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Home > राज्य > उत्तर प्रदेश > न दुकान, न सामान… फिर भी बेच डाला 12 करोड़ का माल! वाराणसी में GST के ‘जादूगर’ का कैसे खुला राज़, जानें!

न दुकान, न सामान… फिर भी बेच डाला 12 करोड़ का माल! वाराणसी में GST के ‘जादूगर’ का कैसे खुला राज़, जानें!

GST Fraud Case: वाराणसी में 'सनशाइन इंटरप्राइजेज' नाम की फर्जी फर्म बनाकर 12 करोड़ रुपये का जीएसटी घोटाला करने का मामला सामने आया है. जहां मुख्य आरोपी पंकज कुमार को पुलिस ने पंजाब के बरनाला से गिरफ्तार किया है. जानें क्या है पूरा मामला?

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Last Updated: 2026-04-26 19:20:47

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GST Fraud Case: वाराणसी में फर्जी फर्मों के जरिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के खिलाफ चेतगंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. फर्जी इनवॉइस और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के नाम पर करीब 12 करोड़ रुपये की जीएसटी ठगी करने वाले मुख्य आरोपी पंकज कुमार को पुलिस ने बरनाला से गिरफ्तार कर लिया है.

कागजों में चल रही थी फर्म

जांच में सामने आया कि ‘सनशाइन इंटरप्राइजेज’ नाम की फर्म सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही थी. जब राज्य कर विभाग (SIB) की टीम ने फर्म के पंजीकृत पते पर छापेमारी की, तो वहां न कोई दुकान मिली और न ही किसी प्रकार की व्यापारिक गतिविधि पाई गई.

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब SIB रेंज-बी के अधिकारी कमलाकांत भास्कर ने 8 अप्रैल को चेतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई.

ये था ठगी का पूरा तरीका

इस पूरे घोटाले में बेहद सुनियोजित तरीके से सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग किया गया—

फर्जी टैक्स इनवॉइस: बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के बिल तैयार किए गए.

कागजी सप्लाई: केवल दस्तावेजों में माल की सप्लाई दिखाकर जीएसटी रिटर्न फाइल किए गए.

आईटीसी का खेल: फर्जी बिलों के जरिए अन्य फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ दिलाया गया, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ.

पंजाब में दबिश

चेतगंज इंस्पेक्टर विजय कुमार शुक्ला के नेतृत्व में गठित टीम ने सर्विलांस और सटीक सूचना के आधार पर बरनाला में दबिश दी. आरोपी पंकज कुमार को गुरु तेग बहादुर नगर स्थित उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ जीएसटी चोरी और जालसाजी के दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं.

वाराणसी में हो रहे कई मामले

वाराणसी में फर्जी नाम-पते पर जीएसटी पंजीकरण कराकर टैक्स चोरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. 2020 के बाद से अब तक कई बड़े घोटाले उजागर हो चुके हैं.

अधिकारियों का मानना है कि पंकज कुमार से पूछताछ में कई अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं, जो इस फर्जीवाड़े के जरिए आईटीसी का लाभ उठाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहे थे.

Disclaimer: The article is a part of a syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for the accuracy of the facts.

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GST Fraud Case: वाराणसी में फर्जी फर्मों के जरिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वाले गिरोह के खिलाफ चेतगंज पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. फर्जी इनवॉइस और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के नाम पर करीब 12 करोड़ रुपये की जीएसटी ठगी करने वाले मुख्य आरोपी पंकज कुमार को पुलिस ने बरनाला से गिरफ्तार कर लिया है.

कागजों में चल रही थी फर्म

जांच में सामने आया कि ‘सनशाइन इंटरप्राइजेज’ नाम की फर्म सिर्फ कागजों पर संचालित हो रही थी. जब राज्य कर विभाग (SIB) की टीम ने फर्म के पंजीकृत पते पर छापेमारी की, तो वहां न कोई दुकान मिली और न ही किसी प्रकार की व्यापारिक गतिविधि पाई गई.

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब SIB रेंज-बी के अधिकारी कमलाकांत भास्कर ने 8 अप्रैल को चेतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई.

ये था ठगी का पूरा तरीका

इस पूरे घोटाले में बेहद सुनियोजित तरीके से सरकारी सिस्टम का दुरुपयोग किया गया—

फर्जी टैक्स इनवॉइस: बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के बिल तैयार किए गए.

कागजी सप्लाई: केवल दस्तावेजों में माल की सप्लाई दिखाकर जीएसटी रिटर्न फाइल किए गए.

आईटीसी का खेल: फर्जी बिलों के जरिए अन्य फर्मों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ दिलाया गया, जिससे सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ.

पंजाब में दबिश

चेतगंज इंस्पेक्टर विजय कुमार शुक्ला के नेतृत्व में गठित टीम ने सर्विलांस और सटीक सूचना के आधार पर बरनाला में दबिश दी. आरोपी पंकज कुमार को गुरु तेग बहादुर नगर स्थित उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस के अनुसार, आरोपी के खिलाफ जीएसटी चोरी और जालसाजी के दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं.

वाराणसी में हो रहे कई मामले

वाराणसी में फर्जी नाम-पते पर जीएसटी पंजीकरण कराकर टैक्स चोरी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है. 2020 के बाद से अब तक कई बड़े घोटाले उजागर हो चुके हैं.

अधिकारियों का मानना है कि पंकज कुमार से पूछताछ में कई अन्य लोगों के नाम सामने आ सकते हैं, जो इस फर्जीवाड़े के जरिए आईटीसी का लाभ उठाकर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहे थे.

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