Ganesh Festival 2026: गणेश चतुर्थी के साथ ही देशभर में गणपति बप्पा के स्वागत की तैयारियां तेज हो गई हैं. इस साल गणेश महोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से होगी और अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को होगी. गुजरात के सूरत में भी गणेशोत्सव को खास बनाने के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. शहर के वेसू इलाके में इस बार भगवान गणेश के लिए ऐसा भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है, जिसे देखकर श्रद्धालुओं को राजा के दरबार का अहसास होगा. लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव समिति की ओर से करीब 40 हजार वर्ग वार क्षेत्र में विशाल महलनुमा पंडाल बनाया जा रहा है. इस आयोजन की सबसे खास बात यहां स्थापित होने वाली 22 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा है. प्रतिमा को तैयार करने में करीब 700 किलोग्राम टिश्यू पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है. आयोजकों के मुताबिक, इसका मकसद प्रतिमा को अपेक्षाकृत हल्का रखने के साथ पर्यावरण के अनुकूल स्वरूप देना है.
40 हजार वर्ग वार में तैयार हो रहा बप्पा का भव्य दरबार
वेसू इलाके में तैयार हो रहा यह पंडाल अपने विशाल आकार और महल जैसी डिजाइन की वजह से पहले ही लोगों का ध्यान खींच रहा है. पंडाल को तैयार करने में आयोजक और कारीगर दिन-रात जुटे हुए हैं. समिति ने इस बार गणपति उत्सव की थीम ‘राजा का दरबार’ रखी है. आयोजकों का कहना है कि जब गणपति को राजा माना जाता है तो उनका दरबार भी उसी भव्यता के साथ सजना चाहिए. इस पूरे आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ भव्यता का भी खास ध्यान रखा जा रहा है. विशाल पंडाल और 22 फीट की प्रतिमा गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बनने वाली है.
700 किलो टिश्यू पेपर से तैयार होगी 22 फीट की गणेश प्रतिमा
इस बार बप्पा की प्रतिमा को खास तरीके से तैयार किया जा रहा है. करीब 22 फीट ऊंची प्रतिमा बनाने में लगभग 700 किलोग्राम टिश्यू पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है. समिति का कहना है कि टिश्यू पेपर से प्रतिमा तैयार करने से इसे अपेक्षाकृत हल्का और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है. आयोजक पूजा ने बताया कि मंडल की कोशिश है कि गणेश उत्सव में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया जाए. उनका कहना है कि गणेशजी की पूजा करीब 10-11 दिनों तक की जाती है और विसर्जन के दौरान प्रतिमा खंडित हो जाती है. इसी सोच के साथ समिति ने इको-फ्रेंडली टिश्यू पेपर की प्रतिमा तैयार करने का फैसला लिया.
10 दिन भक्ति, भजन और धार्मिक कार्यक्रमों से गूंजेगा पंडाल
गणेश उत्सव को सिर्फ प्रतिमा स्थापना और दर्शन तक सीमित नहीं रखा जाएगा. 10 दिनों के दौरान पंडाल में अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसके अलावा विभिन्न गायकों को आमंत्रित कर धार्मिक गीत और भजनों की संगीतमय प्रस्तुतियां भी कराई जाएंगी. ऐसे में श्रद्धालुओं को एक ही जगह भगवान गणेश के दर्शन के साथ भक्ति संगीत का अनुभव भी मिलेगा. आयोजकों की कोशिश है कि पूरा उत्सव धार्मिक आस्था, संस्कृति और सामूहिक सहभागिता का केंद्र बने.
वृद्धाश्रम और शेल्टर होम के लोगों को भी उत्सव में बुलाएंगे
समिति ने गणेशोत्सव को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने की भी तैयारी की है. उत्सव के दौरान वृद्धाश्रम और शेल्टर होम में रहने वाले बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाएगा. उनके सम्मान के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. आयोजकों का कहना है कि उत्सव की खुशियां सिर्फ पंडाल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. समाज के ऐसे लोगों तक भी त्योहार की खुशी पहुंचनी चाहिए, जो किसी कारण से अपने परिवार से दूर रह रहे हैं. इसी सोच के साथ धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और सम्मान को भी इस बार उत्सव का हिस्सा बनाया गया है.
गणपति हमारे राजा हैं, इसलिए उनका दरबार भी वैसा ही होना चाहिए’
लोकमान्य तिलक गणेश उत्सव समिति की आयोजक पूजा ने बताया कि समिति पहली बार मिलकर गणेश उत्सव का आयोजन कर रही है. उन्होंने कहा कि गणपति उनके लिए राजा के समान हैं और इसी वजह से पंडाल की थीम भी राजा के दरबार पर आधारित रखी गई है. उनके मुताबिक, इस बार 22 फीट की इको-फ्रेंडली टिश्यू पेपर की प्रतिमा तैयार की जा रही है. समिति का मानना है कि आस्था के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी जरूरी है. इसी वजह से प्रतिमा को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी लोगों तक पहुंचे.