Taxation and Other Laws (Amendment) Bill: सिर्फ तीन मिनट… और एक अहम बिल लोकसभा से पास हो गया. मंगलवार, 4 अगस्त को सदन में विपक्ष अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर जोरदार हंगामा और नारेबाजी कर रहा था. इसी शोर-शराबे के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोपहर 2:12 बजे ‘टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ पेश किया और बिना चर्चा के महज 3 मिनट यानी 2:15 मिनट पर बिल पास कर दिया है. इस बिल पर किसी तरह की कोई बहस नहीं की गई.
क्या है इस बिल का मकसद?
इस बिल का मकसद विश्वसनीय नीतिगत व्यवस्था और प्रक्रियागत निश्चितता के साथ अधिक विदेशी पूंजी को अपनी तरफ आकर्षित करना है. साथ ही घरेलू विनिर्माण को भी बढ़ावा देना है. इस विधेयक में जरिए. विदेश फंड मैनेजरों के भारत में आने का प्रस्ताव था. इस बिल के तहत विदेशी निवेश को भारत में कारोबार के लिए लगाया गया निवेश नहीं माना जाएगा. साथ ही, उन विदेशी कंपनियों को मिलने वाली आयकर छूट भी वर्ष 2040-41 तक बढ़ा दी जाएगी, जो भारत की फैक्ट्रियों को मशीनें और उपकरण उपलब्ध कराती हैं. इन फैक्ट्रियों में अनुबंध विनिर्माण (कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग) के तहत उन कंपनियों के लिए खास इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद तैयार किए जाते हैं.
विधेयक में क्या-क्या प्रावधान?
- इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं में मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर आदी के पार्ट्स और एक्सेसरीज शामिल है.
- ये विधेकर विदेशी कंपनियों को 2040-41 तक 15 साल के लिए टैक्स में छूट का प्रावधान देता है.
- जो विदेशी ‘क्लाउड’ कंपनियां भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करती है, इस बिल में मंजूरी खत्म कर दी गई है.
- भारतीय डेटा सेंटर को केवल मालिकाना हक के चलते पट्टे के आधार पर संचालित किया जाएगा.
- विधेयक का उद्देश्य वैश्विक पूंजी, विनिर्माण और कारोबार को बढ़ावा देना है.
क्या बोला मंत्रालय?
सरकार चाहती है कि दुनिया के बड़े निवेश कोष, क्लाउड सेवाएं देने वाली कंपनियां और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने वाले निवेशक भारत से ही अपने ज्यादा कारोबार का संचालन करें. इसके लिए सरकार ऐसी नीतियां बनाना चाहती है, जिनसे निवेशकों को लंबे समय तक स्थिरता और भरोसा मिल सके.
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2007 में भी पेश किया गया था प्रस्ताव
विधेयक में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में भी बदलाव का प्रस्ताव है. इसके तहत उस नियम को हटाने की बात कही गई है, जो अभी बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को कुछ अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) यानी व्यापारियों से लेनदेन शुल्क वसूलने से रोकता है.