नई दिल्ली. ग्रीन डॉट बॉल इनिशिएटिव (Green Dot Ball Initiative) इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में कई सालों से जारी है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और टाटा ग्रुप की साझेदारी से शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है, इसके तहत IPL मैचों में फेंकी गई हर “डॉट बॉल” को देशभर में पेड़ लगाने के अभियान से जोड़ा गया है. आइए जानते हैं ये क्या है और इससे इंसानों को कैसे सुरक्षित रखा जा सकेगा.
क्रिकेट में डॉट बॉल उस गेंद को कहा जाता है जिस पर बल्लेबाज कोई रन नहीं बना पाता. इस इको-फ्रेंडली अभियान के तहत IPL में फेंकी गई हर डॉट बॉल के बदले भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पेड़ लगाए जाते हैं. इस अभियान के तहत कहा गया है कि हर डॉट गेंद पर कुल 500 पेड़ लगाए जाएंगे. यानी कि अगर किसी मैच में 10 डॉट बॉल फेंकी गई तो कुल 5000 पेड़ लगाए जाएंगे.
आईपीएल दे रहा पर्यावरण संरक्षण में योगदान
यह कॉन्सेप्ट टाटा ग्रुप की व्यापक सस्टेनेबिलिटी विजन के तहत लॉन्च किया गया था और खेल तथा सामाजिक जिम्मेदारी के अनोखे मेल के कारण इसे काफी सराहना मिली. लाइव IPL प्रसारण के दौरान ग्रीन ग्राफिक्स और विशेष ऑन-स्क्रीन संकेतकों के जरिए डॉट बॉल को हाइलाइट किया जाता है, ताकि दर्शकों को यह बताया जा सके कि हर ऐसी गेंद पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रही है. हालांकि, इसे ज्यादातर प्लेऑफ मैचों के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
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खिलाड़ी और पूर्व क्रिकेटर्स ने भी सराहा
BCCI ने इस अभियान को पूरा समर्थन दिया है और IPL के मंच का उपयोग जलवायु और सस्टेनेबिलिटी का संदेश फैलाने के लिए किया है. दुनिया की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली खेल लीगों में शामिल IPL के जरिए अधिकारियों का मानना है कि यह पहल युवाओं और क्रिकेट प्रेमियों को पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक बनाएगी. खिलाड़ियों और कमेंटेटर्स ने भी इस पहल की सराहना की है और मैचों के दौरान इसका उल्लेख करते हुए लीग की प्रशंसा की है. सोशल मीडिया पर फैंस ने भी उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया दी है, जहां डॉट बॉल अब सिर्फ खेल का अहम हिस्सा नहीं बल्कि पर्यावरणीय योगदान का प्रतीक भी बन गई है.