उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल की प्रशासनिक सेवा अब औपचारिक रूप से समाप्त हो गई है. केंद्र सरकार द्वारा उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने 13 साल लंबे अपने प्रशासनिक करियर पर विराम लगा दिया है. दिव्या मित्तल ने मंगलवार (15 सितंबर) को सोशल मीडिया के जरिए इस बात की जानकारी साझा की और अपने जीवन के नए चरण का जिक्र किया.
केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने उनके सेवा से हटने की पुष्टि करते हुए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है.
प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो’
दिव्या मित्तल ने खुद इंस्टाग्राम स्टोरी पर यह खबर साझा करते हुए लिखा, ‘मेरा IAS से त्यागपत्र स्वीकार हो गया है. इसे नीचे उन्होंने लिखा, ‘प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो’
जयशंकर प्रसाद की चर्चित पंक्ति
दिव्या मित्तल ने अपने पोस्ट में हिंदी साहित्य के महान कवि जयशंकर प्रसाद की चर्चित पंक्ति ‘प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो’ का इस्तेमाल किया है. यह पंक्ति उनके ऐतिहासिक नाटक ‘चंद्रगुप्त’ के ‘हिमाद्रि’ गीत से ली गई है. इसका मतलब होता है, ‘तुम्हारे सामने एक श्रेष्ठ, नेक और सही रास्ता है, इसलिए बिना रुके लगातार आगे बढ़ते रहो.’
इस पोस्ट के जरिए दिव्या मित्तल ने IAS सेवा से विदाई के बाद अपनी आगे की राह को लेकर सकारात्मक संकेत दिया है. ‘प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो’ के शब्दों के जरिए उन्होंने बताया कि उनके लिए यह फैसला किसी अंत का नहीं, बल्कि एक नई और नेक दिशा में आगे बढ़ने की शुरुआत है. पोस्ट में उनके शब्दों से साफ झलकता है कि वह अपने जीवन के इस नए पड़ाव को उम्मीद, सकारात्मक सोच और नए उद्देश्य के साथ देख रही हैं.
हालांकि उनके इस पोस्ट के बाद एक बार फिर से बहस छिड़ गई है की आखिर क्या है वो नेक और पवित्र रास्ता जो IAS के पद पर रहते हुए वो उसपर नहीं चल सकती थीं.
— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) September 14, 2026
दिव्या मित्तल का इस्तीफा 15 सितंबर से लागू हो गया है. दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को व्यक्तिगत कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा सौंपा था. इसके साथ ही भारतीय प्रशासनिक सेवा में उनका लंबा सफर पूरा हो गया.
कई जिलों में निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
अपने 13 साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्य में कई अहम पदों पर काम किया. वह मिर्जापुर, संत कबीर नगर और देवरिया जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप में तैनात रहीं.
देवरिया में उनका कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हुआ था, जिसके बाद उन्हें राजस्व विभाग में विशेष सचिव का पद सौंपा गया था. इसी पद पर रहते हुए उन्होंने सेवा से इस्तीफा दिया था.
प्रशासनिक शैली और पहचान
अपने अलग-अलग जिलों के कार्यकाल में दिव्या मित्तल अपने काम को लेकर काफी चर्चा में रहीं. खास तौर पर मिर्जापुर में जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में पीने के पानी की समस्या और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम किया. जनता से सीधे जुड़ाव और समस्याओं को सुलझाने के उनके तरीके की वजह से वह उत्तर प्रदेश में एक जाना-पहचाना नाम बन गईं.
IIT, IIM से लेकर IAS तक का सफर
दिव्या मित्तल मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं. पढ़ाई में शुरू से ही बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्होंने देश के शीर्ष संस्थानों—IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग और फिर IIM बेंगलुरु से MBA किया.
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लंदन में कॉर्पोरेट सेक्टर में नौकरी की. हालांकि, देश लौटने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की. साल 2013 में उनका चयन IAS के लिए हुआ और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला.
कॉर्पोरेट करियर छोड़कर जनसेवा में आने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों और विभागों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और अब वह अपने जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही हैं.