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Premanand Maharaj Ghost Story: क्या सच में भूत होते हैं? इस विषय पर लोककथाओं और विज्ञान के बीच आजकल एक बड़ी बहस चल रही है. जहां कुछ लोग इस बात को महज़ अंधविश्वास कहकर खारिज कर देते हैं, वहीं कुछ लोग उनके अस्तित्व के पक्के सबूत होने का दावा करते हैं. वहीं अब प्रेमानंद महाराज ने इस विषय पर अपनी राय रखी हैं.
प्रेमानंद महाराज का कहना है कि वृंदावन में कई बार उनका भूतों से सामना हुआ है. असल में, प्रेमानंद महाराज का एक नया वीडियो हाल ही में सामने आया है, जिसमें वे वृंदावन में अलग-अलग तरह के भूतों को देखने के किस्से सुना रहे हैं. इसके अलावा, प्रेमानंद महाराज ने इन भूतों के शारीरिक रूप-रंग का भी ब्योरा दिया है.
भूतों के बारे में प्रेमानंद महाराज ने क्या बताया?
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि चाहे किसी ने आत्महत्या की हो या किसी दुर्घटना में उसकी जान चली गई हो, वृंदावन में हमारा ऐसे कई भूतों से सामना हुआ है. असल में, वे आध्यात्मिक मुक्ति की तलाश में संतों के पास आते हैं. ऐसे कई भूत भगवान भूतेश्वर महादेव के अधीन रहते हैं, जिनका मंदिर मथुरा में स्थित है. इस बात की पुष्टि करने वाले कई सबूत भी मिले हैं.
विजय गोस्वामी नाम के एक व्यक्ति का उदाहरण देते हुए, प्रेमानंद महाराज ने एक घटना सुनाई कि एक बार, जब वे परिक्रमा कर रहे थे, तो पास में ही कुछ संत भंडारा (सामुदायिक भोज) आयोजित कर रहे थे. संतों ने उन्हें प्रसाद (पवित्र भोजन) ग्रहण करने के लिए आमंत्रित किया. लेकिन, गोस्वामी जी ने उनसे विनती की, ‘कृपया मेरा प्रसाद मेरे लिए पैक कर दीजिए; मैं इसे बाद में खा लूंगा.’ जब वे घर लौटे और प्रसाद का पैकेट खोला, तो उन्होंने पाया कि उसमें अभक्ष्य पदार्थ यानी, ऐसे पदार्थ थे जो सनातन परंपरा में वर्जित हैं या जिन्हें खाने योग्य नहीं माना जाता. अगले दिन, जब वे उसी जगह पर वापस गए, तो उन्हें फिर से वही संत मिले. तब गोस्वामी जी ने उनसे पूछा, आपका प्रसाद खाने योग्य क्यों नहीं था? उन्होंने जवाब दिया, बाहर से देखने में हम संत लग सकते हैं, लेकिन असल में, हम भूत बन चुके हैं.
प्रेमानंद महाराज ने बताई एक और कहानी
प्रेमानंद महाराज ने एक और ऐसी ही कहानी सुनाई कि एक बार, भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार समुद्र के किनारे बैठे हुए थे. एक आदमी उनके पास आया और काफी देर तक वहीं खड़ा रहा. भाईजी ने उसे देखा और कहा, ‘महाशय, कृपया बैठ जाइए.’ उस आदमी ने उनकी ओर मुड़कर जवाब दिया, ‘मुझसे डरिए मत.’ भाईजी हैरान रह गए और पूछा, भला मैं तुमसे क्यों डरूंगा? तब उस आदमी ने बताया, मैं इंसान नहीं हूं; मैं एक भूत हूं. भाईजी ने फिर पूछा, अगर तुम भूत हो, तो तुमने इतने शानदार कपड़े क्यों पहने हैं? उस आदमी ने समझाया, भूत भी अलग-अलग श्रेणियों या दर्जों के होते हैं.
भूत दिखते कैसे हैं?
जब प्रेमानंद महाराज यह देखते हुए कि वे श्मशान घाटों में भी रह चुके हैं से पूछा गया कि क्या उनका कभी भूतों से सामना हुआ है, तो उन्होंने जवाब दिया, हां; असल में, मेरी पूजा और भक्ति हमेशा भूतेश्वर महादेव को समर्पित रही है. लोग तो भूत का नाम सुनते ही कांप उठते हैं, लेकिन वे अपने ही शरीर को देखना भूल जाते हैं, जो पंचभूतों (पांच मूल तत्वों) से बना है. प्रेमानंद महाराज ने समझाया कि भूतों का रूप और आकार लगातार बदलता रहता है. एक पल वे किसी स्त्री के वेश में दिख सकते हैं, और ठीक अगले ही पल, वे कोई भयानक और डरावना रूप धारण कर सकते हैं. एक पल वे घिनौने लग सकते हैं, और अगले ही पल, वे कोई सुंदर रूप धारण कर सकते हैं.
भूतों की दुनिया में कितना कष्ट होता है?
प्रेमानंद महाराज ने समझाया कि भूतों की दुनिया अस्तित्व की एक अत्यंत कष्टदायक अवस्था है. उनके चारों ओर नदियां बह रही हो सकती हैं, फिर भी वे पानी की एक बूंद भी नहीं पी सकते; न ही वे भोजन का एक छोटा सा निवाला भी खा सकते हैं. जब उनका सामना किसी दुष्ट या पापी इंसान से होता है, तो वे पानी या भोजन पाने के लिए उस व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. हालांकि, जब वे संतों के सामने आते हैं, तो वे ऐसा केवल अपनी मुक्ति पाने के लिए करते हैं.