Rahul Gandhi: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में MP/MLA कोर्ट ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ उनकी टिप्पणी से जुड़े मानहानि के मामले में बरी कर दिया है. एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी मानहानि वाली नहीं थी. फैसले के समय गांधी कोर्ट में मौजूद थे. यह मामला 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान उनके दिए गए एक बयान से जुड़ा है.
इसके बाद, कांग्रेस सदस्यों ने सुल्तानपुर MP/MLA कोर्ट के बाहर पटाखे फोड़कर और मिठाइयां बांटकर जश्न मनाया. फैसले के बाद राहुल गांधी लखनऊ के लिए रवाना हो गए. इससे पहले, जब राहुल गांधी सुल्तानपुर जा रहे थे, तो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर उनके काफिले की गाड़ियों में टक्कर हो गई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पांच गाड़ियां और एक एम्बुलेंस टकरा गईं. हादसे में किसी को गंभीर चोट नहीं आई.
क्या है पूरा मामला?
यह केस मई 2018 में शुरू हुआ, जब राहुल गांधी ने कर्नाटक असेंबली इलेक्शन के लिए कैंपेन करते हुए बेंगलुरु में उस समय के BJP नेशनल प्रेसिडेंट अमित शाह के बारे में एक कमेंट किया था. उन्होंने कहा, “इंडिया में लोग भूल जाते हैं कि BJP के प्रेसिडेंट एक मर्डर आरोपी हैं. यही सच है.”
यह कमेंट सोहराबुद्दीन शेख के कथित फेक एनकाउंटर केस से जुड़ा था. अमित शाह को 2014 में मुंबई की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने इस केस में आरोपों से बरी कर दिया था. लोकल BJP लीडर विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर 4 अगस्त, 2018 को सुल्तानपुर कोर्ट में क्रिमिनल डिफेमेशन कंप्लेंट फाइल की थी.
करीब आठ साल तक चली लीगल लड़ाई
सुल्तानपुर MP-MLA कोर्ट ने राहुल गांधी को 27 नवंबर, 2023 को ट्रायल का सामना करने के लिए बुलाया था. 20 फरवरी, 2024 को कोर्ट में पेश होने के बाद उन्हें बेल मिल गई थी. जुलाई 2024 में, राहुल गांधी ने अपना स्टेटमेंट रिकॉर्ड किया और आरोपों से इनकार किया. उन्होंने तर्क दिया कि कंप्लेंट पॉलिटिकल दुर्भावना से मोटिवेटेड थी. ट्रायल के दौरान, कंप्लेंट करने वाले ने गवाह और सबूत पेश किए.
शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी के कथित वॉयस सैंपल को रिकॉर्डिंग से मैच करने की भी मांग की, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया. इस आदेश को चुनौती देने वाली बाद की याचिकाएं निचली अदालत और हाई कोर्ट में खारिज हो गईं. अक्टूबर 2026 में दोनों पक्षों की आखिरी दलीलें खत्म होने के बाद, कोर्ट ने 26 अक्टूबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने राहुल गांधी को बरी करते हुए कहा कि उनके बयान को मानहानि वाला नहीं माना जा सकता. इस फैसले के साथ, अमित शाह के खिलाफ उनकी टिप्पणियों से जुड़े क्रिमिनल मानहानि केस में राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई खत्म हो गई है. शिकायतकर्ता के पास अब हाई कोर्ट में अपील करने का मौका है.