Ram Mandir Donation Theft Case: उत्तर प्रदेश में राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है. जांच अधिकारी, अयोध्या के सर्कल ऑफिसर (CO) आशुतोष तिवारी ने बुधवार को स्पेशल एंटी-करप्शन कोर्ट में 7,278 पन्नों की चार्जशीट सौंपी. खास बात यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय बंसल और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपियों की सूची से बाहर रखा गया है; इसके बजाय वे गवाह के तौर पर शामिल होंगे. जांच अधिकारी के अनुसार, ट्रस्ट के पदाधिकारी होने के नाते वे इस मामले में गवाही देंगे. यह मामला ट्रस्ट की FIR के आधार पर दर्ज किया गया था. चार्जशीट को पांच बड़े बक्सों में भरकर कोर्ट लाया गया था. सुबह 10:30 बजे दस्तावेज जमा होने के बाद कोर्ट में वकीलों और अन्य लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई.
अयोध्या पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट में केवल उन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है जो अभी जेल में हैं; इस चोरी के मामले में किसी और पर आरोप नहीं लगाया गया है. 133 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा, आठ आरोपियों में से एक, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के खिलाफ चोरी का आरोप हटा दिया गया है, क्योंकि चोरी की रकम उनके पास से बरामद नहीं हुई थी. चार्जशीट दाखिल होने के बाद, सभी आरोपी अब हर 14 दिन में कोर्ट में पेश होंगे, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा कर दिया जाएगा.
गवाहों के तौर 133 लोग सूचीबद्ध
कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच कोर्ट में सौंपी गई चार्जशीट में, जांच अधिकारी (CO अयोध्या) आशुतोष तिवारी ने कुल 101 केस रिकॉर्ड (केस डायरी एंट्री) तैयार किए हैं. अभियोजन पक्ष के गवाहों के तौर पर कुल 133 लोगों को सूचीबद्ध किया गया है. सभी आरोपियों के खिलाफ रिहायशी घर में चोरी और नौकर द्वारा मालिक के घर से चोरी करने से संबंधित आरोप हटा दिए गए हैं. जांच अधिकारी ने स्पेशल जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रजत वर्मा की अदालत में सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. बार एसोसिएशन द्वारा 2 जुलाई को दी गई अर्जी और उसके साथ लगे हलफनामे को चार्जशीट की केस डायरी एंट्री नंबर 92, 93, 94 और 95 में शामिल किया गया है.
पूरी जांच के दौरान पुलिस ने कुल 101 केस डायरी एंट्री तैयार कीं. अभियोजन पक्ष के मामले को साबित करने के लिए 133 गवाहों की एक सूची भी दाखिल की गई है; इस सूची में गोपाल राव, अनिल मिश्र, चंपत राय और कृष्ण मोहन शामिल हैं. इसके साथ ही जांच पूरी हो गई.
वकील कोर्ट पहुंचे
राम मंदिर चोरी के मामले में चार्जशीट दाखिल होने की जानकारी मिलने पर, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र अन्य वकीलों के साथ कोर्ट पहुंचे. उन्होंने चार्जशीट देखने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने शुरू में इसकी इजाज़त नहीं दी. इससे काफी हंगामा हुआ; आखिरकार, कोर्ट ने बार एसोसिएशन द्वारा गठित पैनल के वकीलों को चार्जशीट देखने की इजाज़त दे दी. इसके बाद स्थिति शांत हो गई.
इस मामले में 25 जून को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी. यह मामला अनुकल्प मिश्र, करुणेश पांडेय, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ला और रमाशंकर यादव (उर्फ टिन्नू) के खिलाफ BNSS की धाराओं 305(a), 306, 317(2), 317(5), 316(5), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 13(1)(a) और 13(2) के तहत दर्ज किया गया था.
जांच अयोध्या CO को सौंपी गई
जांच का काम अयोध्या पुलिस के सर्कल ऑफिसर (CO) आशुतोष तिवारी को सौंपा गया. जांच के दौरान उन्होंने ज़रूरी सबूत इकट्ठा किए. पूछताछ और संबंधित सामान की बरामदगी के लिए सभी आरोपियों को एक-एक करके पुलिस कस्टडी रिमांड पर लिया गया. जैसा कि पहले बताया गया है, बार एसोसिएशन द्वारा 2 जुलाई को दी गई अर्ज़ी और उसके साथ लगे हलफनामे को चार्जशीट की केस डायरी एंट्री 92, 93, 94 और 95 में शामिल किया गया है.
वकीलों की अर्ज़ी का निपटारा
अयोध्या एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने कोर्ट से गुज़ारिश की थी कि वे श्री राम जन्मभूमि स्थल से चढ़ावे की चोरी के मामले में आरोपी के ख़िलाफ़ दायर चार्जशीट की जाँच के बाद दलीलें सुनें और आदेश जारी करें. इस गुज़ारिश को मानते हुए, एंटी-करप्शन जज रजत वर्मा ने एसोसिएशन की ओर से पेश वकीलों की टीम की दलीलें दोपहर 3:30 बजे सुनीं. सीनियर क्रिमिनल वकील प्रियनाथ सिंह, कृपाल चंद्र खरे और सौरभ मिश्रा ने चढ़ावे की चोरी के मामले में चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और सदस्य कृष्ण मोहन राव के ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने और उसके बाद कानूनी कार्रवाई करने की अपनी माँग दोहराई.
उन्होंने बताया कि एसोसिएशन के सेक्रेटरी शैलेंद्र जायसवाल समेत दस वकीलों ने पहले ही जांच अधिकारी को सबूतों के साथ हलफ़नामे सौंपे थे. हालाँकि, जाँच अधिकारी ने इन सबूतों को नज़रअंदाज़ कर दिया और उन्हें सिर्फ़ गवाह के तौर पर धारा 161 के तहत चार्जशीट में शामिल किया.