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MP: मैहर बिजली कंपनी में ‘सस्पेंशन-बहाली’ पर बवाल, 24 घंटे में बदले आदेश से उठे ये सवाल, जानें- पूरा मामला

MP Latest News: प्रदेश युवक कांग्रेस के प्रदेश सचिव शिवम पांडेय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने इसे 'सस्पेंशन और बहाली का खेल' बताते हुए पूछा कि यदि कर्मचारी की गलती गंभीर थी, तो जांच इतनी जल्दी कैसे पूरी हो गई.

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Last Updated: April 30, 2026 22:40:53 IST

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MP News: मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के सतना सर्किल में एक प्रशासनिक निर्णय को लेकर विवाद गहरा गया है. अधीक्षण अभियंता द्वारा जारी दो परस्पर विरोधी आदेशों ने विभागीय कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मामला नादन वितरण केंद्र में पदस्थ कनिष्ठ अभियंता (संविदा) बीरेन्द्र कुमार सुमन से जुड़ा है. जानकारी के अनुसार, उन्हें बिना पूर्व सूचना अनुपस्थित रहने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था. निलंबन आदेश में विभागीय जांच लंबित होने का उल्लेख भी किया गया था.

दोबारा बहाली से उठे सवाल

हालांकि, आश्चर्यजनक रूप से महज 24 से 48 घंटे के भीतर ही दूसरा आदेश जारी कर उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया और उन्हें पुनः सेवा में बहाल कर दिया गया. इतनी कम अवधि में निलंबन और फिर बहाली ने विभागीय निर्णय प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इस मामले पर प्रदेश युवक कांग्रेस के प्रदेश सचिव शिवम पांडेय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने इसे “सस्पेंशन और बहाली का खेल” बताते हुए पूछा कि यदि कर्मचारी की गलती गंभीर थी, तो जांच इतनी जल्दी कैसे पूरी हो गई. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कार्रवाई किसी दबाव, प्रभाव या निजी स्वार्थ के तहत की गई.

विभाग में ऑनलाइन अवकाश प्रणाली लागू- शिवम पांडेय

शिवम पांडेय ने कहा कि वर्तमान में विभाग में ऑनलाइन अवकाश प्रणाली लागू है. यदि किसी कर्मचारी का अवकाश आवेदन लंबित है, तो बिना समुचित जांच के सीधे निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई करना संवेदनहीनता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि पारिवारिक आपातकाल, स्वास्थ्य संबंधी समस्या या अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में कर्मचारी अचानक अवकाश लेने को विवश हो सकता है.

मामले में विभाग के भीतर पक्षपात के आरोप भी सामने आए हैं. आरोप है कि कुछ अधिकारियों को लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रखकर संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि अन्य अधिकारियों का बार-बार स्थानांतरण किया जा रहा है. इससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है और उपभोक्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.

उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग

युवक कांग्रेस ने कंपनी के प्रबंध संचालक से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और हाल के ऐसे सभी मामलों की समीक्षा करने की मांग की है, जिनमें त्वरित कार्रवाई के बाद तुरंत राहत प्रदान की गई हो.

शिवम पांडेय ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की, तो युवक कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेगी. अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने आ पाती है.

Disclaimer: The article is a part of syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for factual accuracy.

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MP News: मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के सतना सर्किल में एक प्रशासनिक निर्णय को लेकर विवाद गहरा गया है. अधीक्षण अभियंता द्वारा जारी दो परस्पर विरोधी आदेशों ने विभागीय कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मामला नादन वितरण केंद्र में पदस्थ कनिष्ठ अभियंता (संविदा) बीरेन्द्र कुमार सुमन से जुड़ा है. जानकारी के अनुसार, उन्हें बिना पूर्व सूचना अनुपस्थित रहने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था. निलंबन आदेश में विभागीय जांच लंबित होने का उल्लेख भी किया गया था.

दोबारा बहाली से उठे सवाल

हालांकि, आश्चर्यजनक रूप से महज 24 से 48 घंटे के भीतर ही दूसरा आदेश जारी कर उनका निलंबन समाप्त कर दिया गया और उन्हें पुनः सेवा में बहाल कर दिया गया. इतनी कम अवधि में निलंबन और फिर बहाली ने विभागीय निर्णय प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इस मामले पर प्रदेश युवक कांग्रेस के प्रदेश सचिव शिवम पांडेय ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने इसे “सस्पेंशन और बहाली का खेल” बताते हुए पूछा कि यदि कर्मचारी की गलती गंभीर थी, तो जांच इतनी जल्दी कैसे पूरी हो गई. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या यह कार्रवाई किसी दबाव, प्रभाव या निजी स्वार्थ के तहत की गई.

विभाग में ऑनलाइन अवकाश प्रणाली लागू- शिवम पांडेय

शिवम पांडेय ने कहा कि वर्तमान में विभाग में ऑनलाइन अवकाश प्रणाली लागू है. यदि किसी कर्मचारी का अवकाश आवेदन लंबित है, तो बिना समुचित जांच के सीधे निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई करना संवेदनहीनता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि पारिवारिक आपातकाल, स्वास्थ्य संबंधी समस्या या अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में कर्मचारी अचानक अवकाश लेने को विवश हो सकता है.

मामले में विभाग के भीतर पक्षपात के आरोप भी सामने आए हैं. आरोप है कि कुछ अधिकारियों को लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रखकर संरक्षण दिया जा रहा है, जबकि अन्य अधिकारियों का बार-बार स्थानांतरण किया जा रहा है. इससे प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है और उपभोक्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.

उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग

युवक कांग्रेस ने कंपनी के प्रबंध संचालक से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और हाल के ऐसे सभी मामलों की समीक्षा करने की मांग की है, जिनमें त्वरित कार्रवाई के बाद तुरंत राहत प्रदान की गई हो.

शिवम पांडेय ने चेतावनी दी है कि यदि विभाग ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की, तो युवक कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करेगी. अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने आ पाती है.

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