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Dhar Lat Masjid Controversy: ‘विजय मंदिर’ या लाट मस्जिद? धार में दावे के बीच कल निकलेगा ‘वराह मार्च’, बढ़ा सियासी पारा

Dhar Lat Masjid Controversy: मध्य प्रदेश के धार में लाट मस्जिद को लेकर विवाद गहराया है. हिंदू संगठन इसे विजय मंदिर बताते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय मस्जिद मानता है. 15 सितंबर को वराह मार्च प्रस्तावित है.

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Last Updated: September 15, 2026 09:26:27 IST

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Dhar Lat Masjid Controversy: मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला विवाद के बाद अब एक अन्य ऐतिहासिक स्मारक को लेकर विवाद गहरा गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित इस स्मारक को मुस्लिम समुदाय ‘लाट मस्जिद’ के नाम से पहचानता है, जबकि हिंदू संगठन इसे ‘विजय मंदिर’ या मार्तंडय मंदिर बताते हैं. विवाद के बीच ‘सनातन प्रहरी संस्था’ ने 15 सितंबर को ‘वराह मार्च’ निकालने का ऐलान किया है.

स्मारक को लेकर क्या हैं दावे?

हिंदू संगठनों का दावा है कि यह संरचना परमार काल का मंदिर है और राजा भोज ने इसे अपनी विजय की स्मृति में बनवाया था. संगठन वहां मौजूद अष्टधातु के खंभे और उस पर बनी वराह की प्रतिमा को अपने दावे का आधार बताते हैं. वहीं, मुस्लिम समुदाय इसे ऐतिहासिक रूप से ‘लाट मस्जिद’ मानता है. समुदाय की ओर से यहां लंबे समय से ईद की नमाज अदा किए जाने की बात कही जाती है. स्मारक फिलहाल ASI के संरक्षण में है और राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित इमारतों में शामिल है.

वराह मार्च को लेकर विवाद

सनातन प्रहरी संस्था ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 15 सितंबर को वराह मार्च निकालने की घोषणा की थी. संस्था का कहना है कि मार्च का उद्देश्य स्मारक परिसर में भगवान वराह के सामूहिक दर्शन करना है. आयोजकों के अनुसार, हजारों लोगों ने इसमें शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया है. हालांकि, धार जिला प्रशासन ने मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का हवाला देते हुए नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है.

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ASI ने भी स्पष्ट किया रुख

ASI अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों में धार्मिक सभा, बैठक, समारोह या अन्य आयोजन की अनुमति नहीं है. पर्यटकों को स्मारक देखने की अनुमति है, लेकिन परिसर में किसी कार्यक्रम के आयोजन पर रोक है. प्रशासन ने लोगों से मार्च में शामिल नहीं होने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. पुलिस और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. अब सभी की नजरें 15 सितंबर को धार में होने वाली गतिविधियों पर टिकी हैं.

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Dhar Lat Masjid Controversy: मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला विवाद के बाद अब एक अन्य ऐतिहासिक स्मारक को लेकर विवाद गहरा गया है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित इस स्मारक को मुस्लिम समुदाय ‘लाट मस्जिद’ के नाम से पहचानता है, जबकि हिंदू संगठन इसे ‘विजय मंदिर’ या मार्तंडय मंदिर बताते हैं. विवाद के बीच ‘सनातन प्रहरी संस्था’ ने 15 सितंबर को ‘वराह मार्च’ निकालने का ऐलान किया है.

स्मारक को लेकर क्या हैं दावे?

हिंदू संगठनों का दावा है कि यह संरचना परमार काल का मंदिर है और राजा भोज ने इसे अपनी विजय की स्मृति में बनवाया था. संगठन वहां मौजूद अष्टधातु के खंभे और उस पर बनी वराह की प्रतिमा को अपने दावे का आधार बताते हैं. वहीं, मुस्लिम समुदाय इसे ऐतिहासिक रूप से ‘लाट मस्जिद’ मानता है. समुदाय की ओर से यहां लंबे समय से ईद की नमाज अदा किए जाने की बात कही जाती है. स्मारक फिलहाल ASI के संरक्षण में है और राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित इमारतों में शामिल है.

वराह मार्च को लेकर विवाद

सनातन प्रहरी संस्था ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर 15 सितंबर को वराह मार्च निकालने की घोषणा की थी. संस्था का कहना है कि मार्च का उद्देश्य स्मारक परिसर में भगवान वराह के सामूहिक दर्शन करना है. आयोजकों के अनुसार, हजारों लोगों ने इसमें शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया है. हालांकि, धार जिला प्रशासन ने मार्च की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का हवाला देते हुए नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है.

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ASI ने भी स्पष्ट किया रुख

ASI अधिकारियों के मुताबिक राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों में धार्मिक सभा, बैठक, समारोह या अन्य आयोजन की अनुमति नहीं है. पर्यटकों को स्मारक देखने की अनुमति है, लेकिन परिसर में किसी कार्यक्रम के आयोजन पर रोक है. प्रशासन ने लोगों से मार्च में शामिल नहीं होने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है. पुलिस और प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. अब सभी की नजरें 15 सितंबर को धार में होने वाली गतिविधियों पर टिकी हैं.

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