Womens Champions Trophy 2027: श्रीलंका क्रिकेट के लिए मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. मैदान पर लगातार कमजोर प्रदर्शन और प्रशासनिक विवादों के बीच अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने देश को एक और बड़ा झटका दिया है. साल 2027 में होने वाली पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी अब श्रीलंका में नहीं होगी. ICC ने टूर्नामेंट की मेजबानी उससे छीन ली है. खास बात यह है कि इस फैसले का असर केवल श्रीलंका के आयोजन पर ही नहीं, बल्कि उसकी महिला क्रिकेट टीम की टूर्नामेंट में भागीदारी पर भी पड़ सकता है.
सरकार की दखलंदाजी बनी बड़ी वजह
ICC के नियमों के मुताबिक किसी भी देश के क्रिकेट बोर्ड को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए और उसमें सरकार का सीधा हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए. श्रीलंका क्रिकेट में इसी नियम को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है. इस साल अप्रैल में श्रीलंका सरकार ने क्रिकेट बोर्ड को अस्थायी तौर पर अपने नियंत्रण में लेते हुए एक ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी को क्रिकेट बोर्ड के कामकाज की जिम्मेदारी दी गई. ICC ने इस पर आपत्ति जताते हुए श्रीलंका से जल्द से जल्द चुनाव कराकर स्वतंत्र क्रिकेट बोर्ड बहाल करने को कहा था. हालांकि, ICC की आपत्ति के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ. इसके बाद क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था ने सख्त कदम उठाते हुए 2027 महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी श्रीलंका से वापस लेने का फैसला किया.
14 से 28 फरवरी तक होना है टूर्नामेंट
पहली महिला चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन 14 से 28 फरवरी 2027 के बीच प्रस्तावित है. यह छह टीमों का टूर्नामेंट होगा और इसकी मेजबानी श्रीलंका को मिली थी. अब प्रतियोगिता किसी दूसरे देश में आयोजित की जाएगी. श्रीलंका क्रिकेट की ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सचिव प्रकाश शाफ्टर ने भी इस बात की पुष्टि की है कि टूर्नामेंट की मेजबानी श्रीलंका से छीन ली गई है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि टूर्नामेंट का नया आयोजन स्थल कौन सा देश होगा. इस पर ICC की अगली बोर्ड बैठक में फैसला होने की उम्मीद है.
पहले भी भुगत चुका है श्रीलंका
श्रीलंका क्रिकेट में सरकार की दखलंदाजी का यह पहला मामला नहीं है, जिसकी वजह से देश को किसी बड़े क्रिकेट आयोजन से हाथ धोना पड़ा हो. 2023-24 में भी ICC ने श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को निलंबित कर दिया था उस समय भी बोर्ड के कामकाज में सरकारी हस्तक्षेप को लेकर विवाद हुआ था. इसके बाद 2024 पुरुष अंडर-19 विश्व कप की मेजबानी भी श्रीलंका से छीन ली गई थी. उस टूर्नामेंट को बाद में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित किया गया. ऐसे में महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी छिनना श्रीलंका क्रिकेट के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है.
अब श्रीलंका की महिला टीम के सामने भी बड़ा सवाल
मेजबानी जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल श्रीलंका की महिला टीम को लेकर खड़ा हो गया है. दरअसल, टूर्नामेंट में मेजबान देश को सीधे प्रवेश मिलने की व्यवस्था थी. इसके अलावा शीर्ष रैंकिंग वाली टीमों को भी प्रतियोगिता में जगह मिलनी थी. फिलहाल श्रीलंका की महिला टीम रैंकिंग में छठे स्थान पर बताई जा रही है. ऐसे में अगर मेजबान होने के आधार पर मिलने वाली सीधी एंट्री खत्म हो जाती है तो टीम की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मेजबानी छिनने के बाद श्रीलंका को मेजबान के तौर पर मिली जगह बरकरार रहेगी या उसकी एंट्री केवल रैंकिंग के आधार पर तय होगी. ICC की अगली बैठक में टूर्नामेंट के नए मेजबान के साथ-साथ इससे जुड़े अन्य पहलुओं पर भी स्थिति साफ हो सकती है.
श्रीलंका क्रिकेट के लिए बढ़ती मुश्किलें
एक समय विश्व क्रिकेट की मजबूत टीमों में शामिल रहा श्रीलंका पिछले कुछ वर्षों में लगातार संघर्ष करता नजर आया है. दिग्गज खिलाड़ियों के संन्यास के बाद टीम उस स्तर पर वापसी नहीं कर सकी, जिसके लिए वह जानी जाती थी. अब मैदान पर प्रदर्शन के साथ-साथ बोर्ड का प्रशासनिक संकट भी श्रीलंका क्रिकेट की मुश्किलें बढ़ा रहा है. महिला चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी छिनना इसी संकट की एक और बड़ी कड़ी बन गया है. आने वाले समय में श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड और सरकार के बीच स्थिति किस तरह सुलझती है, इस पर उसकी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी.