मंगलवार रात करीब 8:30 बजे मेरठ के पल्लवपुरम फेज 2, मोदीपुरम स्थित एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में क्लोरीन गैस लीक होने से लगभग 8-10 लोग बीमार पड़ गए. आसपास रहने वाले लोगों को सांस लेने में तकलीफ होने लगी और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. स्थिति बिगड़ने पर आसपास के घरों को खाली कराया गया, जबकि डीएम और एसएसपी मौके पर पहुंचे. मास्क पहने दमकल कर्मियों को गैस लीक को नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया और जल कल्याण विभाग की एक टीम भी प्लांट पर पहुंची.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेरठ में गैस रिसाव एसटीपी (सीटीपी) में हुआ, जहां उपचारित अपशिष्ट जल को कीटाणुरहित करने के लिए क्लोरीन का उपयोग किया जाता है. अधिकारियों ने बताया कि गैस हवा से भारी होने के कारण फैल नहीं सकी. स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए टीमें काम कर रही थीं और रिसाव हुई गैस को घोलने के लिए पानी का इस्तेमाल किया जा रहा था.
पाइप में वॉशर का न होना हो सकता है कारण
खबरों के मुताबिक, दौराला ऑर्गेनिक के सुरक्षा अधिकारी विशाल गुप्ता ने बताया कि क्लोरीन का काम करने वाले कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली सुरंग की पाइप में वॉशर न होने के कारण रिसाव हुआ. उन्होंने कहा, “एसटीपी संयंत्र में क्लोरीन गैस का उपयोग किया जाता है. यह गैस हवा से भारी होती है. क्लोरीन डालने वाले कर्मचारियों ने सुरंग की पाइप में वॉशर नहीं लगाया था.”
उन्होंने आगे बताया, “जांच के दौरान पता चला कि वॉशर गायब है. इसी वजह से गैस लीक हुई. गैस भारी होने के कारण हवा में फैल नहीं सकी. अब पानी की मदद से गैस को घोलने का प्रयास किया जा रहा है. इसका असर खत्म होने में लगभग एक से डेढ़ घंटे का समय लगेगा.”
गैस रिसाव से क्लोरीन के संपर्क में आने का खतरा
एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट दूषित पानी का उपचार करता है और उसे पुन: उपयोग के योग्य बनाता है. पानी को कीटाणुरहित करने के लिए क्लोरीन का नियंत्रित मात्रा में उपयोग किया जाता है. हालांकि, क्लोरीन गैस का रिसाव आसपास के क्षेत्रों के लोगों को प्रभावित कर सकता है. मेरठ में हुए गैस रिसाव से निवासी ऐसी गैस के संपर्क में आ गए हैं जो आंखों, नाक और गले में जलन पैदा कर सकती है. क्लोरीन गैस के संपर्क में आने वाले लोगों को खांसी, सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और सीने में तकलीफ हो सकती है, इसलिए तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाना और चिकित्सा उपचार कराना महत्वपूर्ण है.
तुरंत चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन
गैस रिसाव की सूचना मिलते ही अधिकारियों ने आसपास के घरों को खाली करा लिया. मास्क पहने दमकल कर्मियों ने गैस पर काबू पाने के प्रयास जारी रखे, जबकि जल कल विभाग की टीम ने घटनास्थल पर सहायता की. अधिकारियों ने बताया कि रिसाव हुई गैस को पानी में घोला जा रहा है और इसका असर लगभग एक से डेढ़ घंटे में कम होने की उम्मीद है.