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Home > धर्म > क्या आप भी गलत दिन करने जा रहे हैं वैशाख अमावस्या कि पूजा? जान लिजिए सही तिथि और जरूरी नियम

क्या आप भी गलत दिन करने जा रहे हैं वैशाख अमावस्या कि पूजा? जान लिजिए सही तिथि और जरूरी नियम

Amavasya Kab hai:  सनातन परंपरा में अमावस्या के दिन का अपना एक खास महत्व होता है ,वैशाख के महीने  में आने वाली अमावस्या दान और स्नान के लिए खास मानी जाती है,लेकिन इस बार लोग वैशाख अमावस्या की तिथि को लेकर भ्रम  में हैं,आइए जानते हैं सही तिथि और जरूरी नियम के बारे में.

Written By: Shivashakti narayan singh
Last Updated: April 15, 2026 12:43:02 IST

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Amavasya Kab hai: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है, लेकिन वैशाख महीने की अमावस्या को सबसे अधिक पुण्य देने वाली तिथियों में गिना जाता है. यह दिन आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और पितरों को स्मरण करने के लिए बेहद खास माना जाता है. साल 2026 में वैशाख अमावस्या को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन जरूर है कि यह 16 अप्रैल को है या 17 अप्रैल को.

वैशाख अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता जताने और समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करने का अवसर भी है. यह हमें सेवा, दया और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देती है.

वैशाख अमावस्या 2026 की सही तारीख

पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 की रात 8:11 बजे से होगी और इसका समापन 17 अप्रैल की शाम 5:21 बजे होगा. हिंदू परंपरा में किसी भी व्रत और पूजा का महत्व सूर्योदय की तिथि के आधार पर तय किया जाता है. इसी कारण 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को वैशाख अमावस्या मनाना अधिक शुभ माना जाएगा.

वैशाख अमावस्या का धार्मिक महत्व

वैशाख अमावस्या को आत्मशुद्धि और पुण्य कमाने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है. इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान की आराधना करने और दान देने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और कष्ट दूर होते हैं.

स्नान और दान का महत्व

वैशाख मास को वैसे भी स्नान और दान का महीना माना जाता है, इसलिए इस अमावस्या पर इसका महत्व और बढ़ जाता है. सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करना या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना और भगवान विष्णु का स्मरण करना लाभकारी बताया गया है.दान के रूप में जल से भरा घड़ा, कपड़े, अनाज, गुड़, तिल, सत्तू या जरूरतमंदों को भोजन कराना पुण्यदायी माना गया है. खासकर गर्मी के मौसम में जलदान को अत्यंत श्रेष्ठ दान कहा गया है.

क्या करें और क्या न करें

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, पूजा और दान करना शुभ होता है. साथ ही, क्रोध, विवाद, अपशब्द और नकारात्मक सोच से दूर रहने की सलाह दी जाती है. तामसिक भोजन से बचना और सादा जीवन अपनाना बेहतर माना गया है. कुछ लोग इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा कर दीपक भी जलाते हैं, जिसे पितरों की कृपा से जोड़ा जाता है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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Last Updated: April 15, 2026 12:43:02 IST

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Amavasya Kab hai: हिंदू पंचांग में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है, लेकिन वैशाख महीने की अमावस्या को सबसे अधिक पुण्य देने वाली तिथियों में गिना जाता है. यह दिन आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य और पितरों को स्मरण करने के लिए बेहद खास माना जाता है. साल 2026 में वैशाख अमावस्या को लेकर लोगों में थोड़ी उलझन जरूर है कि यह 16 अप्रैल को है या 17 अप्रैल को.

वैशाख अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठान का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता जताने और समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करने का अवसर भी है. यह हमें सेवा, दया और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देती है.

वैशाख अमावस्या 2026 की सही तारीख

पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 की रात 8:11 बजे से होगी और इसका समापन 17 अप्रैल की शाम 5:21 बजे होगा. हिंदू परंपरा में किसी भी व्रत और पूजा का महत्व सूर्योदय की तिथि के आधार पर तय किया जाता है. इसी कारण 17 अप्रैल 2026, शुक्रवार को वैशाख अमावस्या मनाना अधिक शुभ माना जाएगा.

वैशाख अमावस्या का धार्मिक महत्व

वैशाख अमावस्या को आत्मशुद्धि और पुण्य कमाने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है. इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान की आराधना करने और दान देने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और कष्ट दूर होते हैं.

स्नान और दान का महत्व

वैशाख मास को वैसे भी स्नान और दान का महीना माना जाता है, इसलिए इस अमावस्या पर इसका महत्व और बढ़ जाता है. सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान करना या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना और भगवान विष्णु का स्मरण करना लाभकारी बताया गया है.दान के रूप में जल से भरा घड़ा, कपड़े, अनाज, गुड़, तिल, सत्तू या जरूरतमंदों को भोजन कराना पुण्यदायी माना गया है. खासकर गर्मी के मौसम में जलदान को अत्यंत श्रेष्ठ दान कहा गया है.

क्या करें और क्या न करें

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान, पूजा और दान करना शुभ होता है. साथ ही, क्रोध, विवाद, अपशब्द और नकारात्मक सोच से दूर रहने की सलाह दी जाती है. तामसिक भोजन से बचना और सादा जीवन अपनाना बेहतर माना गया है. कुछ लोग इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा कर दीपक भी जलाते हैं, जिसे पितरों की कृपा से जोड़ा जाता है.

  Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

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