Lucknow Kanpur Expressway Viral Video : करीब 4,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 20 दिन बाद ही सवालों के घेरे में आ गया है. सड़क के बार-बार धंसने, लगातार मरम्मत और अब पंखों से सड़क सुखाने का वायरल वीडियो परियोजना की गुणवत्ता पर बहस छेड़ रहा है. इस बीच NHAI ने निर्माण कंपनी पर सख्त कार्रवाई करते हुए टोल वसूली भी अस्थायी रूप से रोक दी है.
20 दिन में पांच बार धंसी सड़क
13 जुलाई को शुरू हुए लगभग 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर उद्घाटन के कुछ दिनों बाद ही सड़क धंसने और सतह खिसकने की घटनाएं सामने आने लगीं. अधिकारियों के मुताबिक करीब 20 दिनों के भीतर पांच अलग-अलग मौकों पर सड़क के हिस्सों में धंसाव दर्ज किया गया. बुधवार को पर मरम्मत कार्य लगातार जारी रहा, जहां भारी मशीनों की मदद से क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त किया जा रहा था.
एक लेन बंद, दूसरी से दोनों तरफ का ट्रैफिक
सड़क के प्रभावित हिस्से में सुरक्षा के लिहाज से एक ओर की लेन बंद कर दी गई है. इसके चलते दोनों दिशाओं के वाहनों को एक ही कैरिजवे से निकाला जा रहा है. कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है, जिससे वाहनों की गति धीमी हो गई है और यात्रियों को सामान्य से अधिक समय लग रहा है. यात्रियों का कहना है कि टोल प्लाजा से प्रवेश करने के बाद उन्हें आगे जाकर यू-टर्न लेना पड़ रहा है और कई किलोमीटर तक विपरीत दिशा वाली लेन से गुजरना पड़ रहा है. कई लोगों ने यह भी शिकायत की कि टोल प्लाजा पर पहले से यह नहीं बताया गया कि आगे सड़क प्रभावित है और ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है.
मरम्मत पूरी होने तक नहीं लगेगा टोल
यात्रियों को राहत देते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया है. मरम्मत पूरी होने तक इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा. टोल से होने वाले राजस्व के नुकसान की भरपाई निर्माण कंपनी से कराई जाएगी.
निर्माण कंपनी पर NHAI की बड़ी कार्रवाई
लगातार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं के बाद NHAI ने निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफोटेक के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. प्राधिकरण ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की संस्तुति भेजी है. परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटाया गया है, जबकि पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को चार्जशीट जारी की गई है. इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार पर दो वर्षों तक NHAI और मंत्रालय की परियोजनाओं में काम करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
बारिश बनी वजह या निर्माण में खामी? जांच जारी
NHAI का कहना है कि लगातार बारिश के कारण पानी सड़क के नीचे मौजूद मिट्टी की परतों तक पहुंच गया, जिससे उसकी मजबूती प्रभावित हुई और किलोमीटर-64 के आसपास स्लिपेज की स्थिति बनी. हालांकि, वास्तविक तकनीकी कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच जारी है. इसके लिए IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों की टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है. साथ ही पूरे एक्सप्रेसवे की पेवमेंट स्थिति का लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से परीक्षण कराया जा रहा है.
3 करोड़ का मरम्मत खर्च भी निर्माण कंपनी ही उठाएगी
NHAI ने साफ किया है कि प्रभावित हिस्से की मरम्मत पर आने वाला लगभग 3 करोड़ रुपये का पूरा खर्च निर्माण कंपनी को ही वहन करना होगा. इसके साथ ही निर्माण और निगरानी में यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसी की जवाबदेही भी तय की जाएगी.