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क्या है UGC का नया कानून? जानें इस प्रावधान में क्या-क्या था; क्यों पूरे देश में मचा है बवाल

UGC Bill 2026: यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को इक्विटी एक्ट 2026 रेगुलेशंन लागू किया था, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है.

UGC Equality Promotion Regulations 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) रेगुलेशन पर रोक लगा दी है, जिसे 23 जनवरी, 2026 को नोटिफाई किया गया था. इसे कई याचिकाकर्ताओं ने मनमाना, भेदभावपूर्ण और संविधान के साथ-साथ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन एक्ट, 1956 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी थी.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल 2012 में नोटिफाई किए गए UGC रेगुलेशन ही लागू रहेंगे.नोटिफाई किए गए रेगुलेशन ने तीखी पॉलिटिकल और सोशल बहस छेड़ दी थी. जो यूनिवर्सिटी कैंपस से सड़कों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आ गई थी. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन्स में इक्वालिटी प्रमोशन रेगुलेशन 2026 को सपोर्टर्स ने सोशल जस्टिस की दिशा में एक अहम कदम बताया था. जबकि देश भर के कई ऊंची जाति के संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया.

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC), जो हायर एजुकेशन में स्टैंडर्ड, बराबरी और क्वालिटी बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार भारत की सबसे बड़ी संस्था है, ने 15 जनवरी, 2026 को इन नियमों को नोटिफ़ाई किया. UGC के अनुसार, नए फ्रेमवर्क का मकसद कैंपस में जाति के आधार पर भेदभाव को रोकना और स्टूडेंट्स, टीचर्स और नॉन-टीचिंग स्टाफ़ के लिए एक सुरक्षित, सम्मानजनक और सबको साथ लेकर चलने वाला एकेडमिक माहौल पक्का करना है.

UGC क्या है?

UGC का फुल फॉर्म यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन है. UGC भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत एक कानूनी संस्था है. यह यूनिवर्सिटी शिक्षा को बढ़ावा देने और कोऑर्डिनेट करने, यूनिवर्सिटी में पढ़ाने, परीक्षा और रिसर्च के स्टैंडर्ड तय करने और बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है. यह 1956 में बने संसद के एक एक्ट के तहत योग्य यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को ग्रांट भी देता है. कमीशन हायर एजुकेशन के विकास के लिए ज़रूरी मामलों पर केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह भी देता है.

यूजीसी क्या-क्या काम करता है?

  • यूजीसी की प्रमुख जिम्मेदारियों में-
  • हायर एजुकेशन को बढ़ावा देना.
  • डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट्स की मान्यता सुनिश्चित करना.
  • यूनिवर्सिटीज में टीचिंग, एग्जाम और रिसर्च के मानकों को निर्धारित करना और बनाए रखना.
  • शिक्षा मानकों के लिए नियम बनाना.
  • कॉलेजिएट और यूनिवर्सिटी एजुकेशन के विकास की जिम्मदारी और अनुदान देना.
  • केंद्र और राज्य सरकार व उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच तालमेल के साथ काम करना.
  • हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स की मान्यता में अहम भूमिका.
  • उच्च शिक्षा में क्वालिटी डेवलेपमेंट्स के लिए पहल करना.

नया UGC कानून क्या है?

13 जनवरी 2026 को UGC ने इक्विटी एक्ट 2026 रेगुलेशन लागू किए जो पुराने 2012 रेगुलेशन की जगह लेंगे. इस रेगुलेशन का दावा है कि यह हायर एजुकेशन में बराबरी लाएगा और धर्म, जाति, जेंडर, जन्म की जगह विकलांगता वगैरह के आधार पर भेदभाव को रोकेगा. भेदभाव की शिकायतों को संभालने और कमजोर ग्रुप्स की मदद करने के लिए हर इंस्टीट्यूशन में एक इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) बनाया जाएगा.

UGC एक्ट 2026 में क्या होगा?

भेदभाव की शिकायतों को संभालने और पिछड़े ग्रुप्स की मदद करने के लिए हर इंस्टीट्यूशन में एक इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) बनाया जाएगा. इन नियमों के तहत यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के स्टूडेंट्स की शिकायतों को दूर करने के लिए इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर, इक्विटी कमेटियां, शिकायत सुलझाने का सिस्टम और 24-7 हेल्पलाइन शुरू करनी होंगी.

UGC के नए कानून का विरोध क्यों हो रहा है?

UGC के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन 2026, जिसे इक्विटी एक्ट 2026 भी कहा जाता है,’ का देश भर में विरोध हो रहा है. उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान समेत कई राज्यों में UGC के नियम पर सवाल उठ रहे हैं. बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अनलाकर अग्निहोत्री ने तो इसे ‘काला कानून’ बताते हुए अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है. इस बीच ऊंची जाति के संगठनों ने अपने विरोध को और तेज करने की धमकी दी है.

नए UGC कानून का कई वजहों से विरोध हो रहा है. कुछ लोगों का मानना ​​है कि इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है क्योंकि शिकायत करने वालों को कोई सबूत नहीं दिया जाता. जो लोग दोषी पाए जाते हैं, उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी. दूसरों का तर्क है कि यह सिर्फ़ स्टूडेंट्स तक ही सीमित नहीं है. टीचर और स्टाफ भी इसके तहत आते हैं, जिनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. जनरल कैटेगरी के लोगों का मानना ​​है कि यह जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स के खिलाफ भेदभाव करता है और उनके साथ होने वाले भेदभाव के बारे में कोई साफ जानकारी नहीं है.

यूजीसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट की 7 बड़ी बातें

29 जनवरी को यूजीसी के नियम पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ये 7 बड़ी बातें कहीं हैं-

  • UGC नए आदेश तक 2012 के नियम लागू रहेंगे.
  • यह कोई बहुत बड़ा संवैधनिक मामला नहीं है.
  • नियमों को दुरुपयोग हो सकता है.
  • विशेषज्ञ इसकी भाषा स्पष्ट करें.
  • भेदभाव की परिभाषा और समावेशी होनी चाहिए.
  • 2026 रेगुलेशन की भाषा अस्पष्ट है.
  • जाति संबंधी नियम स्पष्ट नहीं.

UGC एक्ट 2026 से पहले 2012 का नियम क्या था?

UGC के पुराने नियम को ‘हायर एजुकेशन इंस्टिट्यूशन्स में समानता को बढ़ावा देना  रेगुलेशन 2012’ कहा जाता था. यह यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में भेदभाव को रोकने के लिए पहला ऑफिशियल नियम था. 2012 की गाइडलाइंस में कई नियम थे, लेकिन उनमें OBC को शामिल नहीं किया गया था. इस बार OBC को शामिल किया गया है, जिससे ये नियम और भी विवादित हो गए हैं. शिक्षा मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, OBC, SC और ST स्टूडेंट्स मिलकर अब कुल एनरोलमेंट का 61% हिस्सा हैं.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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