशल को एक स्थायी आय के स्रोत में बदल सके.
 



इस परियोजना से क्षेत्र में व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है. इसके माध्यम से परिवारों की आय में वृद्धि होगी, मौसमी या अनौपचारिक श्रम पर निर्भरता कम होगी और पलायन पर भी रोक लगेगी. इसका उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में महिलाओं की भूमिका को मज़बूत करना भी है, जिससे उन्हें अपने परिवारों और समुदायों के भीतर अधिक अधिकार और पहचान मिल सके.
 
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब अडानी फाउंडेशन 11 अगस्त को अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है. यह अवसर पूरे भारत में समावेशी विकास के क्षेत्र में फाउंडेशन द्वारा किए गए तीन दशकों के कार्यों को रेखांकित करता है.

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Priti Adani Swabhimaan Vision: महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, अडानी फाउंडेशन ने शनिवार को मध्य प्रदेश में अपने ‘स्वाभिमान’ कार्यक्रम के तहत एक बड़े पैमाने पर आजीविका पहल शुरू की. यह पहल फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अडानी की सोच से प्रेरित है.
 
इस पहल का उद्देश्य शिवपुरी जिले के बदरवास क्षेत्र की लगभग 1,500 महिलाओं को कौशल आधारित रोज़गार के माध्यम से नियमित आय अर्जित करने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में सक्षम बनाना है.
 

‘अडानी विकास केंद्र’ 48,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ

नवनिर्मित ‘अडानी विकास केंद्र’ 48,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे प्रशिक्षण और उत्पादन, दोनों सुविधाओं से युक्त केंद्र के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जहां 600 आधुनिक सिलाई मशीनें उपलब्ध हैं. इस केंद्र से उन महिलाओं को संगठित रोज़गार के अवसर मिलने की उम्मीद है, जो पारंपरिक रूप से अनियमित या अनौपचारिक कार्यों पर निर्भर रही हैं. यह केंद्र उन्हें एक स्थिर और बाज़ार से जुड़ी आजीविका की ओर बढ़ने में मदद करेगा. यह पहल ‘स्वाभिमान’ कार्यक्रम का ही एक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य पूरे भारत में दस लाख (एक मिलियन) महिलाओं को स्थायी आय के अवसरों से जोड़ना है.
 

केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया

कौशल विकास को बाज़ार तक सीधी पहुंच के साथ जोड़कर, यह कार्यक्रम यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित है कि महिलाएं न केवल कौशल सीखें, बल्कि लगातार कमाई भी करें. इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया, जो संसद में गुना निर्वाचन क्षेत्र का भी प्रतिनिधित्व करते हैं. आस-पास के गांवों से आई 5,000 से अधिक महिलाओं की सभा को संबोधित करते हुए, सिंधिया ने इस पहल की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला. उन्होंने इसे एक ऐसे मंच के रूप में वर्णित किया, जहां स्थानीय कौशल को राष्ट्रीय और यहां तक कि वैश्विक बाज़ारों तक पहुंच मिल सकती है.



 
उन्होंने कहा कि यह केंद्र आकांक्षाओं के साकार होने की शक्ति को दर्शाता है. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इसमें भाग लेने वाली महिलाओं में दिख रहा आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प आत्मनिर्भरता और आर्थिक भागीदारी की ओर हो रहे बदलाव का संकेत है.
 

फाउंडेशन के CEO ने क्या कहा?

फाउंडेशन के CEO डॉ. अभिषेक लखटकिया के अनुसार, यह पहल इस विश्वास पर आधारित है कि आर्थिक आत्मनिर्भरता ही सशक्तिकरण का मूल आधार है. उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ‘स्वाभिमान’ कार्यक्रम को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह महिलाओं को वास्तविक कार्य अवसरों और आपूर्ति श्रृंखलाओं से सीधे जोड़कर, उनके कौशल को एक स्थायी आय के स्रोत में बदल सके.
 



इस परियोजना से क्षेत्र में व्यापक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है. इसके माध्यम से परिवारों की आय में वृद्धि होगी, मौसमी या अनौपचारिक श्रम पर निर्भरता कम होगी और पलायन पर भी रोक लगेगी. इसका उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में महिलाओं की भूमिका को मज़बूत करना भी है, जिससे उन्हें अपने परिवारों और समुदायों के भीतर अधिक अधिकार और पहचान मिल सके.
 
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब अडानी फाउंडेशन 11 अगस्त को अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है. यह अवसर पूरे भारत में समावेशी विकास के क्षेत्र में फाउंडेशन द्वारा किए गए तीन दशकों के कार्यों को रेखांकित करता है.

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