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Home > राज्य > तोते खा गए 200 पेड़ के अनार, किसान ने पीट लिया माथा, पहुंचा कोर्ट, कर दी ये मांग, फिर…

तोते खा गए 200 पेड़ के अनार, किसान ने पीट लिया माथा, पहुंचा कोर्ट, कर दी ये मांग, फिर…

महाराष्ट्र में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां तोते किसान की अनार की फसल खा गए. इसके बाद मामला कोर्ट में पहुंचा, तो कार्ट ने आदेश दिया कि इसकी भरपाई सरकार को करनी पड़ेगी.

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Last Updated: April 27, 2026 13:09:44 IST

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Maharashtra News: महाराष्ट्र के वर्धा में कुछ तोते एक किसान के पेड़ों पर लगे अनारों को खा गए. इसके बाद किसान अपने नुकसान को लेकर कोर्ट पहुंचा और अपनी फसल के लिए मुआवजा मांग लिया. इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने कई सालों तक मामले में सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि किसान के नुकसान की भरपाई सरकार को करनी होगी. अदालत ने कहा कि ये सभी तोते और दूसरे पक्षी वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत वन्य प्राणी हैं. अगर उनके कारण नागरिकों को परेशानी होती है, तो राज्य सरकार को उसकी भरपाई करनी होगी.

कब और क्या हुआ फैसला?

न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और निवेदिता मेहता की नागपुर पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अगर संरक्षित प्रजातियों के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा नहीं मिलता है, तो वे लोग ऐसे उपाय का सहारा ले सकते हैं, जो वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते हैं. अगर ऐसा होता है कि अधिनियम का मूल उद्देश्य फेल हो जाता है. इस अधिनियम के तहत तोतों को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है. इसके कारण 24 अप्रैल को किसान के पक्ष में ये आदेश पारित किया गया था. 

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के वर्धा जिले के हिंगी गांव में एक 70 वर्षीय किसान महादेव डेकाटे ने याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने दावा किया था कि मई 2016 में पास के वन्यजीव अभयारण्य से कुछ जंगली तोते आए. उन्होंने 200 पेड़ों की फसल को बर्बाद कर दिया. इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 200 रुपये प्रति पेड़ का भुगतान करने का आदेश दिया है. ये भुगतान राज्य सरकार करेगी. 

राज्य सरकार ने जताया विरोध

हालांकि राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए दावा किया है कि अतीत में कई ऐसे मामले आए, जिसमें प्रस्ताव जारी किए गए थे. इसमें कहा गया था कि मुआवजा केवल तभी दिया जाता है, जब जंगली हाथी और भैंसे फलदार पेड़ों को क्षतिग्रस्त करते हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये तर्क मानने लायक नहीं है. उन्होंने कहा कि ये आदेश भी प्रभावित किसानों को उनके नुकसान की भरपाई करने के लिए ही किया गया था.

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कब और क्या हुआ फैसला?

न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फाल्के और निवेदिता मेहता की नागपुर पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि अगर संरक्षित प्रजातियों के कारण हुए नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा नहीं मिलता है, तो वे लोग ऐसे उपाय का सहारा ले सकते हैं, जो वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाते हैं. अगर ऐसा होता है कि अधिनियम का मूल उद्देश्य फेल हो जाता है. इस अधिनियम के तहत तोतों को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है. इसके कारण 24 अप्रैल को किसान के पक्ष में ये आदेश पारित किया गया था. 

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के वर्धा जिले के हिंगी गांव में एक 70 वर्षीय किसान महादेव डेकाटे ने याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने दावा किया था कि मई 2016 में पास के वन्यजीव अभयारण्य से कुछ जंगली तोते आए. उन्होंने 200 पेड़ों की फसल को बर्बाद कर दिया. इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए 200 रुपये प्रति पेड़ का भुगतान करने का आदेश दिया है. ये भुगतान राज्य सरकार करेगी. 

राज्य सरकार ने जताया विरोध

हालांकि राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध करते हुए दावा किया है कि अतीत में कई ऐसे मामले आए, जिसमें प्रस्ताव जारी किए गए थे. इसमें कहा गया था कि मुआवजा केवल तभी दिया जाता है, जब जंगली हाथी और भैंसे फलदार पेड़ों को क्षतिग्रस्त करते हैं. इस पर कोर्ट ने कहा कि ये तर्क मानने लायक नहीं है. उन्होंने कहा कि ये आदेश भी प्रभावित किसानों को उनके नुकसान की भरपाई करने के लिए ही किया गया था.

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