Kurma Jayanti 2026: 1 मई को पूरे देश में वैशाख पूर्णिमा की धूम है. लोग पूरी श्रद्धा के साथ स्नान-दान और पूजन कर पुण्य पाने की कोशिश कर रहे हैं. मान्यता है कि इस दिन श्रीहरि ने कूर्म यानी कच्छप और बुद्ध अवतार लिया था. इसके कारण इस दिन बुद्ध जयंती और कूर्म जयंती दोनों मनाई जाती हैं. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के लिए कूर्म अवतार लिया था. इसके कारण इस दिन भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की पूजा की जाती है.
Kurma Jayanti 2026: क्या है पूजा का शुभ समय?
वैदिक पंचांग के अनुसार, 1 मई को वैशाख पूर्णिमा पर कूर्म जयंती मनाई जा रही है. कूर्म जयंती के दिन पूजा के लिए शाम 04:17 बजे से साम 06:56 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा. इस समय के बीच आप कभी भी पूजा कर सकते हैं. हालांकि ध्यान रखें कि पूजा से पहले स्नान कर साफ-शुद्ध कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान विष्णु के कूर्म अवतार की मूर्ति या फोटो रखें. ये मूर्ति उत्तर-पूर्व दिशा में चौकर रखकर, उसपे पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उस पर स्थापित करें.
कैसे करें कूर्म अवतार की पूजा?
पूजा करने से पहले मूर्ति के सामने घी के दीपक जलाएं और पूजा करते समय संकल्प लें. इसके बाद गंगाजल से मूर्ति का अभिषेक करें. इसके बाद मूर्ति पर चंदन लगाएं, पीले फूल चढ़ाएं. साथ ही चावल के अक्षत, तुलसी पत्र, नैवेद्य और भोग चढ़ाएं. अब भगवान कूर्म अवतार की कथा पढ़कर ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र’ का जाप करें. अब अंत में आरती पढ़कर पूजा संपन्न करें और प्रसाद ग्रहण करें. अपने आसपास के लोगों में भी प्रसाद वितरण करें.
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क्या है कूर्म अवतार की कहानी?
भगवान विष्णु का कूर्म अवतार यानी कछुआ अवतार उनके दस अवतारों में से एक है, जो दूसरे नंबर पर आता है. उनका ये अवतार समुद्र मंथन के समय देवताओं और असुरों की मदद करने के लिए प्रकट हुआ था. समुद्र मंथन के दौरान जब मंदराचल पर्वत डूबने लगा, तब भगवान विष्णु ने विशाल कछुए का रूप धारण कर लिया. उन्होंने उस पर्वत को अपनी पीठ पर संभाला. इससे अमृत प्राप्ति संभव हो सकी.