West Bengal Chunav 2026: बीडीओ और विभिन्न थानों के प्रभारी अधिकारियों सहित 267 अधिकारियों को उनके पदों से हटाने के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची टीएमसी को झटका लगा है.
कोलकाता हाई कोर्ट से टीएमसी को झटका लगा है
West Bengal Chunav 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में अधिकारयों के तबादलों पर तृणमूल कांग्रेस को झटका लगा है. कोलकाता हाई कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के उस निर्णय में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया, जिसमें अधिकारियों के तबादलों पर सवाल उठाते हुए आपत्ति जताई गई थी. इसके साथ ही कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बीडीओ और थाना प्रभारियों (ओसी) को हटाने के खिलाफ दायर तृणमूल कांग्रेस की याचिका भी निरस्त कर दी है.
यहां पर बता दें कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान सरकारी अधिकारियों के तबादले और हटाने के मामले में तृणमूल कांग्रेस की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने पिछली सुनवाई में अदालत में पक्ष रखा था. इसके बाद अधिकारियों को हटाने के पीछे चुनाव आयोग की मंशा तथा उसके अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए गए थे. कल्याण बनर्जी ने सुनवाई के दौरान बतौर याचिकाकर्ता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को अधिकार जरूर हैं, लेकिन ये असीमित नहीं हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग मनमाने ढंग से निर्णय नहीं ले सकता है. अपना पक्ष रखते हुए कल्याण बनर्जी ने यह भी तर्क दिया था कि इस तरह के कदम संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकते हैं.
चुनाव आयोग ने पिछले दिनों बीडीओ और विभिन्न थानों के प्रभारी अधिकारियों सहित 267 अधिकारियों को उनके पदों से हटाया था. इस फैसले के खिलाफ भी अदालत में चुनौती दी गई थी, लेकिन कोलकाता हाई कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया. कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ ने इन मामलों की सुनवाई करते हुए याचिकाओं को खारिज किया. पिछले 15 मार्च को चुनाव की घोषणा के बाद उसी रात को ही चुनाव आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को उनके पद से हटा दिया था. अगली कड़ी में गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को भी उनके पद से हटाया गया. इस पर भी आपत्ति जताते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इन अधिकारियों को अचानक हटाया गया और उन्हें कोई नई जिम्मेदारी भी नहीं दी गई.
कोलकाता हाई कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष चुनाव के लिए तबादले का अधिकार है. कोर्ट ने यह भी कहा कि तबादलों से जनहित को कोई नुकसान साबित नहीं हुआ है. न्यायालय ने प्रशासनिक तंत्र के ठप होने की दलील को खारिज किया. अदालत ने कहा कि यह देशभर में किया गया कदम है, केवल एक राज्य तक सीमित नहीं. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि प्रभावित अधिकारी अलग से चुनौती दे सकते हैं.
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