Evergreen Bollywood Songs: हिंदी फिल्मों में कई ऐसे गाने रहे हैं, जिनकी धुन सीधे देश की मिट्टी और लोक संगीत से जुड़ी रही है. अलग-अलग राज्यों की लोक परंपराओं ने बॉलीवुड के संगीत को कई यादगार गीत दिए हैं. ऐसा ही एक गीत 1993 में आई फिल्म ‘रुदाली’ में सुनने को मिला था. डिंपल कपाड़िया पर फिल्माया गया ‘दिल हूम हूम करे’ गाना आज भी लोगों को काफी पसंद आता है.
इस गाने की खासियत सिर्फ इसकी खूबसूरत धुन या लता मंगेशकर की आवाज नहीं है. इसके पीछे असम के पारंपरिक लोक संगीत बिहू से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी भी है.
असम के मशहूर गीत से जुड़ा है कनेक्शन
दिल हूम हूम करे गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी. यह गाना असम के मशहूर गायक और संगीतकार डॉ. भूपेन हजारिका के प्रसिद्ध असमिया गीत ‘बुकु हूम-हूम कोरे’ से प्रेरित बताया जाता है. आईएमडीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, रुदाली का यह गीत भूपेन हजारिका के इसी असमिया गीत से जुड़ा हुआ है. खास बात यह है कि हिंदी वर्जन में भी भूपेन हजारिका ने लता मंगेशकर के साथ मिलकर इसे गाया था. यानी इस गीत में असम की लोक संगीत परंपरा और हिंदी फिल्म संगीत का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है.
भूपेन हजारिका ने दिया था संगीत
इस गाने की धुन को तैयार करने में भी भूपेन हजारिका की अहम भूमिका रही. उन्होंने इसके संगीत को असमिया मूल गीत की धुन से जोड़े रखा. वहीं, हिंदी वर्जन के बोल मशहूर गीतकार गुलजार ने लिखे थे. इस तरह भूपेन हजारिका की संगीत विरासत, लता मंगेशकर की आवाज और गुलजार के शब्दों ने मिलकर दिल हूम हूम करे को एक अलग पहचान दी.
डिंपल कपाड़िया का देसी अंदाज
गाने के वीडियो में डिंपल कपाड़िया का अंदाज भी काफी खास नजर आता है. वह इसमें राजस्थानी महिला की वेशभूषा में दिखाई देती हैं. उनके पहनावे और गाने की प्रस्तुति में देसी रंग साफ नजर आता है. इस पहनावे, डांस और गाने के कारण ये गाना सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं बल्कि इसमें अलग-अलग भारतीय लोक संस्कृतियों की झलक भी दिखाई देती है.