11
Shri Kalki Dham Sambhal Event: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में निर्माणादीन श्री कल्कि धाम एक बार फिर सुर्खियों में है, यहां मंगलवार यानी 28 अप्रैल 2026 को श्री कल्कि जंयती का भव्य आयोजन होने जा रहा है. यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से खास है बल्कि इसे भविष्य की आस्था का केंद्र भी माना जा रहा है.
श्री कल्कि धाम की आधारशिला पीएम नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी 2024 को रखी थी. इस अवसर के बाद परम पूज्य गुरुदेव श्री श्री 1008 श्रीमद् जगद्गुरु श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज ने कल समारोह आयोजित किया है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें पूरी जानकारी और मंदिर का महत्व.
भव्य आयोजन का शुभ अवसर
परम पूज्य गुरुदेव आचार्य प्रमोद कृष्णम जी महाराज के सान्निध्य में बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि यानी 28 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे श्री कल्कि धाम, ग्राम एंचोड़ा कम्बोह, जनपद संभल में श्री कल्कि जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा. इस अवसर पर देशभर से साधु-संतों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है. बताया जा रहा हे कि इस भव्य कार्यक्रम में 13 अखाड़ों की भी विशेष उपस्थिती रहेगी.
भगवान कल्कि कौन हैं?
पौराणिक कथाओं और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कलियुग की शुरुआत भगवान कृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद हुई थी. ऐसा कहा जाता है कि कलियुग की अवधि 432,000 वर्ष है. अब तक, कलियुग के 5,126 वर्ष बीत चुके हैं. श्रीमद्-भागवतम् के 12वें स्कंध के 24वें श्लोक के अनुसार, भगवान कल्कि पृथ्वी पर तब अवतार लेंगे.
जब देवताओं के गुरु बृहस्पति (बृहस्पति ग्रह) सूर्य और चंद्रमा के साथ एक सीध में आकर पुष्य नक्षत्र (एक खगोलीय तारामंडल) का निर्माण करेंगे. इसमें आगे यह भी कहा गया है कि श्री हरि के इस दसवें अवतार के जन्म की अनुमानित तिथि, पवित्र महीने सावन के दौरान शुक्ल पक्ष (चंद्रमा के बढ़ते चरण) की पंचमी तिथि (पांचवें दिन) को पड़ेगी.
कल्कि धाम मंदिर का महत्व
संभल जिले में, कल्कि धाम मंदिर के भीतर, दस अलग-अलग गर्भगृह (पवित्र कक्ष) बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक, ब्रह्मांड के रक्षक भगवान श्री हरि के दस अवतारों में से एक को समर्पित होगा. इसके अलावा, इस पवित्र धाम के परिसर के भीतर 68 पवित्र तीर्थ स्थल भी स्थापित किए जाएंगे. पांच एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला यह भव्य मंदिर, लगभग पांच वर्षों में बनकर तैयार होने की उम्मीद है. यह ध्यान देने योग्य है कि इससे पहले भी एक कल्कि मंदिर का निर्माण हो चुका है, जहां भक्त भगवान विष्णु के दस अवतारों के दर्शन (पवित्र दर्शन) कर सकते हैं.