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मथुरा BSA कॉलेज विवाद में बड़ा फैसला! हाईकोर्ट ने वित्तीय अधिकारों पर लगाई रोक, कहा- 2 महीने में पूरी करें जांच

Mathura BSA College Controversy: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बीएसए कॉलेज में चल रहे वित्तीय अनियमितताओं के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जरूरी आदेश जारी किया है. कोर्ट ने सशर्त अनुमोदित प्रबंध समिति को कॉलेज के वित्तीय खातों के संचालन से पूरी तरह दूर रखते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें किसी प्रकार का वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया है.

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Last Updated: April 25, 2026 12:47:30 IST

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Mathura BSA College Controversy: जिले के बीएसए (पीजी) कॉलेज में चल रहे वित्तीय अनियमितताओं के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है. कोर्ट ने सशर्त अनुमोदित प्रबंध समिति को कॉलेज के वित्तीय खातों के संचालन से पूरी तरह दूर रखते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें किसी प्रकार का वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रबंध समिति पर लगे आरोप गंभीर हैं और भविष्य में इनके आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है. साथ ही राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई है.

क्या है पूरा मामला?

बीएसए कॉलेज, जो एक अशासकीय सहायता प्राप्त संस्थान है, पिछले करीब 15 वर्षों से एकल व्यवस्था में संचालित हो रहा था. 17 अक्टूबर 2025 को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति ने धीरेन्द्र कुमार अग्रवाल की प्रबंध समिति को 9 शर्तों के साथ सशर्त अनुमोदन दिया था. इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर एसटीएफ आगरा यूनिट द्वारा की गई जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की पुष्टि हुई है. जांच रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी जा चुकी है, जिसमें संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है.

2 महीने के अंदर जांच पूरी करने के निर्देश

संयुक्त शिक्षा निदेशक की जांच और विशेष ऑडिट रिपोर्टों में भी कॉलेज खातों से अवैध धन हस्तांतरण और भूमि दुरुपयोग जैसे मामले सामने आए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विधान परिषद की संसदीय समिति में भी उठाया जा चुका है.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसके आदेश में कहीं भी बैंक खातों के संचालन की अनुमति नहीं दी गई है. साथ ही सभी लंबित जांच को दो माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.

महाविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे स्थिति स्पष्ट हो गई है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी.

Disclaimer: The article is a part of syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for factual accuracy.

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Mathura BSA College Controversy: जिले के बीएसए (पीजी) कॉलेज में चल रहे वित्तीय अनियमितताओं के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी किया है. कोर्ट ने सशर्त अनुमोदित प्रबंध समिति को कॉलेज के वित्तीय खातों के संचालन से पूरी तरह दूर रखते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें किसी प्रकार का वित्तीय अधिकार नहीं दिया गया है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रबंध समिति पर लगे आरोप गंभीर हैं और भविष्य में इनके आधार पर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है. साथ ही राज्य सरकार, उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई है.

क्या है पूरा मामला?

बीएसए कॉलेज, जो एक अशासकीय सहायता प्राप्त संस्थान है, पिछले करीब 15 वर्षों से एकल व्यवस्था में संचालित हो रहा था. 17 अक्टूबर 2025 को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा की कुलपति ने धीरेन्द्र कुमार अग्रवाल की प्रबंध समिति को 9 शर्तों के साथ सशर्त अनुमोदन दिया था. इस बीच, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर एसटीएफ आगरा यूनिट द्वारा की गई जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की पुष्टि हुई है. जांच रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी जा चुकी है, जिसमें संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है.

2 महीने के अंदर जांच पूरी करने के निर्देश

संयुक्त शिक्षा निदेशक की जांच और विशेष ऑडिट रिपोर्टों में भी कॉलेज खातों से अवैध धन हस्तांतरण और भूमि दुरुपयोग जैसे मामले सामने आए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे विधान परिषद की संसदीय समिति में भी उठाया जा चुका है.

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसके आदेश में कहीं भी बैंक खातों के संचालन की अनुमति नहीं दी गई है. साथ ही सभी लंबित जांच को दो माह के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.

महाविद्यालय प्रशासन ने कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि इससे स्थिति स्पष्ट हो गई है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी.

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