Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के लोगों पर सोशल मीडिया बैन लगाने वाला पहला देश बन गया. तब से फ्रांस ने भी ऐसा ही बिल पास किया है और स्पेन और UK भी इस पर विचार कर रहे हैं.
16 साल से कम उम्र के लिए सोशल मीडिया रोक पर सोच रहा भारत
Social Media Ban: IT मिनिस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि केंद्र सरकार इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स 2021 में बदलाव करके 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर रोक लगाने पर विचार कर रही है. नाम न बताने की शर्त पर अधिकारी ने कहा ‘कुछ अकाउंट एक्सेस किए जा सकते हैं लेकिन कुछ अकाउंट ऐसे भी हैं जिन्हें नहीं किया जाना चाहिए. हमें समझदारी से सोचना होगा कि बच्चों को एक्सेस मिलना चाहिए या नहीं.’ इस व्यक्ति के अनुसार सरकार ऑस्ट्रेलियन मॉडल पर विचार कर रही है हालांकि वह उस देश की तरह (16 साल से कम उम्र वालों के लिए) पूरी तरह बैन लगाने पर विचार नहीं कर रही है.
मंगलवार को IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार उम्र के आधार पर पाबंदियों पर अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ बातचीत कर रही है. वैष्णव ने कहा कि ‘यह एक ऐसी बात है जिसे कई देशों ने मान लिया है कि उम्र के आधार पर रेगुलेशन होना चाहिए. यह हमारे DPDP (डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन) एक्ट का हिस्सा था. अभी, हम अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ डीपफेक और उम्र के आधार पर पाबंदियों के बारे में बातचीत कर रहे हैं.’
अभी भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है जो एक तय उम्र से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया एक्सेस करने से रोकता हो लेकिन डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति का पर्सनल डेटा प्रोसेस करने से पहले वेरिफाई किए जा सकने वाले माता-पिता की मंजूरी लेनी होगी. यह इनडायरेक्टली माइनर्स के इस्तेमाल को लिमिट करता है क्योंकि प्लेटफॉर्म आमतौर पर बच्चे के डेटा को कानूनी तौर पर हैंडल करने के लिए माता-पिता की इजाज़त पर निर्भर करते हैं. इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म माता-पिता की इजाज़त के बिना बच्चों का डेटा आज़ादी से इकट्ठा नहीं कर सकते या उन पर ऐड टारगेट नहीं कर सकते.
उम्र के आधार पर पाबंदियों के लिए दुनिया भर में मिसालें हैं. ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम उम्र के लोगों पर सोशल मीडिया बैन लगाने वाला पहला देश बना. तब से, फ्रांस ने एक ऐसा ही बिल (15 साल से कम उम्र वालों के लिए) पास किया है और स्पेन और UK भी इस पर विचार कर रहे हैं.
गोवा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे कुछ भारतीय राज्य 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऑस्ट्रेलिया जैसे एज बैन पर विचार कर रहे हैं हालांकि यह साफ़ नहीं है कि वे इसे कैसे लागू कर पाएंगे. मद्रास हाई कोर्ट ने सिफारिश की है कि केंद्र ऑस्ट्रेलिया जैसे कानून पर विचार करे.
जनवरी में जारी इकोनॉमिक सर्वे में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उम्र के आधार पर पाबंदियों की सिफारिश की गई है जिसमें चेतावनी दी गई है कि युवाओं में स्क्रीन का ज़्यादा इस्तेमाल देश पर आर्थिक और सामाजिक लागत डाल रहा है जिसे मापा जा सकता है. सर्वे में सोशल मीडिया कंपनियों को उम्र का वेरिफिकेशन लागू करने और उम्र के हिसाब से डिफ़ॉल्ट लागू करने की सिफारिश की गई है ‘खासकर सोशल मीडिया, गैंबलिंग ऐप्स, ऑटो-प्ले फीचर्स और टारगेटेड एडवरटाइजिंग के लिए.’
कॉन्फ्रेंस में IT मिनिस्टर वैष्णव ने डीपफेक के आसपास मजबूत रेगुलेशन की भी मांग की और कहा कि मल्टीनेशनल कंपनियों को उस देश के कल्चरल कॉन्टेक्स्ट को समझना चाहिए जिसमें वे काम कर रही हैं क्योंकि जो चीज एक देश में बैन है वह दूसरे देश में बैन नहीं हो सकती है. वैष्णव ने कहा कि ‘यह एक ऐसी समस्या है जो दिन-ब-दिन बढ़ रही है और निश्चित रूप से हमारे बच्चों,समाज को इन नुकसानों से बचाने की जरूरत है. हमने इंडस्ट्री के साथ पहले ही बातचीत शुरू कर दी है कि जो कदम हमने पहले ही उठाए हैं उसके अलावा किस तरह के रेगुलेशन की जरूरत होगी.’ IT नियमों में हाल के बदलावों में सरकार ने तीन घंटे के अंदर डीपफेक को हटाने AI से बने कंटेंट की ज़रूरी लेबलिंग और इंटरमीडियरी के नियमों का सख्ती से पालन करने को जरूरी कर दिया है. वैष्णव ने कहा कि कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी संसदीय कमेटी ने इस मुद्दे की स्टडी की है और डीपफेक पर रोक लगाने के लिए सुझाव दिए हैं.
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