Supreme Court Property Dispute: सुप्रीम कोर्ट में मां और बेटे के बीच संपत्ति विवाद की सुनवाई के दौरान एक अलग नजारा देखने को मिला. कोर्ट ने बेटे से कहा कि वह अपनी मां के पास जाए, उनके पैर छूकर माफी मांगे और उनका आशीर्वाद ले. मामले की सुनवाई जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की पीठ कर रही थी. सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने बेटे से कहा कि उसे अपनी मां के पैर छूने चाहिए और अपने किए के लिए माफी मांगनी चाहिए.
‘मां के पास जाइए और आशीर्वाद लीजिए’
जस्टिस शर्मा ने कोर्ट में मौजूद वकील से कहा कि बेटे का अपनी मां के पास जाकर माफी मांगना गलत नहीं है. उन्होंने कहा कि बेटे को अपनी मां के पास वापस जाना चाहिए, उनके पैर छूने चाहिए, माफी मांगनी चाहिए और उनका आशीर्वाद लेना चाहिए. कोर्ट ने यह बात इसलिए भी कही क्योंकि मामला माता-पिता की संपत्ति से जुड़ा था. इस संपत्ति की मां और उनके पति ही कानूनी तौर पर मालिक थे.
बेटे और बहू को रहने के लिए दी थी जगह
माता-पिता ने प्यार और स्नेह के चलते अपने बेटे और बहू को संपत्ति की पहली मंजिल पर रहने की अनुमति दी थी. उन्हें वहां रहने के लिए किराया भी नहीं देना था. माता-पिता का आरोप था कि कुछ समय बाद बेटे और उसकी पत्नी ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया. दोनों पर संपत्ति अपने नाम करने का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया गया. माता-पिता ने यह भी आरोप लगाया कि बेटे ने कथित तौर पर कुछ फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति पर अपना मालिकाना हक जताने की कोशिश की.
बेटे से संबंध खत्म करने का ऐलान किया
विवाद बढ़ने के बाद माता-पिता ने अखबार में सार्वजनिक नोटिस देकर बेटे से अपने संबंध खत्म करने की घोषणा कर दी. उन्होंने बेटे के खिलाफ FIR भी दर्ज कराई और संपत्ति खाली करने को कहा. इसके बाद माता-पिता ने कोर्ट में मुकदमा दायर कर संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने, बेटे को वहां से हटाने और नुकसान के लिए हर्जाना देने की मांग की.
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ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने माता-पिता के पक्ष में फैसला दिया
ट्रायल कोर्ट ने माना कि संपत्ति के असली मालिक माता-पिता ही हैं. कोर्ट ने कहा कि बेटा और उसकी पत्नी वहां केवल रहने की अनुमति के आधार पर रह रहे थे. जब माता-पिता ने यह अनुमति खत्म कर दी, तो बेटे और उसकी पत्नी को पहली मंजिल खाली करनी होगी. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 17 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. इसके बाद बेटे ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. सुप्रीम कोर्ट ने बेटे की याचिका खारिज कर दी.
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