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Home > बिज़नेस > शेयर बाजार में IPO की सुनामी, कंपनियों ने जुटाए 2.12 लाख करोड़, अब 238 कंपनियों की नजर निवेशकों की जेब पर

शेयर बाजार में IPO की सुनामी, कंपनियों ने जुटाए 2.12 लाख करोड़, अब 238 कंपनियों की नजर निवेशकों की जेब पर

संवत 2082 में 129 मेनबोर्ड IPO से रिकॉर्ड 2.12 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए. Jio और NSE का बड़ा योगदान रहा। अगले साल 4.3 लाख करोड़ के IPO कतार में हैं.

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Published: November 6, 2026 14:33:07 IST
Last Updated: November 6, 2026 14:33:07 IST

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शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए IPO यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संवत 2082 में भारत के प्राइमरी मार्केट ने फंड जुटाने का नया रिकॉर्ड बना दिया. इस दौरान 129 कंपनियों ने मेनबोर्ड IPO के जरिए कुल 2.12 लाख करोड़ रुपये जुटाए. खास बात यह रही कि इसमें Jio Platforms और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की हिस्सेदारी करीब एक चौथाई रही.

प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, Jio Platforms ने अपने IPO से 30,213 करोड़ रुपये और NSE ने 22,562 करोड़ रुपये जुटाए. इस तरह दोनों कंपनियों ने मिलकर 52,775 करोड़ रुपये का फंड जुटाया. संवत 2082 की शुरुआत 21 अक्टूबर 2025 को हुई थी और यह 4 नवंबर 2026 को समाप्त हुआ.

IPO बाजार में रिकॉर्ड फंड जुटाने के बावजूद सभी कंपनियों के शेयरों की लिस्टिंग शानदार नहीं रही. 129 मेनबोर्ड IPO में से 89 कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के दिन अपने इश्यू प्राइस के बराबर या उससे ऊपर बंद हुए. वहीं, 40 कंपनियों के शेयर इश्यू प्राइस से नीचे रहे. सभी IPO का औसत लिस्टिंग गेन 14.29 फीसदी रहा.

Jio और NSE ने जुटाई कुल रकम की करीब 25% राशि

संवत 2082 में IPO बाजार में सबसे बड़ी चर्चा Jio Platforms और NSE के इश्यू की रही. इन दोनों कंपनियों ने मिलकर 52,775 करोड़ रुपये जुटाए, जो पूरे मेनबोर्ड IPO बाजार से जुटाई गई रकम का करीब 25 फीसदी है.

बाकी 127 कंपनियों ने कुल मिलाकर लगभग 1.59 लाख करोड़ रुपये जुटाए. इससे साफ है कि बड़े और चर्चित कंपनियों के IPO ने बाजार में फंड जुटाने की क्षमता को नई ऊंचाई दी है.

कुल 2.12 लाख करोड़ रुपये में से 99,917 करोड़ रुपये फ्रेश शेयर जारी करके जुटाए गए, जबकि करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए आए.

फ्रेश इश्यू में IPO से मिलने वाला पैसा सीधे कंपनी के पास जाता है. कंपनी इस रकम का इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने, कर्ज चुकाने या अन्य जरूरतों के लिए कर सकती है. दूसरी तरफ, OFS में कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं और पैसा उन शेयरधारकों को मिलता है, न कि कंपनी को.

IPO से निवेशकों को कितना मिला फायदा?

IPO बाजार में कंपनियों ने रिकॉर्ड रकम जुटाई, लेकिन निवेशकों को हर इश्यू में मुनाफा नहीं हुआ. आंकड़ों के मुताबिक, 129 मेनबोर्ड IPO में से 89 कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के दिन इश्यू प्राइस से ऊपर या उसके बराबर बंद हुए. वहीं, 40 शेयरों में लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को नुकसान हुआ.

मेनबोर्ड IPO का औसत लिस्टिंग रिटर्न 14.29 फीसदी रहा. यानी कुल मिलाकर लिस्टिंग का प्रदर्शन सकारात्मक रहा, लेकिन अलग-अलग कंपनियों के रिटर्न में काफी अंतर देखने को मिला.

SME IPO बाजार भी इस दौरान काफी सक्रिय रहा. 238 कंपनियों ने SME IPO के जरिए कुल 10,511 करोड़ रुपये जुटाए. इनमें से 140 कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के दिन इश्यू प्राइस के ऊपर या बराबर रहे, जबकि 98 शेयर नीचे बंद हुए. SME IPO का औसत लिस्टिंग रिटर्न 11.91 फीसदी रहा.

इस तरह मेनबोर्ड और SME सेगमेंट को मिलाकर संवत 2082 में 367 IPO आए और कंपनियों ने कुल 2.22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए.

अगले साल IPO बाजार में आएगी और तेजी?

संवत 2083 में भी IPO बाजार में काफी हलचल रहने की उम्मीद है. कंपनियों की लंबी कतार इसका संकेत दे रही है. 30 अक्टूबर 2026 तक 238 कंपनियां IPO के जरिए बाजार से पैसा जुटाने की तैयारी में थीं. इन कंपनियों के प्रस्तावित इश्यू का कुल आकार करीब 4.3 लाख करोड़ रुपये है.

इनमें से 116 कंपनियों को SEBI से IPO लाने की मंजूरी मिल चुकी है. इनके प्रस्तावित इश्यू की कुल वैल्यू करीब 1,99,830 करोड़ रुपये है. वहीं, 122 कंपनियों ने SEBI के पास अपने ऑफर डॉक्यूमेंट जमा कराए हैं और उन्हें नियामकीय मंजूरी का इंतजार है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये सभी कंपनियां अगले संवत में IPO लेकर आएंगी. IPO लॉन्च करने का फैसला बाजार की स्थिति, कंपनी की वैल्यूएशन, नियामकीय मंजूरी और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

भारत के IPO बाजार में रिकॉर्ड फंड जुटना देश की कंपनियों और कैपिटल मार्केट के बढ़ते आकार को दिखाता है. Jio Platforms और NSE जैसे बड़े इश्यू ने बाजार को नई ऊंचाई दी है. वहीं, 4.3 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित IPO पाइपलाइन बताती है कि आने वाले समय में निवेशकों के पास नए निवेश विकल्पों की कमी नहीं होगी.

लेकिन निवेशकों के लिए सिर्फ किसी कंपनी का बड़ा नाम या IPO का आकार देखकर पैसा लगाना सही रणनीति नहीं होगी. किसी भी IPO में निवेश से पहले कंपनी का कारोबार, मुनाफा, कर्ज, वैल्यूएशन और IPO से जुटाई जाने वाली रकम के इस्तेमाल को समझना जरूरी है.क्योंकि रिकॉर्ड IPO का मतलब यह नहीं है कि हर कंपनी का शेयर लिस्टिंग के बाद भी शानदार रिटर्न देगा.

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Published: November 6, 2026 14:33:07 IST
Last Updated: November 6, 2026 14:33:07 IST

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शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए IPO यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संवत 2082 में भारत के प्राइमरी मार्केट ने फंड जुटाने का नया रिकॉर्ड बना दिया. इस दौरान 129 कंपनियों ने मेनबोर्ड IPO के जरिए कुल 2.12 लाख करोड़ रुपये जुटाए. खास बात यह रही कि इसमें Jio Platforms और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की हिस्सेदारी करीब एक चौथाई रही.

प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, Jio Platforms ने अपने IPO से 30,213 करोड़ रुपये और NSE ने 22,562 करोड़ रुपये जुटाए. इस तरह दोनों कंपनियों ने मिलकर 52,775 करोड़ रुपये का फंड जुटाया. संवत 2082 की शुरुआत 21 अक्टूबर 2025 को हुई थी और यह 4 नवंबर 2026 को समाप्त हुआ.

IPO बाजार में रिकॉर्ड फंड जुटाने के बावजूद सभी कंपनियों के शेयरों की लिस्टिंग शानदार नहीं रही. 129 मेनबोर्ड IPO में से 89 कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के दिन अपने इश्यू प्राइस के बराबर या उससे ऊपर बंद हुए. वहीं, 40 कंपनियों के शेयर इश्यू प्राइस से नीचे रहे. सभी IPO का औसत लिस्टिंग गेन 14.29 फीसदी रहा.

Jio और NSE ने जुटाई कुल रकम की करीब 25% राशि

संवत 2082 में IPO बाजार में सबसे बड़ी चर्चा Jio Platforms और NSE के इश्यू की रही. इन दोनों कंपनियों ने मिलकर 52,775 करोड़ रुपये जुटाए, जो पूरे मेनबोर्ड IPO बाजार से जुटाई गई रकम का करीब 25 फीसदी है.

बाकी 127 कंपनियों ने कुल मिलाकर लगभग 1.59 लाख करोड़ रुपये जुटाए. इससे साफ है कि बड़े और चर्चित कंपनियों के IPO ने बाजार में फंड जुटाने की क्षमता को नई ऊंचाई दी है.

कुल 2.12 लाख करोड़ रुपये में से 99,917 करोड़ रुपये फ्रेश शेयर जारी करके जुटाए गए, जबकि करीब 1.12 लाख करोड़ रुपये ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए आए.

फ्रेश इश्यू में IPO से मिलने वाला पैसा सीधे कंपनी के पास जाता है. कंपनी इस रकम का इस्तेमाल कारोबार बढ़ाने, कर्ज चुकाने या अन्य जरूरतों के लिए कर सकती है. दूसरी तरफ, OFS में कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचते हैं और पैसा उन शेयरधारकों को मिलता है, न कि कंपनी को.

IPO से निवेशकों को कितना मिला फायदा?

IPO बाजार में कंपनियों ने रिकॉर्ड रकम जुटाई, लेकिन निवेशकों को हर इश्यू में मुनाफा नहीं हुआ. आंकड़ों के मुताबिक, 129 मेनबोर्ड IPO में से 89 कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के दिन इश्यू प्राइस से ऊपर या उसके बराबर बंद हुए. वहीं, 40 शेयरों में लिस्टिंग के दिन ही निवेशकों को नुकसान हुआ.

मेनबोर्ड IPO का औसत लिस्टिंग रिटर्न 14.29 फीसदी रहा. यानी कुल मिलाकर लिस्टिंग का प्रदर्शन सकारात्मक रहा, लेकिन अलग-अलग कंपनियों के रिटर्न में काफी अंतर देखने को मिला.

SME IPO बाजार भी इस दौरान काफी सक्रिय रहा. 238 कंपनियों ने SME IPO के जरिए कुल 10,511 करोड़ रुपये जुटाए. इनमें से 140 कंपनियों के शेयर लिस्टिंग के दिन इश्यू प्राइस के ऊपर या बराबर रहे, जबकि 98 शेयर नीचे बंद हुए. SME IPO का औसत लिस्टिंग रिटर्न 11.91 फीसदी रहा.

इस तरह मेनबोर्ड और SME सेगमेंट को मिलाकर संवत 2082 में 367 IPO आए और कंपनियों ने कुल 2.22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए.

अगले साल IPO बाजार में आएगी और तेजी?

संवत 2083 में भी IPO बाजार में काफी हलचल रहने की उम्मीद है. कंपनियों की लंबी कतार इसका संकेत दे रही है. 30 अक्टूबर 2026 तक 238 कंपनियां IPO के जरिए बाजार से पैसा जुटाने की तैयारी में थीं. इन कंपनियों के प्रस्तावित इश्यू का कुल आकार करीब 4.3 लाख करोड़ रुपये है.

इनमें से 116 कंपनियों को SEBI से IPO लाने की मंजूरी मिल चुकी है. इनके प्रस्तावित इश्यू की कुल वैल्यू करीब 1,99,830 करोड़ रुपये है. वहीं, 122 कंपनियों ने SEBI के पास अपने ऑफर डॉक्यूमेंट जमा कराए हैं और उन्हें नियामकीय मंजूरी का इंतजार है.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये सभी कंपनियां अगले संवत में IPO लेकर आएंगी. IPO लॉन्च करने का फैसला बाजार की स्थिति, कंपनी की वैल्यूएशन, नियामकीय मंजूरी और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगा.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

भारत के IPO बाजार में रिकॉर्ड फंड जुटना देश की कंपनियों और कैपिटल मार्केट के बढ़ते आकार को दिखाता है. Jio Platforms और NSE जैसे बड़े इश्यू ने बाजार को नई ऊंचाई दी है. वहीं, 4.3 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित IPO पाइपलाइन बताती है कि आने वाले समय में निवेशकों के पास नए निवेश विकल्पों की कमी नहीं होगी.

लेकिन निवेशकों के लिए सिर्फ किसी कंपनी का बड़ा नाम या IPO का आकार देखकर पैसा लगाना सही रणनीति नहीं होगी. किसी भी IPO में निवेश से पहले कंपनी का कारोबार, मुनाफा, कर्ज, वैल्यूएशन और IPO से जुटाई जाने वाली रकम के इस्तेमाल को समझना जरूरी है.क्योंकि रिकॉर्ड IPO का मतलब यह नहीं है कि हर कंपनी का शेयर लिस्टिंग के बाद भी शानदार रिटर्न देगा.

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