Up Mahila Udyami Credit Yojana: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सरकार राज्य की करीब 1 करोड़ महिलाओं को ₹1 लाख तक का बिना ब्याज वाला लोन देने की तैयारी कर रही है. इस योजना के तहत महिलाओं को यह रकम तीन चरणों में मिलेगी. खास बात यह है कि इस क्रेडिट पर कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा.
उत्तर प्रदेश महिला उद्यमी क्रेडिट योजना नाम की इस स्कीम की घोषणा राज्य के 2026-27 के बजट में की गई थी. उत्तर प्रदेश स्टेट लाइवलीहुड मिशन (UPSRLM) से जुड़े सेल्फ-हेल्प ग्रुप (SHG) की महिलाओं को इसका फायदा मिलेगा. सरकार इन 1 करोड़ महिलाओं को स्पेशल क्रेडिट कार्ड भी देने की तैयारी कर रही है, जिससे वे छोटे बिजनेस शुरू करने या मौजूदा वेंचर को बढ़ाने के लिए बिना ब्याज के पैसे निकाल सकेंगी. यह स्कीम तीन साल के लिए लागू की जाएगी.
तीन किस्तों में मिलेंगे ₹1 लाख
इस स्कीम की सबसे खास बात इसका फेज्ड अप्रोच है. जो महिलाएं समय पर अपनी किस्तें चुकाएंगी, उन्हें अगली बड़ी किस्त मिलेगी:
- पहली किस्त: ₹20,000 दिसंबर में लॉन्च होने की उम्मीद.
- दूसरी किस्त: ₹30,000 पहली किस्त समय पर चुकाने पर.
- तीसरी किस्त: ₹50,000 दूसरी किस्त चुकाने पर क्रेडिट लिमिट बढ़ा दी जाएगी.
इसका मतलब है कि तीनों किस्तों को मिलाकर, हर योग्य महिला को ₹1 लाख तक का बिना ब्याज का क्रेडिट मिलेगा. यह रकम सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाएगी. यह एक लोन है इसलिए असली किस्त में सिर्फ ब्याज ही नहीं होगा, लेकिन मूल रकम भी चुकानी होगी. किस्त समय पर चुकाने पर ही अगली किस्त का रास्ता खुलेगा.
1 लाख करोड़ दांव पर
पैमाना भी कमाल का है. अकेले पहली किस्त (₹20,000 × 1 करोड़ महिलाएं) पर सरकार को ₹20,000 करोड़ खर्च करने होंगे, जबकि पूरी योजना की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹1 लाख करोड़ है. सरकार का लक्ष्य सिर्फ़ फंड देना नहीं है, बल्कि महिलाओं को सेल्फ़-एम्प्लॉयमेंट और छोटे बिज़नेस से जोड़कर उन्हें “लखपति दीदी” बनाना है. इसके अलावा, ई-रिक्शा योजना में ₹2 लाख तक की गाड़ियां खरीदने पर भी विचार किया जा रहा है.
योजना की राजनीतिक महत्व
2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच इस योजना का राजनीतिक महत्व बहुत ज़्यादा है. बिहार चुनावों में महिला वोटरों की भूमिका के बाद, अब उत्तर प्रदेश में सभी पार्टियां महिला वोट बैंक पर दांव लगा रही हैं और योगी सरकार का यह कदम इस मामले में सबसे बड़ा माना जा रहा है. चुनावों से पहले इस योजना को ज़ोर-शोर से लागू किया जा रहा है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को पहली किस्त मिल सके.
आजीविका मिशन के ज़रिए उत्तर प्रदेश में करोड़ों महिलाएं पहले से ही सेल्फ़-हेल्प ग्रुप (SHG) से जुड़ी हुई हैं, और उनके ज़रिए प्रधानमंत्री लखपति दीदी जैसे कैंपेन चलाए जा रहे हैं. यह नई स्कीम सीधे उसी नेटवर्क पर निर्भर करती है, इसलिए सरकार को इसे लागू करने में कोई मुश्किल नहीं आएगी.
महिलाओं के लिए इस स्कीम का क्या मतलब है?
गांवों और कस्बों की जो महिलाएं सिलाई, डेयरी, पशुपालन, पापड़-बेसन, ब्यूटी पार्लर और किराने की दुकानों जैसे काम करती हैं या काम करने की इच्छा रखती हैं, उनके लिए यह बिना ब्याज के बोझ के अपने बिज़नेस को ₹20,000 से ₹1 लाख तक बढ़ाने का मौका है. अभी, एक आम बैंक लोन पर 10-12% सालाना ब्याज लगता है, जिसका मतलब है ₹1 लाख पर सालाना हज़ारों रुपये की बचत और इसे किश्तों में चुकाने की सुविधा.