We Women Want Conclave & Shakti Awards 2026: नई दिल्ली में आज यानी सोमवार (10 अगस्त, 2026) को ‘वी वुमन वांट कॉन्क्लेव और शक्ति अवार्ड्स 2026’ की शुरुआत हो चुकी है. जहां दिल्ली की सीएम ने महिला सशक्तिकरण को लेकर बात की. साथ ही उन्होंने शक्ति अवार्ड्स 2026 से महिलाओं को सम्मानित किया. दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि आज का यह इवेंट बहुत ही महत्वपूर्ण और सुंदर है.रेखा गुप्ता ने कहा कि एक महिला अपने जीवन में सबकी केयर करती है, लेकिन एक शख्स जिसका ध्यान वह नहीं रख पाती, वह खुद है. उन्होंने कहा कि यह इवेंट कई सारी महिलाओं के लिए एक अवसर की तरह है. यह कहीं न कहीं अपने भविष्य को देखने का वह नजरिया भी है, जहां से बहुत दूर तक देखा जा सकता है.
उन्होंने कहा कि हर महिला ऐसा सोचती है कि मुझे क्या कभी कोई अवसर मिलेगा? क्या कभी जीवन में मेरे लिए ऐसा कोई रास्ता खुलेगा, जिस पर मैं चल पाऊंगी?
सभी चीजों पर चर्चा होनी चाहिए-सीएम रेखा गुप्ता
उन्होंने कहा कि आज के इस कॉन्क्लेव का नाम है ‘वी वुमन वांट’. हम क्या चाहती हैं, हमारे लिए हमने क्या सोचा है. मैं मानती हूं कि यह इवेंट केवल उपलब्धियों पर चर्चा करने का मंच नहीं है. इसमें एक महिला के जीवन में जो-जो चीजें मायने रखती हैं, उन सभी पर चर्चा होनी चाहिए. हमारी हेल्थ, हमारी डिग्निटी, हमारे सपने और हर वह चीज, जो मायने रखती है. हमें यह भी चर्चा करनी चाहिए कि हमारी आकांक्षाएं आने के बाद कहां रुक जाती हैं, कहां ब्रेक लग जाता है और हम सब कुछ छोड़कर यह सोच लेते हैं कि ‘ओके, कोई बात नहीं’ और हार मान लेते हैं.
सशक्तिकरण को लेकर कही ये बात
रेखा गुप्ता ने आगे कहा कि मैं सशक्तिकरण (Empowerment) का जो मतलब समझती हूं, मेरी नजर में उसकी परिभाषा यह है कि जो व्यक्ति यह कहे कि परिवार में पहले किसी ने नहीं किया, लेकिन मैंने करके दिखाया है. एक बेटी जब यह कहे कि ‘फर्स्ट इन माय ब्लडलाइन, मैंने अपने करियर के लिए साइंस चुना’, तो मैं इसे भी उपलब्धि मानती हूं. ‘फर्स्ट इन माय ब्लडलाइन, मैंने अपने लिए इंजीनियरिंग चुनी, जो लड़कों का डोमेन माना जाता है.’ यह भी मेरे लिए उपलब्धि है. ‘फर्स्ट इन माय ब्लडलाइन, मैंने अपना स्टार्टअप शुरू किया है.’ मैं इसे भी उपलब्धि मानती हूं. ‘फर्स्ट इन माय ब्लडलाइन, मैंने अपने पैसों से अपना घर खरीदा है.’ यह भी बड़ी बात है और मैं इसे सशक्तिकरण मानती हूं. मैं इसे भी सशक्तिकरण मानती हूं जब कोई लड़की यह कहे कि ‘हां, मैं पब्लिक फील्ड में आई.’ जैसे कि मैं, मेरे परिवार में मुझसे पहले कोई भी पब्लिक फील्ड में नहीं था, राजनीति में नहीं था.
जब माने डूसू प्रेसिडेंट बनी तो सबको झटका लगा-सीएम रेखा
छोटे से साधारण परिवार की वह बेटी, जिसके घर में चार बहनें और एक भाई हो, वैश्य परिवार की उस बेटी के लिए मां-बाप क्या कहते होंगे? शायद यही कि ‘भाई, राजनीति बनिए की बेटियों का काम नहीं है. यह हमारा काम नहीं है.’जब मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी का चुनाव लड़ा और डूसू प्रेसिडेंट बनी, तब अपने आप में यह बड़ी बात थी. पूरा खानदान और समाज यह देख रहा था कि ‘भाई, ये क्या कर दिया?’ तो शायद उनकी नजर में वह उपलब्धि नहीं थी. वह शायद एक झटका था कि ‘ये क्या करवा दिया भाई?’आज जब मैं पीछे खड़ी होकर देखती हूं तो यह समझती हूं कि बहुत सारी बेटियों को आगे आने की जरूरत है.
पीएम मोदी ने हर सेक्टर पर काम किया-सीएम रेखा
जब हमारे देश के प्रधानमंत्री ‘वूमेन-लेड डेवलपमेंट’ की बात करते हैं, तो बात केवल यह नहीं है कि बहुत सारी योजनाओं और सेक्टर में हम महिलाओं की बात करें और कहें कि हमने आपको यह स्कीम दे दी, तो बस हो गया. हमने आपके लिए उज्ज्वला योजना ला दी. बेचारी महिला चूल्हे पर खाना बनाती थी, अब धुएं से उसकी लाइफ आजाद हो पाई.यह सोच है, यह विजन है प्रधानमंत्री जी का कि उन्होंने हर उस सेक्टर पर काम किया, जो कहीं न कहीं हम महिलाओं से जुड़ा हुआ था.
टॉयलेट एक महिला के सम्मान की लड़ाई-सीएम रेखा
हम इस शहर में रहते हैं, हमारे लिए हर फैसिलिटी उपलब्ध है. लेकिन अभी भी भारत के हजारों गांवों में ऐसे कोने-कोने हैं, जहां लोग खुले में शौच के लिए जाते थे और बुरा भी नहीं माना जाता था. हमारे यहां तो कल्चर ऐसा ही चला आ रहा था. इसे बहुत ज्यादा टेकन फॉर ग्रांटेड लिया जाता था. किसी ने सोचा कि टॉयलेट एक महिला के सम्मान की लड़ाई है. प्रधानमंत्री जी ने सोचा और करोड़ों टॉयलेट बनाए.