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Home > Education > DU से ग्रेजुएट, बचपन से पढ़ाई में अव्वल, अब 20 लाख के पैकेज को ठुकराकर चुना यह रास्ता, लोग हो गए सन

DU से ग्रेजुएट, बचपन से पढ़ाई में अव्वल, अब 20 लाख के पैकेज को ठुकराकर चुना यह रास्ता, लोग हो गए सन

Inspiring Story: हरियाणा की एक लड़की ने 20 लाख सालाना नौकरी छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग चुना. भौतिक सफलता के दौर में उनका यह फैसला परिवार और समाज के लिए चौंकाने वाला है, लेकिन प्रेरणादायक बन गया.

Written By: Munna Kumar
Last Updated: April 15, 2026 13:49:54 IST

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Inspiring Story: आज के दौर में जहां युवा बेहतर करियर, ऊंची सैलरी और ग्लैमरस लाइफस्टाइल की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं हरियाणा के नारनौल की पलक (Palak) ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है. करीब 20 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी को छोड़कर उन्होंने आध्यात्मिक जीवन अपनाने का निर्णय लिया है. उनका यह कदम न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है.

रविवार सुबह लगभग 9 बजे पलक ने अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से विदा ली और दिल्ली के लिए रवाना हो गईं. 23 अप्रैल को वह जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण करेंगी. यह क्षण उनके जीवन का एक नया अध्याय होगा, जहां से वह सांसारिक जीवन को त्यागकर तप और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ेंगी.

पढ़ाई में अव्वल, करियर में शानदार शुरुआत

पलक शुरू से ही पढ़ाई में बेहद होनहार रही हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से गणित ऑनर्स में टॉप किया. उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के दम पर उन्हें हाल ही में एक प्रतिष्ठित कंपनी में लगभग 20 लाख रुपये सालाना पैकेज की नौकरी मिली थी. आमतौर पर ऐसे मौके युवाओं के लिए सपने पूरे होने जैसा होते हैं, लेकिन पलक ने इससे अलग राह चुनी.

क्यों चुना आध्यात्मिक जीवन?

पलक का मानना है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है, और इसके लिए आत्मसंयम, तपस्या और कठोर नियमों का पालन आवश्यक है. उन्होंने भौतिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर आत्मिक शांति और सत्य की खोज को प्राथमिकता दी. यही सोच उन्हें इस आध्यात्मिक मार्ग पर ले आई।

गुरु के सानिध्य में लेंगी दीक्षा

श्वेतांबर स्थानकवासी जैन सभा के अनुसार, पलक ने जैन दीक्षा लेने का निर्णय पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ लिया है. वह गुरुनी भाग्यप्रभा महाराज के सानिध्य में पहुंच चुकी हैं. 23 अप्रैल को उनकी दीक्षा विधि पूरी होगी, जिसके बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल जाएगा.

दीक्षा के बाद एक वर्ष का मौन और कठोर साधना

दीक्षा के बाद पलक एक वर्ष तक मौन व्रत का पालन करेंगी और जैन आगमों का गहन अध्ययन करेंगी. इस दौरान उन्हें बेहद अनुशासित और त्यागपूर्ण जीवन जीना होगा. श्वेतांबर स्थानकवासी परंपरा में साध्वी जीवन कठिन नियमों और संयम का प्रतीक माना जाता है.

युवाओं के लिए एक अलग प्रेरणा

पलक की कहानी आज के युवाओं के लिए एक अनोखी प्रेरणा है. जहां अधिकतर लोग भौतिक सफलता को जीवन का लक्ष्य मानते हैं, वहीं उन्होंने आत्मिक शांति और मोक्ष को अपनी प्राथमिकता बनाया. 

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Inspiring Story: आज के दौर में जहां युवा बेहतर करियर, ऊंची सैलरी और ग्लैमरस लाइफस्टाइल की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं हरियाणा के नारनौल की पलक (Palak) ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है. करीब 20 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी को छोड़कर उन्होंने आध्यात्मिक जीवन अपनाने का निर्णय लिया है. उनका यह कदम न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है.

रविवार सुबह लगभग 9 बजे पलक ने अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से विदा ली और दिल्ली के लिए रवाना हो गईं. 23 अप्रैल को वह जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण करेंगी. यह क्षण उनके जीवन का एक नया अध्याय होगा, जहां से वह सांसारिक जीवन को त्यागकर तप और साधना के मार्ग पर आगे बढ़ेंगी.

पढ़ाई में अव्वल, करियर में शानदार शुरुआत

पलक शुरू से ही पढ़ाई में बेहद होनहार रही हैं. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से गणित ऑनर्स में टॉप किया. उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के दम पर उन्हें हाल ही में एक प्रतिष्ठित कंपनी में लगभग 20 लाख रुपये सालाना पैकेज की नौकरी मिली थी. आमतौर पर ऐसे मौके युवाओं के लिए सपने पूरे होने जैसा होते हैं, लेकिन पलक ने इससे अलग राह चुनी.

क्यों चुना आध्यात्मिक जीवन?

पलक का मानना है कि जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति है, और इसके लिए आत्मसंयम, तपस्या और कठोर नियमों का पालन आवश्यक है. उन्होंने भौतिक सुख-सुविधाओं को त्यागकर आत्मिक शांति और सत्य की खोज को प्राथमिकता दी. यही सोच उन्हें इस आध्यात्मिक मार्ग पर ले आई।

गुरु के सानिध्य में लेंगी दीक्षा

श्वेतांबर स्थानकवासी जैन सभा के अनुसार, पलक ने जैन दीक्षा लेने का निर्णय पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ लिया है. वह गुरुनी भाग्यप्रभा महाराज के सानिध्य में पहुंच चुकी हैं. 23 अप्रैल को उनकी दीक्षा विधि पूरी होगी, जिसके बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल जाएगा.

दीक्षा के बाद एक वर्ष का मौन और कठोर साधना

दीक्षा के बाद पलक एक वर्ष तक मौन व्रत का पालन करेंगी और जैन आगमों का गहन अध्ययन करेंगी. इस दौरान उन्हें बेहद अनुशासित और त्यागपूर्ण जीवन जीना होगा. श्वेतांबर स्थानकवासी परंपरा में साध्वी जीवन कठिन नियमों और संयम का प्रतीक माना जाता है.

युवाओं के लिए एक अलग प्रेरणा

पलक की कहानी आज के युवाओं के लिए एक अनोखी प्रेरणा है. जहां अधिकतर लोग भौतिक सफलता को जीवन का लक्ष्य मानते हैं, वहीं उन्होंने आत्मिक शांति और मोक्ष को अपनी प्राथमिकता बनाया. 

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