Kisan Samman Nidhi: देश के करोड़ों किसान आर्थिक मदद के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं पर निर्भर रहते हैं. किसानों के बीच प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सबसे ज्यादा चर्चित योजना है, जिसके तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये दिए जाते हैं. यह रकम 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है. हालांकि, किसानों के लिए सरकारी मदद का दायरा सिर्फ पीएम किसान सम्मान निधि तक सीमित नहीं है. केंद्र सरकार ने खेती की लागत कम करने, फसल को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने, कृषि उपकरण खरीदने, सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराने और किसानों का जोखिम घटाने के लिए कई योजनाएं चला रखी हैं. इन योजनाओं का फायदा उठाकर किसान अपनी खेती का खर्च कम करने के साथ-साथ नुकसान की स्थिति में आर्थिक राहत भी पा सकते हैं.
फसल खराब होने पर मिल सकती है आर्थिक मदद
किसानों के सामने सबसे बड़ा जोखिम मौसम का है. बारिश, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं के कारण तैयार फसल बर्बाद हो जाए तो किसान की पूरी मेहनत और लागत पर पानी फिर सकता है. ऐसे समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का काम करती है. इस योजना के तहत बीमित फसल को प्राकृतिक आपदा से नुकसान होने पर निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजे का प्रावधान है. पात्रता और दावा प्रक्रिया पूरी होने के बाद मिलने वाली राशि किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है. केंद्र के साथ राज्य सरकारें भी योजना में अपना योगदान देती हैं.
खेती की लागत घटाने में मदद करती हैं सरकारी योजनाएं
खेती में आधुनिक मशीनों और उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए महंगे कृषि उपकरण खरीदना आसान नहीं होता. सरकार कृषि मशीनरी और आधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए अलग-अलग योजनाओं के तहत सब्सिडी उपलब्ध कराती है. कई कृषि उपकरणों पर पात्र किसानों को 50 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलने का प्रावधान है. इससे किसान कम लागत में मशीनरी खरीद सकते हैं और खेती के काम को आसान बनाने के साथ समय और श्रम की भी बचत कर सकते हैं.
खेत में सोलर पंप लगवाने का भी विकल्प
बिजली और डीजल से चलने वाले सिंचाई पंप किसानों की लागत बढ़ाते हैं. ऐसे में पीएम कुसुम योजना किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है. इस योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है. पात्र किसानों को सोलर पंप लगाने के लिए सरकारी सहायता मिल सकती है. इससे सिंचाई के लिए पारंपरिक बिजली या डीजल पर निर्भरता कम हो सकती है. कुछ परिस्थितियों में किसान अतिरिक्त सौर बिजली का इस्तेमाल या बिक्री करके आय बढ़ाने का विकल्प भी पा सकते हैं. हालांकि, सब्सिडी और पात्रता की शर्तें राज्य और योजना के प्रावधानों के अनुसार अलग हो सकती हैं.
किसानों के लिए सिर्फ केंद्र ही नहीं, राज्य भी दे रहे मदद
किसानों को मिलने वाली सरकारी सहायता केवल केंद्रीय योजनाओं तक सीमित नहीं है. अलग-अलग राज्य सरकारें भी अपने स्तर पर किसानों के लिए आर्थिक सहायता, पेंशन, कर्ज राहत, सिंचाई और कृषि उपकरणों से जुड़ी योजनाएं चलाती हैं. हाल ही में मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी का उल्लेख किया गया. इसका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान के खिलाफ सुरक्षा उपलब्ध कराना है. इसी तरह पश्चिम बंगाल के हुगली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना समेत कई परियोजनाओं से जुड़े करीब 12,200 करोड़ रुपये के कार्यों का शुभारंभ किए जाने की जानकारी सामने आई थी.
योजनाओं की जानकारी नहीं होने से छूट जाता है लाभ
सरकारी योजनाओं की संख्या बढ़ने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान इनका लाभ नहीं उठा पाते. इसकी एक बड़ी वजह योजनाओं की जानकारी और आवेदन प्रक्रिया को लेकर जागरूकता की कमी है. कई किसान केवल पीएम किसान सम्मान निधि को जानते हैं और फसल बीमा, कृषि मशीनरी सब्सिडी या सोलर पंप जैसी सुविधाओं के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखते. यही वजह है कि किसानों के लिए जरूरी है कि वे अपने राज्य के कृषि विभाग, संबंधित सरकारी पोर्टल या नजदीकी कृषि कार्यालय से योजनाओं की पात्रता और आवेदन की जानकारी लेते रहें.
मौसम और बढ़ती लागत के बीच सुरक्षा कवच
महंगी खाद, बीज, डीजल, बिजली और कृषि मशीनरी के बीच खेती की लागत लगातार किसानों के लिए चुनौती बनी हुई है. दूसरी तरफ अनियमित मौसम के कारण फसल खराब होने का जोखिम भी रहता है. ऐसे में सरकारी योजनाओं का उद्देश्य किसानों को सीधे आर्थिक सहायता देने के साथ उनकी लागत और जोखिम को कम करना है. पीएम किसान सम्मान निधि से नियमित आर्थिक सहायता, फसल बीमा से प्राकृतिक आपदा के जोखिम में राहत, कृषि उपकरणों पर सब्सिडी से लागत में कमी और सोलर पंप से सिंचाई खर्च घटाने जैसे फायदे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, हर योजना के लिए अलग पात्रता, दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया होती है, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक नियमों की जांच करना जरूरी है.