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Home > मनोरंजन > शमशाद बेगम का वो शरारती गाना, जो 72 साल बाद भी लोगों के दिलों पर करता है राज, चंचल अदाओं ने लूटी महफिल

शमशाद बेगम का वो शरारती गाना, जो 72 साल बाद भी लोगों के दिलों पर करता है राज, चंचल अदाओं ने लूटी महफिल

Evergreen Song: बॉलीवुड में बहुत से ऐसे गीत हैं, जिन्हें सुनते ही चेहरे पर एक शरारत भरी मुस्कान आ जाती है. एक गाना 72 सालों बाद भी लोगों के जहन में है, जिसे सुनकर होंठों पर मुस्कुराहट और गाने के बोल खुद-ब-खुद जुबान पर आ जाते हैं.

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Last Updated: August 25, 2026 13:38:58 IST

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Evergreen Song: हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है.  वक्त बदल जाता है, संगीत का अंदाज बदल जाता है लेकिन कुछ गानों की शरारत और उनकी मिठास कभी पुरानी नहीं होती. 1954 में आया एक ऐसा ही गाना आज 72 साल बाद भी लोगों की जुबां पर है. जैसे ही ये गाना कहीं बजने लगता है, तो लोगों के होंठों पर मुस्कुराहट और गाने के बोल आ जाते हैं. इसकी खासियत है इसके चंचल बोल, शरारती अंदाज और शमशाद बेगम की दमदार आवाज. यही वजह है कि आज की पीढ़ी भी इस गाने को सुनती है और इसके बोलों पर झूम उठती है.

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, वो ‘कभी आर कभी पार लागा तीर-ए-नजर’ है. यह मशहूर गीत गुरु दत्त की फिल्म ‘आर-पार’ का है. फिल्म 1954 में रिलीज हुई थी और उस दौर में इस गाने ने खूब धूम मचाई थी.

शरारती बोलों ने बना दिया खास

इस गाने की सबसे बड़ी ताकत इसके बोल हैं. गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने शब्दों को कुछ इस तरह पिरोया कि उनमें शरारत भी है और प्रेम का चुलबुला अंदाज भी. गाना सुनते हुए ऐसा लगता है जैसे कोई अपनी दिलरुबा से मजाकिया अंदाज में छेड़छाड़ कर रहा हो. यही चंचलता इस गाने को बाकी रोमांटिक गीतों से अलग बनाती है. उस दौर में भी यह गाना लोगों को खूब पसंद आया और आज भी इसके बोल युवाओं को आकर्षित करते हैं. खासकर जब किसी को अपने दिल की बात थोड़े शरारती अंदाज में कहनी हो तो इस गीत की लाइनें आज भी काम आ जाती हैं.

शमशाद बेगम की आवाज ने डाल दी जान

इस गीत को अपनी खास आवाज दी थी मशहूर गायिका शमशाद बेगम ने. उनकी आवाज में एक अलग तरह की खनक और दम था. उन्होंने गाने के चंचल मिजाज को इतनी खूबसूरती से पेश किया कि गीत सुनने वाले खुद-ब-खुद इसकी लय में खो जाते हैं. गाने का संगीत ओ.पी. नैयर ने तैयार किया था. यह गीत उनके करियर के शुरुआती बड़े हिट्स में गिना जाता है. कहा जाता है कि इस गाने की सफलता ने ओ.पी. नैयर को हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में एक मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. वहीं शमशाद बेगम के करियर के यादगार गीतों में भी यह गाना शामिल हो गया.

कुमकुम पर फिल्माया गया था गाना

‘कभी आर कभी पार’ को फिल्म में एक्ट्रेस कुमकुम पर फिल्माया गया था. पर्दे पर उनका चुलबुला अंदाज गाने के मूड के साथ खूब मेल खाता है. इस गाने से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा है. गाने के दृश्यों में कुछ बच्चे भी नजर आते हैं. इन्हीं बच्चों में एक चेहरा ऐसा था, जिसे आगे चलकर हिंदी सिनेमा ने एक मशहूर कॉमेडियन के रूप में पहचाना. यह बाल कलाकार कोई और नहीं बल्कि जगदीप थे. उस समय वह बेहद छोटे थे. आगे चलकर जगदीप ने फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई और रमेश सिप्पी की 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ में ‘सूरमा भोपाली’ का किरदार निभाकर अमर हो गए.

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Evergreen Song: हिंदी सिनेमा में कुछ गाने ऐसे हैं, जिन्हें सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है.  वक्त बदल जाता है, संगीत का अंदाज बदल जाता है लेकिन कुछ गानों की शरारत और उनकी मिठास कभी पुरानी नहीं होती. 1954 में आया एक ऐसा ही गाना आज 72 साल बाद भी लोगों की जुबां पर है. जैसे ही ये गाना कहीं बजने लगता है, तो लोगों के होंठों पर मुस्कुराहट और गाने के बोल आ जाते हैं. इसकी खासियत है इसके चंचल बोल, शरारती अंदाज और शमशाद बेगम की दमदार आवाज. यही वजह है कि आज की पीढ़ी भी इस गाने को सुनती है और इसके बोलों पर झूम उठती है.

हम जिस गाने की बात कर रहे हैं, वो ‘कभी आर कभी पार लागा तीर-ए-नजर’ है. यह मशहूर गीत गुरु दत्त की फिल्म ‘आर-पार’ का है. फिल्म 1954 में रिलीज हुई थी और उस दौर में इस गाने ने खूब धूम मचाई थी.

शरारती बोलों ने बना दिया खास

इस गाने की सबसे बड़ी ताकत इसके बोल हैं. गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने शब्दों को कुछ इस तरह पिरोया कि उनमें शरारत भी है और प्रेम का चुलबुला अंदाज भी. गाना सुनते हुए ऐसा लगता है जैसे कोई अपनी दिलरुबा से मजाकिया अंदाज में छेड़छाड़ कर रहा हो. यही चंचलता इस गाने को बाकी रोमांटिक गीतों से अलग बनाती है. उस दौर में भी यह गाना लोगों को खूब पसंद आया और आज भी इसके बोल युवाओं को आकर्षित करते हैं. खासकर जब किसी को अपने दिल की बात थोड़े शरारती अंदाज में कहनी हो तो इस गीत की लाइनें आज भी काम आ जाती हैं.

शमशाद बेगम की आवाज ने डाल दी जान

इस गीत को अपनी खास आवाज दी थी मशहूर गायिका शमशाद बेगम ने. उनकी आवाज में एक अलग तरह की खनक और दम था. उन्होंने गाने के चंचल मिजाज को इतनी खूबसूरती से पेश किया कि गीत सुनने वाले खुद-ब-खुद इसकी लय में खो जाते हैं. गाने का संगीत ओ.पी. नैयर ने तैयार किया था. यह गीत उनके करियर के शुरुआती बड़े हिट्स में गिना जाता है. कहा जाता है कि इस गाने की सफलता ने ओ.पी. नैयर को हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया में एक मजबूत पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई. वहीं शमशाद बेगम के करियर के यादगार गीतों में भी यह गाना शामिल हो गया.

कुमकुम पर फिल्माया गया था गाना

‘कभी आर कभी पार’ को फिल्म में एक्ट्रेस कुमकुम पर फिल्माया गया था. पर्दे पर उनका चुलबुला अंदाज गाने के मूड के साथ खूब मेल खाता है. इस गाने से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा है. गाने के दृश्यों में कुछ बच्चे भी नजर आते हैं. इन्हीं बच्चों में एक चेहरा ऐसा था, जिसे आगे चलकर हिंदी सिनेमा ने एक मशहूर कॉमेडियन के रूप में पहचाना. यह बाल कलाकार कोई और नहीं बल्कि जगदीप थे. उस समय वह बेहद छोटे थे. आगे चलकर जगदीप ने फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई और रमेश सिप्पी की 1975 में आई फिल्म ‘शोले’ में ‘सूरमा भोपाली’ का किरदार निभाकर अमर हो गए.

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