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Buddha Purnima Dhan Prapti ke Upay: बुद्ध पूर्णिमा पर बन रहा है ग्रहों का अद्भुत संयोग, धन प्राप्ति के लिए करें खास उपाय

Buddha Purnima Dhan Prapti ke Upay: बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती का त्योहार वैशाख पूर्णिमा पर शुक्रवार 1 मई को है. इस वैशाख पूर्णिमा ग्रहों की दशा कुछ ऐसी बन रही है जो बेहद विशिष्ट है. इस अद्भुत संयोग पर विशेष पूजा करके आप रूठी हुई लक्ष्मी को मना सकते हैं.

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Last Updated: May 1, 2026 12:11:35 IST

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Buddha Purnima Dhan Prapti ke Upay: बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती का त्योहार वैशाख पूर्णिमा पर शुक्रवार 1 मई को है. यह तिथि भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से जुड़ी है. बौद्ध धर्म के अलावा हिन्दू धर्म में भी इसका विशेष महत्त्व है. 

इस वैशाख पूर्णिमा ग्रहों की दशा कुछ ऐसी बन रही है जो बेहद विशिष्ट है. इस अद्भुत संयोग पर विशेष पूजा करके आप रूठी हुई लक्ष्मी को मना सकते हैं, साथ ही अगर आप किसी कर्ज या धन के संकट से गुजर रहे हैं तो भी कुछ उपाय कर सकते हैं.

ग्रहों की अद्भुत दशा 

इस समय देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि में हैं जबकि चंद्रमा तुला राशि में है, जिससे चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि से विशेष संयोग बन जाता है. वहीं सूर्य देव भी अपनी उच्चतम राशि मेष में हैं जिससे चंद्रमा को विशेष ताकत मिल जाती है. शुक्र की राशि में बैठे चंद्रमा पर जब देवगुरु बृहस्पति और सूर्य की दृष्टि पड़ती है तो यह धन प्राप्ति के लिए एक आदर्श ज्योतिषीय दशा बन जाती है.    

वैशाख पूर्णिमा 202: तारीख और समय

साल 2026 में वैशाख पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों में संशय है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय ये है:

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 अप्रैल, 2026 (रात 09:12 बजे से)

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 01 मई, 2026 (रात 10:52 बजे तक)

पूजा के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:52 बजे से 12:45 बजे तक (स्नान-दान के लिए श्रेष्ठ)
अमृत काल: शाम 06:56 बजे से रात 08:41 बजे तक
चंद्र अर्घ्य का समय: 1 मई की शाम को चंद्रमा निकलने के बाद

धन प्राप्ति के लिए पूजा की आसान विधि

यूं तो पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने का विशेष महत्त्व है, लेकिन इस विशेष अवसर पर आप धन-प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं. स्नान करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. माता की मूर्ति या फोटो उस चौकी पर स्थापित करें. उसके बाद चुनरी ओढ़ाएं, और मां को शृंगार का सामान चढ़ाएं. लक्ष्मी जी को कमल का फूल विशेष प्रिय है. हो सके तो कमल का पुष्प जरुर चढ़ाएं. सफेद रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं और ललिता सहस्रनाम का पाठ करें. अगर आप कर्ज से मुक्त होना चाहते हैं तो श्रीसूक्तम का पाठ करें.

दान का महत्व

वैशाख के महीने में भीषण गर्मी होती है, इसलिए इस दिन जल सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है. राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना या किसी प्यासे जानवर के लिए पानी की व्यवस्था करना अनंत पुण्य देता है. इसके अलावा जरूरतमंदों को पंखा, मिट्टी का घड़ा या सत्तू दान करना भी उत्तम फलदायी होता है.

डिस्क्लेमर: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इंडिया न्यूज़ यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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Last Updated: May 1, 2026 12:11:35 IST

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Buddha Purnima Dhan Prapti ke Upay: बुद्ध पूर्णिमा या बुद्ध जयंती का त्योहार वैशाख पूर्णिमा पर शुक्रवार 1 मई को है. यह तिथि भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से जुड़ी है. बौद्ध धर्म के अलावा हिन्दू धर्म में भी इसका विशेष महत्त्व है. 

इस वैशाख पूर्णिमा ग्रहों की दशा कुछ ऐसी बन रही है जो बेहद विशिष्ट है. इस अद्भुत संयोग पर विशेष पूजा करके आप रूठी हुई लक्ष्मी को मना सकते हैं, साथ ही अगर आप किसी कर्ज या धन के संकट से गुजर रहे हैं तो भी कुछ उपाय कर सकते हैं.

ग्रहों की अद्भुत दशा 

इस समय देवगुरु बृहस्पति मिथुन राशि में हैं जबकि चंद्रमा तुला राशि में है, जिससे चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि से विशेष संयोग बन जाता है. वहीं सूर्य देव भी अपनी उच्चतम राशि मेष में हैं जिससे चंद्रमा को विशेष ताकत मिल जाती है. शुक्र की राशि में बैठे चंद्रमा पर जब देवगुरु बृहस्पति और सूर्य की दृष्टि पड़ती है तो यह धन प्राप्ति के लिए एक आदर्श ज्योतिषीय दशा बन जाती है.    

वैशाख पूर्णिमा 202: तारीख और समय

साल 2026 में वैशाख पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों में संशय है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय ये है:

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 30 अप्रैल, 2026 (रात 09:12 बजे से)

पूर्णिमा तिथि समाप्त: 01 मई, 2026 (रात 10:52 बजे तक)

पूजा के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:52 बजे से 12:45 बजे तक (स्नान-दान के लिए श्रेष्ठ)
अमृत काल: शाम 06:56 बजे से रात 08:41 बजे तक
चंद्र अर्घ्य का समय: 1 मई की शाम को चंद्रमा निकलने के बाद

धन प्राप्ति के लिए पूजा की आसान विधि

यूं तो पूर्णिमा पर सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने का विशेष महत्त्व है, लेकिन इस विशेष अवसर पर आप धन-प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हैं. स्नान करके चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं. माता की मूर्ति या फोटो उस चौकी पर स्थापित करें. उसके बाद चुनरी ओढ़ाएं, और मां को शृंगार का सामान चढ़ाएं. लक्ष्मी जी को कमल का फूल विशेष प्रिय है. हो सके तो कमल का पुष्प जरुर चढ़ाएं. सफेद रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं और ललिता सहस्रनाम का पाठ करें. अगर आप कर्ज से मुक्त होना चाहते हैं तो श्रीसूक्तम का पाठ करें.

दान का महत्व

वैशाख के महीने में भीषण गर्मी होती है, इसलिए इस दिन जल सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है. राहगीरों को ठंडा पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना या किसी प्यासे जानवर के लिए पानी की व्यवस्था करना अनंत पुण्य देता है. इसके अलावा जरूरतमंदों को पंखा, मिट्टी का घड़ा या सत्तू दान करना भी उत्तम फलदायी होता है.

डिस्क्लेमर: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं. इंडिया न्यूज़ यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है. पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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