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रांची में सोमवार को छात्रों द्वारा किया जा रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जब हजारों छात्र राज्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने लगे.
कई दौर की बातचीत और सरकार द्वारा उनकी अधिकांश शिकायतों के समाधान के दावों के बावजूद, प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने से इनकार कर दिया, जिससे राज्य अधिकारियों के साथ सीधा टकराव हुआ.
झारखंड विधानसभा घेराव को लेकर हुई पुलिस कार्रवाई
सोमवार की सुबह, हजारों छात्र विभिन्न जिलों से ट्रेनों, बसों और निजी वाहनों से राज्य की राजधानी रांची पहुंचे और “विधानसभा घेराव” में भाग लिया. अधिकारियों ने निषेधाज्ञा लागू करके और प्रमुख चौराहों और शहर के प्रवेश द्वारों पर भारी बैरिकेड लगाकर प्रदर्शन को रोकने का प्रयास किया. जैसे ही प्रदर्शनकारी जगन्नाथपुर मंदिर के पास अंतिम सुरक्षा घेरे तक पहुंचे, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए जल प्रस्फुटन और लाठीचार्ज का प्रयोग किया. प्रशासन ने संयम बरतने का दावा किया, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी रही क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने दिन भर कई बैरिकेड तोड़ दिए. भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के बाहर अलग से विरोध प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप बाबूलाल मरांडी सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया गया.
परीक्षा अनियमितताओं और सीबीआई जांच को लेकर गतिरोध
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के खिलाफ छात्र संघ प्रतिनिधियों द्वारा चलाए जा रहे 17 दिवसीय आंदोलन में मौजूदा अशांति एक महत्वपूर्ण मोड़ है. राज्य सरकार का दावा है कि उसने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा सहित विवादास्पद मूल्यांकन रद्द करके प्रदर्शनकारियों की 98% मांगों को पूरा कर दिया है, लेकिन जेएसएससी-सीजीएल (संयुक्त स्नातक स्तर) परीक्षा को लेकर गतिरोध बना हुआ है. प्रदर्शनकारी राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित स्थानीय न्यायिक जांच को खारिज कर रहे हैं और पेपर लीक और प्रणालीगत भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच की मांग कर रहे हैं. जब तक कोई केंद्रीय एजेंसी जांच अपने हाथ में नहीं लेती, छात्र नेताओं ने राज्य भर में अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया है.