BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में हुए BRICS Summit के पहले दिन सदस्य देशों ने अमेरिका का नाम लिए बिना टैरिफ को लेकर कड़ा संदेश दिया. BRICS देशों ने कहा कि किसी भी देश की एकतरफा व्यापार नीति से दुनिया के व्यापार पर असर पड़ता है. ऐसे कदमों से व्यापार में अनिश्चितता भी बढ़ती है.
New Delhi Declaration 2026 को मंजूरी
BRICS देशों ने ‘New Delhi Declaration 2026’ को सर्वसम्मति से मंजूरी दी. भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा. किसी भी देश ने इसका विरोध नहीं किया, जिसके बाद घोषणा को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया.
टैरिफ और व्यापार की रुकावटों पर चिंता
घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार नियमों पर चिंता जताई गई. BRICS देशों का कहना है कि ऐसे कदमों से दूसरे देशों के लिए सामान बेचना मुश्किल होता है और व्यापार में बराबरी का मौका प्रभावित होता है. समूह ने WTO के नियमों के अनुसार व्यापार करने पर जोर दिया.
आर्थिक दबाव का भी विरोध
BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों का भी विरोध किया. उनका कहना है कि ऐसे कदमों का असर खासकर विकासशील देशों पर पड़ सकता है. BRICS वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज मजबूत करना चाहता है.
BRICS में कौन-कौन से देश?
BRICS में भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. समूह का मकसद सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना और वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करना है.