Who is Nandan Nilekani: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के एग्जामिनेशन सिस्टम में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणी को एक हाई-लेवल टास्क फोर्स का हेड बनाने का ऐलान किया है. यह टास्क फोर्स एग्जामिनेशन सिस्टम को ज़्यादा ट्रांसपेरेंट, सिक्योर और टेक्नोलॉजी-बेस्ड बनाने के लिए सुझाव देगी. हाल के सालों में पेपर लीक और एग्जाम मैनेजमेंट से जुड़े विवादों के बीच इस फैसले को अहम माना जा रहा है.
नंदन नीलेकणी कौन हैं?
नंदन मोहनराव नीलेकणी का जन्म 2 जून, 1955 को बेंगलुरु में हुआ था. उनका परिवार असल में कर्नाटक के सिरसी का रहने वाला है. उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने इंफोसिस की को-फाउंडिंग की, एक ऐसी कंपनी जिसने इंडियन IT इंडस्ट्री को नया रूप दिया और इसकी लॉन्ग-टर्म ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई.
आधार प्रोजेक्ट को नई पहचान दी
नीलेकणी को देश के सबसे बड़े डिजिटल आइडेंटिटी प्रोजेक्ट, आधार को सफलतापूर्वक लागू करने का क्रेडिट भी दिया जाता है. उन्होंने यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (UIDAI) के चेयरमैन के तौर पर काम किया. उनकी लीडरशिप में, आधार सिस्टम का विस्तार हुआ, जिससे लाखों भारतीयों को बायोमेट्रिक पहचान से जोड़ा गया. वह एकस्टेप फाउंडेशन के को-चेयरमैन भी हैं, जो शिक्षा और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करता है.
नीलेकणी की सैलरी कितनी है?
फोर्ब्स की रियल-टाइम ट्रैकिंग के अनुसार, नंदन नीलेकणी की नेट वर्थ लगभग $2.4 बिलियन (लगभग ₹23,176 करोड़) है. वह भारत के सबसे अमीर लोगों और टेक दिग्गजों में शामिल हैं. नंदन नीलेकणी की अभी की सैलरी ₹0 है. जब वह 2017 में इंफोसिस के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर लौटे, तो उन्होंने अपनी मर्ज़ी से अपनी सर्विस के लिए कंपनी से कोई सैलरी, अलाउंस या मेहनताना न लेने का फैसला किया. वह अभी इस रोल में पूरी तरह से वॉलंटरी और ऑनरेरी बेसिस पर काम कर रहे हैं. उनकी इनकम का मेन सोर्स उनकी कंपनी की सैलरी नहीं है, बल्कि इंफोसिस में उनके शेयर और उन्हें मिलने वाला सालाना डिविडेंड है. इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा एग्जामिनेशन रिफॉर्म्स पर बनाई गई हाई-लेवल टास्क फोर्स के हेड के तौर पर उनकी सैलरी के बारे में कोई ऑफिशियल जानकारी जारी नहीं की गई है.