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‘सिर्फ TRP से शो को जज करना गलत’, स्मिता बंसल ने रखी बेबाक राय

Smita Bansal: टीवी अभिनेत्री स्मिता बंसल ने टीआरपी रेटिंग की वैधता पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि टीआरपी किसी शो की सफलता का सटीक आकलन नहीं करती है.

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Last Updated: July 11, 2026 17:20:13 IST

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने हाल ही में ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल को निर्देश दिया है कि जब तक उसे नई टेलीविजन रेटिंग नीति, 2026 के तहत नवीनीकृत लाइसेंस प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक सभी टेलीविजन रेटिंग निलंबित कर दी जाएं. अब टीवी अभिनेत्री स्मिता बंसल इसका सकारात्मक पहलू देख रही हैं. जानिए उन्होंने क्या कहा. 

एक्ट्रेस ने क्या कहा?

‘कहानी घर घर की’, ‘बालिका वधू’ और ‘संजीवनी’ जैसे टीवी शो से चर्चित अभिनेत्री स्मिता बंसल ने एचटी सिटी से बात करते हुए कहा, “टीआरपी का खेल कभी समझ नहीं आया”. अभिनेत्री स्मिता बंसल का कहना है कि उन्हें कभी भी यह विश्वास नहीं हुआ कि यह प्रणाली किसी शो की सफलता का सटीक मापक है. इसे “भ्रामक” बताते हुए, बंसल कहती हैं कि उन्हें “टीआरपी का खेल कभी समझ नहीं आया”, और सवाल उठाती हैं कि कैसे कुछ चुनिंदा घरों के आधार पर लाखों लोगों द्वारा देखे जाने वाले कंटेंट की लोकप्रियता का निर्धारण किया जा सकता है.

रेटिंग में हमेशा संदेह रहा

एक्ट्रेस ने आगे बात करते हुए बोला, ‘मैंने अपने पूरे करियर में रेटिंग सिस्टम पर संदेह किया है, खासकर बेहतरीन शो को उनकी गुणवत्ता के बावजूद असफल होते देखने के बाद.’ अभिनेत्री ने बताया, ‘मैंने कई बेहतरीन शो को टीआरपी न मिलने और समय से पहले बंद होते देखा है. मुझे समझ नहीं आता कि यह किसी शो की सफलता या असफलता को आंकने का सही पैमाना कैसे हो सकता है.’ वह आगे कहती हैं कि टीआरपी को कभी भी एकमात्र मापदंड नहीं बनाना चाहिए. यह निर्णय सही है या गलत, इस पर बहस हो सकती है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि टीआरपी लोकप्रियता का सही मापदंड है. आखिरकार, दर्शक ही तय करते हैं कि कोई शो अच्छा है या बुरा.’

टीआरपी सिस्टम पर उठाया सवाल

स्मिता बंसल ने टीआरपी रेटिंग देने वाले सिस्टम पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ‘ये लोग कौन हैं? किन घरों में ये उपकरण हैं? टेलीविजन के दर्शक पूरे देश में बहुत बड़े पैमाने पर हैं. एक प्रतिशत के आधार पर कैसे तय किया जा सकता है कि क्या चल रहा है? हर शो के अपने दर्शक होते हैं, बच्चे, युवा, बड़े दर्शक. हर शो को एक ही संख्या के आधार पर आंकना मुझे कभी मंजूर नहीं रहा.’ उनके लिए, रेटिंग से मेहनत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता. ‘अगर मेरे शो की टीआरपी कम है, तो मैं किरदार पर कम मेहनत नहीं करूंगी. और ज़्यादा टीआरपी का मतलब यह नहीं है कि मेरा अभिनय बेहतर होगा. एक एक्टर के तौर पर, आप हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं.’ उनके अनुसार, सफलता का असली पैमाना दर्शकों से जुड़ाव है. ‘जब लोग मुझे किसी किरदार की वजह से पहचानते हैं, तो वही लोकप्रियता है. इसी से मैं आंकल करती हूं कि कोई शो चल रहा है या नहीं.’

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एक्ट्रेस ने क्या कहा?

‘कहानी घर घर की’, ‘बालिका वधू’ और ‘संजीवनी’ जैसे टीवी शो से चर्चित अभिनेत्री स्मिता बंसल ने एचटी सिटी से बात करते हुए कहा, “टीआरपी का खेल कभी समझ नहीं आया”. अभिनेत्री स्मिता बंसल का कहना है कि उन्हें कभी भी यह विश्वास नहीं हुआ कि यह प्रणाली किसी शो की सफलता का सटीक मापक है. इसे “भ्रामक” बताते हुए, बंसल कहती हैं कि उन्हें “टीआरपी का खेल कभी समझ नहीं आया”, और सवाल उठाती हैं कि कैसे कुछ चुनिंदा घरों के आधार पर लाखों लोगों द्वारा देखे जाने वाले कंटेंट की लोकप्रियता का निर्धारण किया जा सकता है.

रेटिंग में हमेशा संदेह रहा

एक्ट्रेस ने आगे बात करते हुए बोला, ‘मैंने अपने पूरे करियर में रेटिंग सिस्टम पर संदेह किया है, खासकर बेहतरीन शो को उनकी गुणवत्ता के बावजूद असफल होते देखने के बाद.’ अभिनेत्री ने बताया, ‘मैंने कई बेहतरीन शो को टीआरपी न मिलने और समय से पहले बंद होते देखा है. मुझे समझ नहीं आता कि यह किसी शो की सफलता या असफलता को आंकने का सही पैमाना कैसे हो सकता है.’ वह आगे कहती हैं कि टीआरपी को कभी भी एकमात्र मापदंड नहीं बनाना चाहिए. यह निर्णय सही है या गलत, इस पर बहस हो सकती है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि टीआरपी लोकप्रियता का सही मापदंड है. आखिरकार, दर्शक ही तय करते हैं कि कोई शो अच्छा है या बुरा.’

टीआरपी सिस्टम पर उठाया सवाल

स्मिता बंसल ने टीआरपी रेटिंग देने वाले सिस्टम पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ‘ये लोग कौन हैं? किन घरों में ये उपकरण हैं? टेलीविजन के दर्शक पूरे देश में बहुत बड़े पैमाने पर हैं. एक प्रतिशत के आधार पर कैसे तय किया जा सकता है कि क्या चल रहा है? हर शो के अपने दर्शक होते हैं, बच्चे, युवा, बड़े दर्शक. हर शो को एक ही संख्या के आधार पर आंकना मुझे कभी मंजूर नहीं रहा.’ उनके लिए, रेटिंग से मेहनत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता. ‘अगर मेरे शो की टीआरपी कम है, तो मैं किरदार पर कम मेहनत नहीं करूंगी. और ज़्यादा टीआरपी का मतलब यह नहीं है कि मेरा अभिनय बेहतर होगा. एक एक्टर के तौर पर, आप हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं.’ उनके अनुसार, सफलता का असली पैमाना दर्शकों से जुड़ाव है. ‘जब लोग मुझे किसी किरदार की वजह से पहचानते हैं, तो वही लोकप्रियता है. इसी से मैं आंकल करती हूं कि कोई शो चल रहा है या नहीं.’

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