Maihar Heatwave: मध्य प्रदेश के मैहर जिले में इन दिनों पड़ रही भीषण गर्मी और लू ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है. एक ओर प्रशासन लोगों को घर से बाहर न निकलने और सावधानी बरतने की सलाह दे रहा है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है. पटेहरा स्थित राधिका एचपी गैस एजेंसी के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर रही हैं.
भीषण गर्मी में 42 से 44 डिग्री तापमान के बीच उपभोक्ता खुले आसमान के नीचे घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं. एजेंसी परिसर में न तो छाया की कोई व्यवस्था है और न ही पीने के पानी का इंतजाम. लोग सिर पर गमछा और कपड़ा बांधकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जो हालात की गंभीरता को साफ दर्शाता है.
होम डिलीवरी सिर्फ कागजों में
सरकारी नियमों के अनुसार गैस एजेंसियों को उपभोक्ताओं के घर तक सिलेंडर पहुंचाना अनिवार्य है, लेकिन यहां यह सुविधा केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है. उपभोक्ताओं को खुद एजेंसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ रही है.
बुजुर्ग और बीमार भी कतार में
स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार लोग भी इस तपती धूप में लाइन में खड़े दिखाई देते हैं. ऐसे में यदि किसी को लू लग जाए या कोई स्वास्थ्य समस्या हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—यह बड़ा सवाल बना हुआ है.
एसी कमरों में अधिकारी, सड़क पर बेहाल जनता
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजेंसी संचालक पूरी तरह मनमानी पर उतर आया है और उपभोक्ताओं की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है. जहां एक तरफ अधिकारी एसी कमरों में बैठकर योजनाएं बना रहे हैं, वहीं आम आदमी सड़क पर परेशान हो रहा है.
लोगों में नाराजगी, कलेक्टर से कार्रवाई की मांग
इस अव्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय नागरिकों में भारी आक्रोश है. लोगों ने नवागत कलेक्टर से मांग की है कि एजेंसी की कार्यप्रणाली की तत्काल जांच की जाए, होम डिलीवरी व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए, जब तक व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती, तब तक छाया और ठंडे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए
भीषण गर्मी के इस दौर में इस तरह की लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है. यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो इसका खामियाजा आम जनता को अपनी सेहत और जान से चुकाना पड़ सकता है.
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