Baby with Two Heads: ओडिशा के कंधमाल जिले में दो सिर वाले एक बच्चे ने जन्म लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बच्चे का जन्म ब्रह्मपुर स्थित महाराजा कृष्ण चंद्र गजपति मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में हुआ. बताया जा रहा है कि नवजात जिंदा है और सांस ले रहा है. बेहतर इलाज और लगातार निगरानी के लिए उसे एम्स भुवनेश्वर में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञों की टीम उसकी स्थिति पर नजर रख रही है.
इस दुर्लभ स्थिति को मेडिकल साइंस में ‘डाइसेफेलिस पैरापैगस’ (Dicephalic Parapagus) कहा जाता है. आइए जानते हैं कि आखिर यह स्थिति क्या है और एक ही शरीर में दो सिर कैसे विकसित हो जाते हैं.
क्या है डाइसेफेलिस पैरापैगस?
डाइसेफेलिस पैरापैगस, जुड़े हुए जुड़वां बच्चों (Conjoined Twins) का एक बेहद दुर्लभ प्रकार है. इसमें बच्चों का धड़ आपस में जुड़ा होता है. वहीं उसके सिर दो होते हैं. इस स्थिति में शरीर के अंदरूनी अंगों की बनावट और उनके काम करने की क्षमता अलग-अलग हो सकती है. बच्चे के जीवित रहने की संभावना उसकी शारीरिक संरचना और हृदय, फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति पर निर्भर करती है.
एक शरीर में दो सिर कैसे बनते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, जुड़े हुए जुड़वां बच्चों के विकसित होने को समझाने के लिए दो प्रमुख सिद्धांत बताए जाते हैं. पहला है फिशन थ्योरी, जिसके मुताबिक निषेचन के लगभग 13 से 15 दिन बाद भ्रूण का विभाजन पूरी तरह नहीं हो पाता. दूसरा है फ्यूजन थ्योरी, जिसके अनुसार शुरुआती भ्रूण आपस में जुड़ जाते हैं.
गर्भ में ही चल जाता है पता?
गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड की मदद से जुड़े हुए जुड़वां बच्चों की पहचान की जा सकती है. हाई-रिजॉल्यूशन अल्ट्रासाउंड से कुछ मामलों में गर्भावस्था के आठवें सप्ताह के आसपास ही इस स्थिति का पता चल सकता है. इससे डॉक्टरों को बच्चों की शारीरिक संरचना समझने और माता-पिता को जरूरी चिकित्सकीय परामर्श देने में मदद मिलती है. कानूनी नियम के हिसाब से गर्भपात किया जा सकता है.
कैसे जीवित रहते हैं दो सिर वाले बच्चे?
डाइसेफेलिस पैरापैगस जैसे मामलों में बच्चे के जीवित रहने की संभावना उसकी शारीरिक बनावट, हृदय और फेफड़ों जैसे महत्वपूर्ण अंगों की स्थिति पर निर्भर करती है. ऐसे मामलों में जन्म के बाद विशेष चिकित्सा देखभाल की जरूरत पड़ सकती है.