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Weight Loss vs Fat Loss: गलती कर रहे हैं 90% लोग, वजन घटा, फिर भी फिट क्यों नहीं? पहले किस पर दें ध्यान

Weight Loss vs Fat Loss: जब लोग कोई फिटनेस रूटीन शुरू करते हैं, तो वे अक्सर वजन घटाने और फैट घटाने को एक ही समझ लेते हैं, जबकि इन दोनों में काफी अंतर होता है.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: April 23, 2026 12:50:52 IST

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Weight Loss vs Fat Loss: दुनिया में बहुत लोग ऐसे हैं जो अक्सर वजन घटाने को फैट घटाना मान लेते हैं, जबकि इन दोनों में काफी अंतर होता है. वजन मापने वाली मशीन पर कम वजन दिखना हमेशा बेहतर फिटनेस का संकेत नहीं होता है. अक्सर, शरीर का वजन कम होने का मतलब शरीर से पानी या मांसपेशियों का कम होना भी हो सकता है. ऐसे मामलों में, इस बदलाव की असलियत को समझना बहुत जरूरी है. डाइटीशियन और पिलेट्स ट्रेनर दर्शन जोशी के अनुसार, फिटनेस में टिकाऊ और सेहतमंद बदलाव तभी देखने को मिलते हैं, जब सही लक्ष्य चुना जाए.

वजन घटाने और फैट घटाने में क्या अंतर है?

शरीर के कुल वजन में कमी, जिसमें हड्डियों का घनत्व, मांसपेशियां, वसा और पानी शामिल होते हैं को ‘वजन घटाना’ कहा जाता है. वजन मापने वाली मशीन (स्केल) पर जो संख्या दिखाई देती है, वह इन सभी कारकों का कुल जोड़ होती है. हालांकि, इसकी एक कमी यह है कि स्वस्थ होना हमेशा वजन घटाने का पर्याय नहीं होता है. शरीर की वसा कम होने के बजाय, यह कमी मांसपेशियों या पानी के कम होने के कारण भी हो सकती है.

दूसरी ओर, फैट कम करने का लक्ष्य शरीर की चर्बी घटाना होता है. इस रणनीति का मकसद अतिरिक्त फैट को जलाना और साथ ही मांसपेशियों को बनाए रखना है. फैट कम करने से शरीर ज्यादा दुबला और सुडौल दिखता है, भले ही कुल वजन में कोई खास बदलाव न आए, क्योंकि मांसपेशियों के ऊतक फैट की तुलना में ज्यादा सघन होते हैं. वजन घटाने की तुलना में, फैट कम करना आम तौर पर बेहतर शरीर और समग्र स्वास्थ्य का ज्यादा भरोसेमंद संकेत माना जाता है.

किस पर फोकस करें?

दर्शन जोशी का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा मोटा है और मोटापे से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है, तो वजन कम करना उसके लिए पहला जरूरी कदम हो सकता है. हालांकि, यह प्रक्रिया संतुलित आहार और उचित व्यायाम के साथ ही की जानी चाहिए. इसके विपरीत, यदि किसी व्यक्ति का वज़न सामान्य है, लेकिन उसका पेट बाहर निकला हुआ है, उसे लगता है कि उसके शरीर में कसाव की कमी है, या उसकी ताकत कम हो गई है, तो उसे केवल अपना कुल वजन कम करने के बजाय, शरीर की चर्बी घटाने और मांसपेशियों को सुडौल बनाने पर ध्यान देना चाहिए.

सिर्फ वजन मापने वाली मशीन पर निर्भर न रहें

दर्शन जोशी के अनुसार, फिटनेस को सिर्फ वजन मापने वाली मशीन से नहीं आंकना चाहिए. अक्सर ऐसा होता है कि शरीर का वजन तो एक जैसा ही रहता है, लेकिन शरीर की चर्बी कम हो जाती है और मांसपेशियों का वजन बढ़ जाता है. ऐसे मामलों में, शरीर ज्यादा फिट नजर आता है.

किन बातों पर ध्यान दें?

  • क्या आपकी कमर का नाप कम हो रहा है?
  • क्या आपके कपड़े अब ज्यादा अच्छे से फिट हो रहे हैं?
  • क्या आपकी ताकत और सहनशक्ति पहले से बढ़ी है?
  • क्या आपकी शरीर में कोई बदलाव नजर आ रहा है?
  • पूरे दिन आपका एनर्जी लेवल कैसा रहता है?
  • फैट कम करने के लिए क्या करें?

दर्शन जोशी का कहना हैं कि आप काफी मात्रा में प्रोटीन लें, संतुलित कैलोरी वाला खाना खाएं, नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें और पिलेट्स जैसी कसरतें भी शामिल करें. इसके अलावा, रोजाना एक्टिव रहना, काफी मात्रा में पानी पीना और अच्छी नींद लेना भी बहुत जरूरी है.

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Written By: Vipul Tiwary
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Weight Loss vs Fat Loss: दुनिया में बहुत लोग ऐसे हैं जो अक्सर वजन घटाने को फैट घटाना मान लेते हैं, जबकि इन दोनों में काफी अंतर होता है. वजन मापने वाली मशीन पर कम वजन दिखना हमेशा बेहतर फिटनेस का संकेत नहीं होता है. अक्सर, शरीर का वजन कम होने का मतलब शरीर से पानी या मांसपेशियों का कम होना भी हो सकता है. ऐसे मामलों में, इस बदलाव की असलियत को समझना बहुत जरूरी है. डाइटीशियन और पिलेट्स ट्रेनर दर्शन जोशी के अनुसार, फिटनेस में टिकाऊ और सेहतमंद बदलाव तभी देखने को मिलते हैं, जब सही लक्ष्य चुना जाए.

वजन घटाने और फैट घटाने में क्या अंतर है?

शरीर के कुल वजन में कमी, जिसमें हड्डियों का घनत्व, मांसपेशियां, वसा और पानी शामिल होते हैं को ‘वजन घटाना’ कहा जाता है. वजन मापने वाली मशीन (स्केल) पर जो संख्या दिखाई देती है, वह इन सभी कारकों का कुल जोड़ होती है. हालांकि, इसकी एक कमी यह है कि स्वस्थ होना हमेशा वजन घटाने का पर्याय नहीं होता है. शरीर की वसा कम होने के बजाय, यह कमी मांसपेशियों या पानी के कम होने के कारण भी हो सकती है.

दूसरी ओर, फैट कम करने का लक्ष्य शरीर की चर्बी घटाना होता है. इस रणनीति का मकसद अतिरिक्त फैट को जलाना और साथ ही मांसपेशियों को बनाए रखना है. फैट कम करने से शरीर ज्यादा दुबला और सुडौल दिखता है, भले ही कुल वजन में कोई खास बदलाव न आए, क्योंकि मांसपेशियों के ऊतक फैट की तुलना में ज्यादा सघन होते हैं. वजन घटाने की तुलना में, फैट कम करना आम तौर पर बेहतर शरीर और समग्र स्वास्थ्य का ज्यादा भरोसेमंद संकेत माना जाता है.

किस पर फोकस करें?

दर्शन जोशी का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा मोटा है और मोटापे से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है, तो वजन कम करना उसके लिए पहला जरूरी कदम हो सकता है. हालांकि, यह प्रक्रिया संतुलित आहार और उचित व्यायाम के साथ ही की जानी चाहिए. इसके विपरीत, यदि किसी व्यक्ति का वज़न सामान्य है, लेकिन उसका पेट बाहर निकला हुआ है, उसे लगता है कि उसके शरीर में कसाव की कमी है, या उसकी ताकत कम हो गई है, तो उसे केवल अपना कुल वजन कम करने के बजाय, शरीर की चर्बी घटाने और मांसपेशियों को सुडौल बनाने पर ध्यान देना चाहिए.

सिर्फ वजन मापने वाली मशीन पर निर्भर न रहें

दर्शन जोशी के अनुसार, फिटनेस को सिर्फ वजन मापने वाली मशीन से नहीं आंकना चाहिए. अक्सर ऐसा होता है कि शरीर का वजन तो एक जैसा ही रहता है, लेकिन शरीर की चर्बी कम हो जाती है और मांसपेशियों का वजन बढ़ जाता है. ऐसे मामलों में, शरीर ज्यादा फिट नजर आता है.

किन बातों पर ध्यान दें?

  • क्या आपकी कमर का नाप कम हो रहा है?
  • क्या आपके कपड़े अब ज्यादा अच्छे से फिट हो रहे हैं?
  • क्या आपकी ताकत और सहनशक्ति पहले से बढ़ी है?
  • क्या आपकी शरीर में कोई बदलाव नजर आ रहा है?
  • पूरे दिन आपका एनर्जी लेवल कैसा रहता है?
  • फैट कम करने के लिए क्या करें?

दर्शन जोशी का कहना हैं कि आप काफी मात्रा में प्रोटीन लें, संतुलित कैलोरी वाला खाना खाएं, नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें और पिलेट्स जैसी कसरतें भी शामिल करें. इसके अलावा, रोजाना एक्टिव रहना, काफी मात्रा में पानी पीना और अच्छी नींद लेना भी बहुत जरूरी है.

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